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आयुर्वेदिक उपायों से बढ़ाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता
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आयुर्वेदिक उपायों से बढ़ाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता
बिजनौर। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक उपाय अपनाने को शासन द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने शासनादेश में बताया है कि आयु व स्वास्थ्य से जुड़ा विज्ञान होने के साथ ही आयुर्वेद प्राकृतिक साधनों के प्रयोग पर बल देता है। रोगों से बचाव का आयुर्वेदिक पक्ष दिनचर्या व ऋतुचर्या पर आधारित होता है। आयुर्वेद शास्त्रों में वर्णित सरल उपायों द्वारा व्यक्ति अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि कर सकता है। पूरे दिन गरम पानी पीना चाहिए। कम से कम 30 मिनट योगासन, प्रणायाम व ध्यान करना चाहिए। हल्दी, जीरा, धनिया, लहसुन आदि मसालों का भोजन में प्रयोग करना चाहिए। रोज दस ग्राम च्यवनप्राश खाना चाहिए। तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, सोंठ, मुनक्का से बनी हर्बल टी, काढ़ा दिन में दो बार पीना चाहिए। इसमें स्वादानुसार गुड़ या नींबू मिला सकते हैं। 150 एमएल गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर दिन में दो बार पीना चाहिए। सुबह, शाम तिल या नारियल का तेल या घी नाक के दोनों छिद्रों में डालना चाहिए। एक चम्मच तिल या नारियल के तेल को एक या दो मिनट तक कुल्ले की तरह मुंह में घुमाना चाहिए। इसे थूक कर गरम पानी से कुल्ला करें। ऐसा दिन में दो बार करें। दिन में एक बार गरम पानी में पुदीने के पत्ते या आजवाइन डालकर पानी की भांप लें। खांसी या गले में खराश होने पर लौंग के चूर्ण में गुड़ या शहद मिलाकर दिन में दो या तीन बार लें।
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बिजनौर। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक उपाय अपनाने को शासन द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने शासनादेश में बताया है कि आयु व स्वास्थ्य से जुड़ा विज्ञान होने के साथ ही आयुर्वेद प्राकृतिक साधनों के प्रयोग पर बल देता है। रोगों से बचाव का आयुर्वेदिक पक्ष दिनचर्या व ऋतुचर्या पर आधारित होता है। आयुर्वेद शास्त्रों में वर्णित सरल उपायों द्वारा व्यक्ति अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि कर सकता है। पूरे दिन गरम पानी पीना चाहिए। कम से कम 30 मिनट योगासन, प्रणायाम व ध्यान करना चाहिए। हल्दी, जीरा, धनिया, लहसुन आदि मसालों का भोजन में प्रयोग करना चाहिए। रोज दस ग्राम च्यवनप्राश खाना चाहिए। तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, सोंठ, मुनक्का से बनी हर्बल टी, काढ़ा दिन में दो बार पीना चाहिए। इसमें स्वादानुसार गुड़ या नींबू मिला सकते हैं। 150 एमएल गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर दिन में दो बार पीना चाहिए। सुबह, शाम तिल या नारियल का तेल या घी नाक के दोनों छिद्रों में डालना चाहिए। एक चम्मच तिल या नारियल के तेल को एक या दो मिनट तक कुल्ले की तरह मुंह में घुमाना चाहिए। इसे थूक कर गरम पानी से कुल्ला करें। ऐसा दिन में दो बार करें। दिन में एक बार गरम पानी में पुदीने के पत्ते या आजवाइन डालकर पानी की भांप लें। खांसी या गले में खराश होने पर लौंग के चूर्ण में गुड़ या शहद मिलाकर दिन में दो या तीन बार लें।