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धामपुर में नाला बनकर रह गई इकड़ा नदी
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धामपुर में नाला बनकर रह गई इकड़ा नदी
धामपुर। प्रशासन बेशक संभावित बाढ़ से निपटने के लिए पूरी तैयारी किए जाने का दावा कर रहा है, लेकिन तैयारी सिर्फ कागजों तक ही नजर आ रही है। धरातल पर कोई तैयारी नहीं है। खासकर धामपुर की इकड़ा नदी को लेकर तो प्रशासन कतई गंभीर नहीं है। धामपुर में इकड़ा नदी सिर्फ नाले के स्वरूप में ही रह गई है। ऐसे में बारिश से नदी में बाढ़ आई तो तबाही मचेगी, लोगों के घरों में पानी घुस जाएगा।
तहसील प्रशासन की ओर से 18 जून को साल 2021-2 में संभावित बाढ़ से निपटने के लिए वृहद प्लान तैयार किया गया। इस प्लानिंग मीटिंग में धामपुर के राजस्व निरीक्षक विनोद कुमार ने अधिकारियों को बताया था कि नगर के भीतर से बरसाती इकड़ा नदी गुजरती है। ज्यादा बारिश होती है तो यह नदी उफन जाती है। यह नदी पहाड़ों से निकल कर धामपुर हुसैनपुर और नगर के बीच से प्रवाहित होती हुई चीनी मिल से आगे जाकर कडूला नदी में गिर जाती है। बताया गया कि नदी का फाट करीब सात से आठ गट्ठे चौड़ा है। पर वर्तमान में घटकर मात्र दो से पांच मीटर तक का रहा गया है।
नदी की भूमि पर हुए अतिक्रमण के चलते धामपुर में इस नदी का स्वरूप मात्र नाले जैसा रह गया है। नदी की न तो सफाई हुई और न ही नदी की जमीन को कब्जामुक्त करा पूर्व स्वरूप में लाने का प्रयास किया गया। बारिश हुई तो नदी के आसपास के क्षेत्र में काफी नुकसान होगा। नदी के ओवरफ्लो होने से सबसे ज्यादा नुकसान धामपुर हुसैनपुर, टीचर्स कालोनी में होता है। जलभराव से कई कई दिन तक स्कूल बंद हो जाते हैं। हाईवे 74 को भी नुकसान होने की आशंका बन जाती है।
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क्षेत्र के तिरमल सिंह, घनश्याम सिंह, दिनेश कुमार, सुरेंद्र कुमार देवरा, महीपाल सिंह, रामनरेश सिंह का कहना है कि बाढ़ की संभावना केवल प्लान तैयार करने से खत्म नहीं होगी। प्लान के तहत धरालत पर काम नजर आना चाहिए। नगर के भीतर तो पालिका की ओर से सफाई हुई है। पर गांवों में कुछ नहीं हुआ। एसडीएम धीरेंद्र सिंह ने मामले को संज्ञान में लेकर जांच कर कार्रवाई कराने की बात कही है।
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धामपुर। प्रशासन बेशक संभावित बाढ़ से निपटने के लिए पूरी तैयारी किए जाने का दावा कर रहा है, लेकिन तैयारी सिर्फ कागजों तक ही नजर आ रही है। धरातल पर कोई तैयारी नहीं है। खासकर धामपुर की इकड़ा नदी को लेकर तो प्रशासन कतई गंभीर नहीं है। धामपुर में इकड़ा नदी सिर्फ नाले के स्वरूप में ही रह गई है। ऐसे में बारिश से नदी में बाढ़ आई तो तबाही मचेगी, लोगों के घरों में पानी घुस जाएगा।
तहसील प्रशासन की ओर से 18 जून को साल 2021-2 में संभावित बाढ़ से निपटने के लिए वृहद प्लान तैयार किया गया। इस प्लानिंग मीटिंग में धामपुर के राजस्व निरीक्षक विनोद कुमार ने अधिकारियों को बताया था कि नगर के भीतर से बरसाती इकड़ा नदी गुजरती है। ज्यादा बारिश होती है तो यह नदी उफन जाती है। यह नदी पहाड़ों से निकल कर धामपुर हुसैनपुर और नगर के बीच से प्रवाहित होती हुई चीनी मिल से आगे जाकर कडूला नदी में गिर जाती है। बताया गया कि नदी का फाट करीब सात से आठ गट्ठे चौड़ा है। पर वर्तमान में घटकर मात्र दो से पांच मीटर तक का रहा गया है।
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नदी की भूमि पर हुए अतिक्रमण के चलते धामपुर में इस नदी का स्वरूप मात्र नाले जैसा रह गया है। नदी की न तो सफाई हुई और न ही नदी की जमीन को कब्जामुक्त करा पूर्व स्वरूप में लाने का प्रयास किया गया। बारिश हुई तो नदी के आसपास के क्षेत्र में काफी नुकसान होगा। नदी के ओवरफ्लो होने से सबसे ज्यादा नुकसान धामपुर हुसैनपुर, टीचर्स कालोनी में होता है। जलभराव से कई कई दिन तक स्कूल बंद हो जाते हैं। हाईवे 74 को भी नुकसान होने की आशंका बन जाती है।
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क्षेत्र के तिरमल सिंह, घनश्याम सिंह, दिनेश कुमार, सुरेंद्र कुमार देवरा, महीपाल सिंह, रामनरेश सिंह का कहना है कि बाढ़ की संभावना केवल प्लान तैयार करने से खत्म नहीं होगी। प्लान के तहत धरालत पर काम नजर आना चाहिए। नगर के भीतर तो पालिका की ओर से सफाई हुई है। पर गांवों में कुछ नहीं हुआ। एसडीएम धीरेंद्र सिंह ने मामले को संज्ञान में लेकर जांच कर कार्रवाई कराने की बात कही है।