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पशुओं को सर्दी से बचाएगा गुड़ और बाजरा
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पशुओं को सर्दी से बचाएगा गुड़ और बाजरा
धामपुर। अत्यधिक सर्दी के कारण पशु भी निमोनिया बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इस बीमारी में पशु चारा कम खाता है और बदबूदार छेरा करता है। दुधारू पशुओं का इस बीमारी में दूध भी घट जाता है। ऐसे में पशु चिकित्साधिकारी पशु पालकों को सलाह दे रहे हैं कि वह अपने पशुओं को दिन में दो बार गुड़, बाजरे की खिचड़ी और सरसों का तेल जरूर पिलाएं। इससे पशुओं को निमोनिया बीमारी से बचाया जा सकता है।
उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि इस मौसम में पशुओं को ठंड से बचाना बहुत कठिन होता है। धामपुर-अल्हैपुर ब्लॉक में करीब 88,700 गाय और भैंस हैं। कड़ाके की ठंड में गाय और भैंस दोनों प्रभावित होते हैं। बड़ी बात यह है कि जिस पशु के शरीर पर बाल और उसकी त्वचा के नीचे बसा होती है, तो वे पशु ठंड को कम महसूस करते है। लेकिन जिस पशु के बदन पर बाल नहीं होते और त्वचा के नीचे बसा कम होता है। उन्हें ठंड ज्यादा लगती है। ऐसे ही पशु ठंड लगने से एकदम बीमार हो जाते है। इस समय पशु निमोनिया नामक बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। निमोनिया में सही से देखभाल न होने से पशु की जान भी जा सकती है। पहले किसान सभी प्रकार की पशुओं को रातव (राशन) खूब खिलाते थे। पर अब इसका उल्टा हो गया है। जो पशु दूध देता है, केवल उसी पशु को ही कम मात्रा में दाना खिलाते हैं। बाकी पशु इससे महरूम रहते हैं। ठंड से बचाने के लिए पशुओं की देखभाल रखनी चाहिए। उन्होंने किसानों को सुझाव दिया कि यह सब करने के बाद पशुपालकों को प्रयास करना चाहिए कि वह प्रति पशु दिन में दो बार कम से कम 200 ग्राम गुड़ सुबह और शाम जरूर खिलाएं। 200 ग्राम बाजरे की खिचड़ी बना कर खिलाना ठंड के मौसम में पशुओं के लिए बहुत लाभकारी होता है। पशुओं को सरसों का तेल पिलाएं और भी बेहतर है।
ऐसे करें पशु की देखभाल
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि पशुओं को ठंड से बचाने के लिए पशुशाला ऐसी हो जिसमें हवा न घुस सके। पशुशाला सूखी रहनी चाहिए। पशुशाला में पशुओं के नीचे प्रतिदिन गन्ने की सूखी पत्ती या पुआल डालें। साफ गरम मौसम होने पर पशुओं को सप्ताह में एक बार वह भी दोपहर से पहले निहलाएं। दुधारु और गैर दुधारू पशुओं को चारे के दाना जरूर खिलाएं। ज्यादा ठंड होने पर पशुपालक पशुशाला के बाहर अलाव जलाएं। जिससे पशुशाला के तापमान में बढ़ोतरी हो सके। पशुओं को ताजा पानी पिलाएं। वासी पानी या तालाब का पानी ठंड में पिलाने से बचें। संतुलित चारा दें। पशुओं के ऊपर ठंड से बचाने के लिए कंबल की झूल बनाकर डालें।
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धामपुर। अत्यधिक सर्दी के कारण पशु भी निमोनिया बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इस बीमारी में पशु चारा कम खाता है और बदबूदार छेरा करता है। दुधारू पशुओं का इस बीमारी में दूध भी घट जाता है। ऐसे में पशु चिकित्साधिकारी पशु पालकों को सलाह दे रहे हैं कि वह अपने पशुओं को दिन में दो बार गुड़, बाजरे की खिचड़ी और सरसों का तेल जरूर पिलाएं। इससे पशुओं को निमोनिया बीमारी से बचाया जा सकता है।
उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि इस मौसम में पशुओं को ठंड से बचाना बहुत कठिन होता है। धामपुर-अल्हैपुर ब्लॉक में करीब 88,700 गाय और भैंस हैं। कड़ाके की ठंड में गाय और भैंस दोनों प्रभावित होते हैं। बड़ी बात यह है कि जिस पशु के शरीर पर बाल और उसकी त्वचा के नीचे बसा होती है, तो वे पशु ठंड को कम महसूस करते है। लेकिन जिस पशु के बदन पर बाल नहीं होते और त्वचा के नीचे बसा कम होता है। उन्हें ठंड ज्यादा लगती है। ऐसे ही पशु ठंड लगने से एकदम बीमार हो जाते है। इस समय पशु निमोनिया नामक बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। निमोनिया में सही से देखभाल न होने से पशु की जान भी जा सकती है। पहले किसान सभी प्रकार की पशुओं को रातव (राशन) खूब खिलाते थे। पर अब इसका उल्टा हो गया है। जो पशु दूध देता है, केवल उसी पशु को ही कम मात्रा में दाना खिलाते हैं। बाकी पशु इससे महरूम रहते हैं। ठंड से बचाने के लिए पशुओं की देखभाल रखनी चाहिए। उन्होंने किसानों को सुझाव दिया कि यह सब करने के बाद पशुपालकों को प्रयास करना चाहिए कि वह प्रति पशु दिन में दो बार कम से कम 200 ग्राम गुड़ सुबह और शाम जरूर खिलाएं। 200 ग्राम बाजरे की खिचड़ी बना कर खिलाना ठंड के मौसम में पशुओं के लिए बहुत लाभकारी होता है। पशुओं को सरसों का तेल पिलाएं और भी बेहतर है।
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ऐसे करें पशु की देखभाल
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि पशुओं को ठंड से बचाने के लिए पशुशाला ऐसी हो जिसमें हवा न घुस सके। पशुशाला सूखी रहनी चाहिए। पशुशाला में पशुओं के नीचे प्रतिदिन गन्ने की सूखी पत्ती या पुआल डालें। साफ गरम मौसम होने पर पशुओं को सप्ताह में एक बार वह भी दोपहर से पहले निहलाएं। दुधारु और गैर दुधारू पशुओं को चारे के दाना जरूर खिलाएं। ज्यादा ठंड होने पर पशुपालक पशुशाला के बाहर अलाव जलाएं। जिससे पशुशाला के तापमान में बढ़ोतरी हो सके। पशुओं को ताजा पानी पिलाएं। वासी पानी या तालाब का पानी ठंड में पिलाने से बचें। संतुलित चारा दें। पशुओं के ऊपर ठंड से बचाने के लिए कंबल की झूल बनाकर डालें।
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