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बढ़ रही आबादी, घट रहे जंगल और जीव
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धरती पर बढ़ रहा इंसानी बोझ, घट रहे जंगल और जीव
बिजनौर। आज हम पृथ्वी दिवस मना रहे हैं तो जिले में बढ़ रही आबादी और घट रहे जंगलों पर नजर डालें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 1847 में सबसे पहली बार जिले में जनगणना की गई थी, उस समय जिले की आबादी मात्र 620552 थी। वर्तमान में जिले की आबादी बढ़कर 41 लाख तक पहुंच चुकी है। वहीं जंगलों की बात करें तो वह आधे भी नहीं रहे हैं। मात्र दो साल में ही पांच प्रतिशत जंगल जिले में घट चुके हैं। इसके अलावा पिछले पांच दशक में भेड़िया और लकड़बग्गे जैसे वन्य जीवों जिले में दिखाई ही नहीं दे रहे।
जिले के इतिहास में झांके तो जिला गजेटियर कई महत्वपूर्ण तथ्य अपने आप में समेटे हुए हैं। जिला गजेटियर में 1847 में सबसे पहले जिले की जनगणना होने का जिक्र है। उस समय जिले में 620552 लोग जिले में गिने गए थे। जबकि 1976 गांव उस समय जिले में आबाद थे। एक वर्ग मील में करीब 325 व्यक्ति का जिले में धनत्व था। इसके बाद 19901 में हुई जनगणना में जिले की आबादी बढ़कर सात लाख 80 हजार हो गई। हर दस साल में जनगणना हुई और 1951 तक जिले की आबादी 9 लाख 84 हजार 196 तक पहुंच गई। 1847 से 1951 तक जिले की आबादी में करीब तीन लाख 60 हजार का अंतर आया। 1951 से वर्तमान की आबादी के बीच आए अंतर की बात करें तो यह 30 लाख से ज्यादा है। वर्तमान में जिले में 41 लाख से ज्यादा आबादी होने का अनुमान है। इसी तरह जिले में गांवों की संख्या भी बढ़कर ढ़ाई हजार के पार हो गई। अब ऐसे भी गांव हैं, जहां दो दो पंचायतें हैं और आबादी पांच हजार से ज्यादा है।
घट रहा जंगल बढ़ा रहा चिंता
जिले में यूं तो हर साल लाखों पौधे लगाने का दावा किया जाता है, लेकिन फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। हाल ही में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें जिले में पिछले दो साल में जंगल का रकबा करीब पांच प्रतिशत घटने की बात कही गई थी। उधर पौधरोपण पर नजर डालें तो इस बार भी 75 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। जबकि पिछले साल यह 65 लाख था। पिछले पांच साल में औसतन हर साल 50 लाख पौधे लगाने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद घटते जंगल चिंता का विषय है। लगातार होते निर्माण और सड़क चौड़ीकरण में भी हजारों पेड़ हर साल काटे जा रहे हैं।
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भेड़िया हुआ विलुप्त, कई दशक बाद दिखा था लकड़बग्घा
जिले में जंगल घटने और शिकार के कारण कई वन्य जीव विलुप्त भी हो चुके हैं। जिला गजेटियर में जिले में भेड़िया और लकड़बग्घा, घड़ियाल के होने का जिक्र मिलता है। पिछले दो से तीन दशक में जिले में कहीं भी भेड़िया नहीं देखा गया है। वहीं गंगा से घड़ियाल विलुप्त हो चुके थे। अब गंगा में दोबारा घड़ियालों का पुनर्वास कराया जा रहा है। उधर लकड़बग्घा की बात करें तो दो साल पहले एक सड़क दुर्घटना में दो लकड़बग्घा मारे गए थे। इसके अलावा इन्हें कहीं नहीं देखा गया है।
ऐसे बढ़ी जिले की आबादी
वर्ष आबादी
1847 6,20,552
1901 7,80,105
1911 8,06,089
1921 7,40,368
1941 9,10,223
1951 9,84,196
1971 14,90,185
2011 3,682,713
