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शासन ध्यान दे तो दूर हो सकती है बदहाली

Tue, 29 Sep 2020 11:46 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2020 11:46 PM IST
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If the government pays attention, the situation can be far worse
शासन ध्यान दे तो दूर हो सकती है बदहाली
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धामपुर। किसी जमाने में जैतरा स्थित क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम के केंद्रीय वस्त्रागार का देश में नाम था। गैर प्रदेशों से यहां पर कच्चा माल मंगाया जाता था। सूत की कताई के बाद व्यापक स्तर पर खादी के वस्त्रों को तैयार किया जाता था। पिलखुआ, बाराबंकी आदि स्थानों पर कपड़े की छपाई का काम होता था। कहीं रंगाई और धुलाई होती थी। लेकिन आज के दौर में धामपुर का यह केंद्रीय वस्त्रागार दम तोड़ चुका है। उत्पादन और बिक्री पर कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों को अभी भी यही आस है कि यदि सरकार ने इस तरफ ध्यान दिया तो वह और उनके संस्थान की बदहाली दूर हो सकती है।

गांधी आश्रम के वरिष्ठ कर्मचारी अशोक सिंह का कहना है कि सरकार और संस्थान का प्रशासनिक अमला इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। वस्त्रागार में कमीशन खोरी जोरों पर है। कर्मचारियों को कई कई महीनों से वेतन नहीं मिल पा रहा है। यदि वेतन मिल भी रहा है तो वह किस्तों के रूप में दिया जा रहा है। वस्त्रागार में कपड़ों की सिलाई करने के लिए पांच ठेकेदार कारीगरों के साथ काम करते हैं। ठेकेदार इकबाल का कहना है कि उन्हें तीन सालों से सिलाई का पैसा भी नहीं मिला है। मोहम्मद हनीफ, तस्लीम का कहना है कि उनके भी लाखों रुपये संस्थान पर हैं। कर्मचारी धर्म देव सिंह चौहान बताते हैं कि एक जमाना था कि जब हर गांव में महिलाएं चरखे से सूत की कताई करके बड़ी संख्या में माल को यहां लाकर बेचती थी। उनके कारिंदे भी गांवों में जाकर बाजार लगाकर सूत की खरीदारी करते थे। गुलाब सिंह चौहान कहते हैं की कुछ लोहा खोटा कुछ लुहार। लेकिन यहां तो ऐसा लग रहा है कि लुहार और लोहा दोनों की खोटे है। न तो सरकार ध्यान दे रही है और न ही संस्थान के पदाधिकारी।
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