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Bijnor News: डेढ़ मिनट में जाना मर्ज, आधा ही सुना दर्द और लिख दी दवा
Tue, 21 May 2024 04:52 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Tue, 21 May 2024 04:52 AM IST
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बिजनौर। भले ही जिला अस्पताल को साल 2023 में मेडिकल अस्पताल में संबद्ध कर दिया है। मगर समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है। अस्पताल में मरीजों को चिकित्सक पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। इसका कारण मरीजों की बढ़ती संख्या और चिकित्सकों की कमी है। हालात ये हैं कि एक मरीज को चिकित्सक औसतन डेढ़ मिनट ही दे पा रहे हैं। इसमें ही मर्ज सुनकर दवा लिख रहे हैं। ऐसे में कई मरीजों की पूरी समस्या सुने बिना ही दवा लिख दी जाती है।
मेडिकल अस्पताल में सोमवार को 1160 मरीजों ने नए पर्चे बनवाए। जबकि करीब 250 मरीजों ने पुराने पर्चे से ही दवाई ली। अमर उजाला टीम ने सोमवार को मेडिकल अस्पताल के फिजिशियन और हड्डी रोग विभाग की पड़ताल की। पड़ताल में सामने आया कि एक चिकित्सक ने ओपीडी में 150 से ज्यादा मरीजों की समस्या सुन दवाई लिखीं।
फिजिशियन कक्ष में डॉ. राजेश डाबरे ने सोमवार को वार्ड का राउंड लेने के बाद करीब साढ़े 10 बजे ओपीडी शुरू की और करीब ढाई बजे तक 166 मरीज देखे। जबकि हड्डी रोग विभाग में डॉ. संजय कुमार ने राउंड लेने के बाद साढ़े नौ बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी की। इस दौरान उन्होंने 153 मरीजों की समस्या सुनकर दवाई और जांच लिखी। साथ ही छह प्लास्टर किए।
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- नियम से चार गुना अधिक मरीज देख रहे चिकित्सक
मिली जानकारी के अनुसार सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों को रोजाना ओपीडी में 40 मरीज देखने का नियम है। मगर मरीजों की भीड़ अधिक होने पर चिकित्सक 166 मरीज तक देख रहे हैं। इसी वजह से चिकित्सक मरीजों को समय नहीं दे पा रहे हैं।
- केस नंबर एक
बिजनौर निवासी एक महिला ने बताया कि उसके पति और बेटी का एक्सीडेंट हो गया था। बेटी को लेकर मेडिकल अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में आई। यहां चिकित्सक ने डिजिटल एक्सरे कराया। एक्सरे देखने के बाद चिकित्सक ने कहा कि फ्रेक्चर नहीं है और दवाई लिख दी। आराम नहीं मिलने पर उन्हीं चिकित्सक को दाबाेरा एक्स-रे दिखाया तो उन्होंने फ्रेक्चर बताया। जिससे साफ जाहिर होता है कि चिकित्सक ने पहली बार सही से एक्स-रे नहीं देखा।
- केस नंबर दो
बिजनौर निवासी एक व्यक्ति को समय-समय पर खून चढ़ता है। अस्पताल के ब्लड बैंक से खून लेने के लिए चिकित्सक का परामर्श जरूर चाहिए होता है। मरीज को चिकित्सक ने खून लेने के लिए लिखने के लिए कहा। इस पर चिकित्सक ने जल्दबाजी में उस मरीज को एचआईवी पॉजिटिव लिख दिया। बाद में जब मरीज ने इस बात को चिकित्सक से पूछा तो उन्होंने बाद में जांच कराने के लिए लिखा।
- वर्जन : अस्पताल में मरीजों की अधिकता है। जिस वजह से मरीजों को चिकित्सक अधिक समय नहीं दे पाते हैं। जिसके चलते बिना पूरी समस्या सुने दवाई लिखने की संभावना रहती है। सभी चिकित्सकों को निर्देश दिए जाएंगे कि मरीज की पूरी समस्या सुनकर ही दवाई और जांच लिखें। - डॉ. मनोज सैन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बिजनौर
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मेडिकल अस्पताल में सोमवार को 1160 मरीजों ने नए पर्चे बनवाए। जबकि करीब 250 मरीजों ने पुराने पर्चे से ही दवाई ली। अमर उजाला टीम ने सोमवार को मेडिकल अस्पताल के फिजिशियन और हड्डी रोग विभाग की पड़ताल की। पड़ताल में सामने आया कि एक चिकित्सक ने ओपीडी में 150 से ज्यादा मरीजों की समस्या सुन दवाई लिखीं।
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फिजिशियन कक्ष में डॉ. राजेश डाबरे ने सोमवार को वार्ड का राउंड लेने के बाद करीब साढ़े 10 बजे ओपीडी शुरू की और करीब ढाई बजे तक 166 मरीज देखे। जबकि हड्डी रोग विभाग में डॉ. संजय कुमार ने राउंड लेने के बाद साढ़े नौ बजे से दोपहर दो बजे तक ओपीडी की। इस दौरान उन्होंने 153 मरीजों की समस्या सुनकर दवाई और जांच लिखी। साथ ही छह प्लास्टर किए।
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- नियम से चार गुना अधिक मरीज देख रहे चिकित्सक
मिली जानकारी के अनुसार सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों को रोजाना ओपीडी में 40 मरीज देखने का नियम है। मगर मरीजों की भीड़ अधिक होने पर चिकित्सक 166 मरीज तक देख रहे हैं। इसी वजह से चिकित्सक मरीजों को समय नहीं दे पा रहे हैं।
- केस नंबर एक
बिजनौर निवासी एक महिला ने बताया कि उसके पति और बेटी का एक्सीडेंट हो गया था। बेटी को लेकर मेडिकल अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में आई। यहां चिकित्सक ने डिजिटल एक्सरे कराया। एक्सरे देखने के बाद चिकित्सक ने कहा कि फ्रेक्चर नहीं है और दवाई लिख दी। आराम नहीं मिलने पर उन्हीं चिकित्सक को दाबाेरा एक्स-रे दिखाया तो उन्होंने फ्रेक्चर बताया। जिससे साफ जाहिर होता है कि चिकित्सक ने पहली बार सही से एक्स-रे नहीं देखा।
- केस नंबर दो
बिजनौर निवासी एक व्यक्ति को समय-समय पर खून चढ़ता है। अस्पताल के ब्लड बैंक से खून लेने के लिए चिकित्सक का परामर्श जरूर चाहिए होता है। मरीज को चिकित्सक ने खून लेने के लिए लिखने के लिए कहा। इस पर चिकित्सक ने जल्दबाजी में उस मरीज को एचआईवी पॉजिटिव लिख दिया। बाद में जब मरीज ने इस बात को चिकित्सक से पूछा तो उन्होंने बाद में जांच कराने के लिए लिखा।
- वर्जन : अस्पताल में मरीजों की अधिकता है। जिस वजह से मरीजों को चिकित्सक अधिक समय नहीं दे पाते हैं। जिसके चलते बिना पूरी समस्या सुने दवाई लिखने की संभावना रहती है। सभी चिकित्सकों को निर्देश दिए जाएंगे कि मरीज की पूरी समस्या सुनकर ही दवाई और जांच लिखें। - डॉ. मनोज सैन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बिजनौर