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अनियमितताओं पर ग्राम प्रधान, सचिव निलंबित
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 03 Dec 2016 11:52 PM IST
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बिजनौर में जिले के विकास खंड बुढनपुर के ग्राम पंचायत बगवाड़ा में विकास कार्यों की धनराशि में अनियमितताएं पाए जाने पर ग्राम प्रधान और सचिव को निलंबित किया गया है। सूचना के अधिकार के तहत राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष पेशी के दौरान यह जानकारी दी गई।
बता दें कि उत्तराखंड निवासी डा. यू एस राणा ने जनसूचना अधिकार के तहत विकासखंड बुढ़नपुर स्योहारा में आवेदन.पत्र देकर जानकारी मांगी थी कि विकास कार्यों के नाम पर खर्च की गई धनराशि में अनियमितताओं पर क्या कार्रवाई की गई है। लेकिन विभाग की ओर से यूएस राणा को कोई सूचना नहीं दी गई। उन्होंने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया और आयोग में अपील दाखिल करके समस्त जानकारी मांगी। इस मामले में राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने विकास खंड बुढ़नपुर को सूचना का अधिकार अधिनियम.2005 की धारा 20 के तहत नोटिस जारी करके निर्देश दिए कि सभी जानकारी अनिवार्य रूप से 30 दिन के अंदर शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराकर आयोग को अवगत कराए। साथ ही सूचना देने में विलंब का कारण भी बताएं और स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दे। इसके बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
इसके चलते आयोग ने विकास खंड बुढ़नपुर के अधिकारी को दोषी मानते हुए 250 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से सूचना मांगने के दिन से 25000 रूपये का अर्थ दंड लगाया। बाद में सुनवाई पर आयोग ने डीएम को पूरे मामले की 30 दिन में विस्तृत रिपोर्ट दोनों के कलमबंद बयानों के साथ उपलप्तब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से ग्राम पंचायत अधिकारी ललित प्रताप सिंह आयोग के समक्ष सुनवाई के लिए उपस्थित हुए। जिला पंचायत राज अधिकारी के अनुसार बगवाड़ा की ग्राम प्रधान कुंता देवी, सचिव नईम अहमद और रोजगार सेवक संजीव कुमार ने कुछ फर्जी काम दिखाकर अनियमितताएं बरतीं। शुरूआती तौर पर 30000 रुपये से अधिक का गोलमाल मिला। आयुक्त को जानकारी दी गई कि इस प्रकरण में ग्राम प्रधान व सचिव को निलंबित करने के साथ ही रोजगार सेवक की संविदा सेवाएं समाप्त करने के लिए तीन सदस्यीय समिति बनी है।
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बता दें कि उत्तराखंड निवासी डा. यू एस राणा ने जनसूचना अधिकार के तहत विकासखंड बुढ़नपुर स्योहारा में आवेदन.पत्र देकर जानकारी मांगी थी कि विकास कार्यों के नाम पर खर्च की गई धनराशि में अनियमितताओं पर क्या कार्रवाई की गई है। लेकिन विभाग की ओर से यूएस राणा को कोई सूचना नहीं दी गई। उन्होंने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया और आयोग में अपील दाखिल करके समस्त जानकारी मांगी। इस मामले में राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने विकास खंड बुढ़नपुर को सूचना का अधिकार अधिनियम.2005 की धारा 20 के तहत नोटिस जारी करके निर्देश दिए कि सभी जानकारी अनिवार्य रूप से 30 दिन के अंदर शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराकर आयोग को अवगत कराए। साथ ही सूचना देने में विलंब का कारण भी बताएं और स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दे। इसके बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
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इसके चलते आयोग ने विकास खंड बुढ़नपुर के अधिकारी को दोषी मानते हुए 250 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से सूचना मांगने के दिन से 25000 रूपये का अर्थ दंड लगाया। बाद में सुनवाई पर आयोग ने डीएम को पूरे मामले की 30 दिन में विस्तृत रिपोर्ट दोनों के कलमबंद बयानों के साथ उपलप्तब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से ग्राम पंचायत अधिकारी ललित प्रताप सिंह आयोग के समक्ष सुनवाई के लिए उपस्थित हुए। जिला पंचायत राज अधिकारी के अनुसार बगवाड़ा की ग्राम प्रधान कुंता देवी, सचिव नईम अहमद और रोजगार सेवक संजीव कुमार ने कुछ फर्जी काम दिखाकर अनियमितताएं बरतीं। शुरूआती तौर पर 30000 रुपये से अधिक का गोलमाल मिला। आयुक्त को जानकारी दी गई कि इस प्रकरण में ग्राम प्रधान व सचिव को निलंबित करने के साथ ही रोजगार सेवक की संविदा सेवाएं समाप्त करने के लिए तीन सदस्यीय समिति बनी है।
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