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साल 1928 में अंग्रेज कलेक्टर ने रखी थी विदुरकुटी के जीर्णोद्धार की नींव

Thu, 02 Jun 2022 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jun 2022 12:15 AM IST
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In 1928, the British collector had laid the foundation for the restoration of Vidurkuti.
बिजनौर स्थित विदुर कुटी। - फोटो : BIJNOR
1928 में अंग्रेज कलेक्टर ने रखी थी विदुरकुटी के जीर्णोद्धार की नींव
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बिजनौर। विदुरकुटी को पर्यटन के फलक पर लाने और सुंदरीकरण के अब तक तमाम प्रयास हो चुके हैं। प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में विदुरकुटी शामिल है, लेकिन विदुरकुटी की महत्ता से अंग्रेज भी वाकिफ रहे हैं। दो जून 1928 में बिजनौर के अंग्रेज कलक्टर ने खंजाची के साथ मिलकर विदुरकुटी को बचाने का प्रयास किया। उन्होंने ही जीर्णोद्धार की नींव रखी। उस वक्त गंगा के कटान से बचाने के लिए दो गोलाकार पक्के निर्माण कराए गए, एक छोटा शिव मंदिर भी बनाया गया था।
महाभारत काल में महात्मा विदुर आदर्श पुरुष रहे हैं, जोकि धर्म शास्त्र, नीति शास्त्र, विभिन्न विधाओं के प्रकांड पंडित, ज्योतिष मर्मज्ञ, न्याय प्रिय, स्पष्ट वक्ता और महान संत थे। उनकी विदुर नीति आज भी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। महाभारत हुआ तो विदुर हस्तिनापुर को छोड़ आए तथा बिजनौर मुख्यालय से लगभग 11 किलोमीटर दूर दारानगर गंज के समीप गंगा के तट पर आश्रम बनाकर रहने लगे। भगवान श्रीक़ृष्ण ने दुर्योधन के राजसी भोजन का त्याग कर विदुर जी के आश्रम में बथुए के साग का भोजन ग्रहण किया। आज भी विदुर कुटी के आसपास साल भर बथुआ पर्याप्त मात्रा में मिलना, इसका प्रमाण है।
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स्मृति हिंदी शोध संस्थान बिजनौर के रवि प्रकाश आर्य और डॉ. रामस्वरूप आर्य बताते हैं कि महात्मा विदुर की इस कुटिया को बचाने का सर्वप्रथम प्रयास दो जून 1928 में हुआ। उस वक्त यह प्रयास सालिक ग्राम खजांची तथा तत्कालीन अंग्रेज जिलाधिकारी जीबीएफ कयेर ने किया। जीर्णोद्धार के लिए घाट के निर्माण को गोले गलाए गए, तब उत्तरी गोले की खोदाई में एक प्राचीन शिवलिंग निकला। जिसे उसी जगह स्थापित कर एक छोटा शिव मंदिर बना दिया गया था, जो आज भी विद्यमान है। साथ ही तीन कक्षीय मंदिर का निर्माण कर उसमें भगवान श्री कृष्ण के तीन स्वरूपों की मूर्तियां स्थापित की गईं।
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सन 1984 में इस विशाल बरामदे में छह अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। मंदिर में विदुर जी की विशाल प्रतिमा और विदुर चरण चिह्न भी स्थापित किए गए हैं। पिछले दिनों राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा विदुर प्राच्य विद्या केंद्र का उद्घाटन और विदुर कुटी का भ्रमण किया गया निश्चय ही यह मंदिर आने वाले दिनों में एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करेगा।
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