नोट: वर्तमान में जिले की आबादी 41 लाख से ज्यादा होने का अनुमान है।
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बिजनौर। आज हम पृथ्वी दिवस मना रहे हैं तो जिले में बढ़ रही आबादी और घट रहे जंगलों पर नजर डालें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 1847 में सबसे पहली बार जिले में जनगणना की गई थी, उस समय जिले की आबादी मात्र 620552 थी। वर्तमान में जिले की आबादी बढ़कर 41 लाख तक पहुंच चुकी है। वहीं जंगलों की बात करें तो वह आधे भी नहीं रहे हैं। मात्र दो साल में ही पांच प्रतिशत जंगल जिले में घट चुके हैं। इसके अलावा पिछले पांच दशक में भेड़िया और लकड़बग्गे जैसे वन्य जीवों जिले में दिखाई ही नहीं दे रहे।
जिले के इतिहास में झांके तो जिला गजेटियर कई महत्वपूर्ण तथ्य अपने आप में समेटे हुए हैं। जिला गजेटियर में 1847 में सबसे पहले जिले की जनगणना होने का जिक्र है। उस समय जिले में 620552 लोग जिले में गिने गए थे। जबकि 1976 गांव उस समय जिले में आबाद थे। एक वर्ग मील में करीब 325 व्यक्ति का जिले में धनत्व था। इसके बाद 19901 में हुई जनगणना में जिले की आबादी बढ़कर सात लाख 80 हजार हो गई। हर दस साल में जनगणना हुई और 1951 तक जिले की आबादी 9 लाख 84 हजार 196 तक पहुंच गई। 1847 से 1951 तक जिले की आबादी में करीब तीन लाख 60 हजार का अंतर आया। 1951 से वर्तमान की आबादी के बीच आए अंतर की बात करें तो यह 30 लाख से ज्यादा है। वर्तमान में जिले में 41 लाख से ज्यादा आबादी होने का अनुमान है। इसी तरह जिले में गांवों की संख्या भी बढ़कर ढ़ाई हजार के पार हो गई। अब ऐसे भी गांव हैं, जहां दो दो पंचायतें हैं और आबादी पांच हजार से ज्यादा है।
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घट रहा जंगल बढ़ा रहा चिंता
जिले में यूं तो हर साल लाखों पौधे लगाने का दावा किया जाता है, लेकिन फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। हाल ही में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें जिले में पिछले दो साल में जंगल का रकबा करीब पांच प्रतिशत घटने की बात कही गई थी। उधर पौधरोपण पर नजर डालें तो इस बार भी 75 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। जबकि पिछले साल यह 65 लाख था। पिछले पांच साल में औसतन हर साल 50 लाख पौधे लगाने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद घटते जंगल चिंता का विषय है। लगातार होते निर्माण और सड़क चौड़ीकरण में भी हजारों पेड़ हर साल काटे जा रहे हैं।
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भेड़िया हुआ विलुप्त, कई दशक बाद दिखा था लकड़बग्घा
जिले में जंगल घटने और शिकार के कारण कई वन्य जीव विलुप्त भी हो चुके हैं। जिला गजेटियर में जिले में भेड़िया और लकड़बग्घा, घड़ियाल के होने का जिक्र मिलता है। पिछले दो से तीन दशक में जिले में कहीं भी भेड़िया नहीं देखा गया है। वहीं गंगा से घड़ियाल विलुप्त हो चुके थे। अब गंगा में दोबारा घड़ियालों का पुनर्वास कराया जा रहा है। उधर लकड़बग्घा की बात करें तो दो साल पहले एक सड़क दुर्घटना में दो लकड़बग्घा मारे गए थे। इसके अलावा इन्हें कहीं नहीं देखा गया है।
ऐसे बढ़ी जिले की आबादी
वर्ष आबादी
1847 6,20,552
1901 7,80,105
1911 8,06,089
1921 7,40,368
1941 9,10,223
1951 9,84,196
1971 14,90,185
2011 3,682,713
नोट: वर्तमान में जिले की आबादी 41 लाख से ज्यादा होने का अनुमान है।