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गुनहगार मां की ममता पाने को सजा काट रहे बेगुनाह बच्चे

Wed, 13 Oct 2021 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 13 Oct 2021 12:15 AM IST
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Innocent children serving punishment to get the love of a guilty mother
गुनहगार मां की ममता पाने को सजा काट रहे बेगुनाह बच्चे
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अचल चौधरी
बिजनौर। गुनाह करे कोई और सजा भुगते कोई। यह कहावत जेल में बंद पांच मासूमों पर सटीक बैठ रही हैं। जी हां गुनहगार मां की ममता और आंचल की छांव पाने के लिए बेगुनाह मासूमों का बचपन सलाखों के पीछे गुजर रहा है। मां की उंगली पकड़कर बाकायदा जेल के नियम कायदे भी निभाते हैं। रेत के ढेर पर बैठकर सपनों का घरौंदा बनाना, इनके बचपन से गायब है। इनके लिए किलकारी भरना और कुछ पाने की जिद लगा लेना संभव नहीं है।
जिला कारागार की महिला बैरक में इन दिनों 57 महिलाएं बंद हैं। ये महिलाएं अपने गुनाहों की वजह से जेल की चारदीवारी में कैद हैं। इनमें पांच महिलाएं ऐसी हैं जो खुद ही जेल में नहीं है, बल्कि उनके मासूम बच्चे भी उनकी खातिर जेल काट रहे हैं। तीन साल की अजरा की मां के हाथ खून से रंग गए थे। अजरा की मां को आजीवन कारावास की सजा हुई। साल 2017 को अजरा की मां जेल आई थी। जेल आने के कुछ महीने बाद ही जेल में उसका जन्म हुआ। अपने जन्म के बाद से ही अजरा ने बाहरी दुनिया नहीं देखी है, न ही घर की दहलीज पर बैठकर खेलना उसे मालूम है।
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परिवार में दादा दादी, चाचा-चाची या कोई अन्य भी होता है, यह भी उसे नहीं मालूम। परिवार के लोग उसकी मां से मुलाकात करने आते हैं तो अजरा आंचल में छिप जाती है। यह कहानी अजरा की ही नहीं बल्कि उसके जैसे चार और बच्चों की भी है। जेल की चार दीवारी में फिलहाल पांच बच्चे बंद हैं। इनमें तीन का जन्म जेल में ही हुआ, बाकी दो बच्चे अपनी मां के साथ जेल में आए। (संवाद)
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बचपन से गायब हो गई जिद
बैरक से तय समय के लिए ही बाहर निकलना, फिर बंद हो जाना। बच्चों के जीवन में भी यही शामिल हो चुका है। मां बैरक में बंद होती है, तो बच्चे भी। इन्हें देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल है कि क्या ये भी कुछ खाने या लाने की जिद करते होंगे। टॉफी या खिलौने के लिए रोते हुए जमीन पर लेट जाना बच्चों की यह आदत होती है, लेकिन जेल में बचपन का यह रंग फीका पड़ गया है।

-----कोट
तीन बच्चों का जन्म जेल में हुआ है। दो बच्चे अपनी मां के साथ जेल आए थे। बच्चों के लिए बैरक में टॉफी आदि दी जाती है। खेलने के लिए खिलौनों की व्यवस्था है। बच्चों का पूरा ख्याल रखा जाता है - शैलेंद्र प्रताप सिंह, प्रभारी जेल अधीक्षक
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