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Bijnor News: बिजनौर से रहा हास्य कवि काका हाथरसी का नाता
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काका हाथरसी
पुण्यतिथि पर विशेष
- काका हाथरसी ने बिजनौर में बिताए थे दो साल
विवेक गुप्ता
बिजनौर/ कोतवाली देहात। हास्य कवि काका हाथरसी का बिजनौर से बेहद जुड़ाव रहा। उन्होंने दो वर्ष बिजनौर में बिताए। जोकि यहां के लोगों से बेहद आत्मीयता रखते थे। उन्होंने अपनी आत्मकथा में भी बिजनौर का जिक्र किया।
काका हाथरसी का जन्म 18 सितंबर 1906 को हाथरस में हुआ था। काका हाथरसी की भतीजी मीना अग्रवाल का विवाह बिजनौर के वर्धमान कॉलेज में हिंदी विभाग अध्यक्ष रहे डॉ गिरिराज शरण अग्रवाल के साथ हुआ था। वह सन 1993 से 1995 तक लगभग 2 वर्ष बिजनौर में ही रहे। डॉ गिरिराज शरण अग्रवाल तथा मीना अग्रवाल की पुत्री अनुभूति को काका हाथरसी उड़न खटोला कहकर बुलाते थे। बिजनौर प्रवास के दौरान काका की अपनी नवासी अनुभूति से जमकर बनती थी। अनुभूति बताती है कि काका उन्हें पढ़ने के लेकर बेहद प्रेरित करते थे। वह काका के साथ रमी खेलती थी और काका को खूब हराती थी। अपनी हार पर भी काका मुस्कुराते रहते थे।
बिजनौर की जलवायु की करते थे प्रशंसा
काका हाथरसी को बिजनौर की जलवायु बेहद पसंद आई थी। काका ने एक छक्का बिजनौर पर लिखा था। छक्का उनकी काव्य की ही एक विधा थी।
सोचा परिवर्तन करें, जीवन में कुछ और,
छोड़ हाथरस आ गए काका कवि बिजनौर ,
काका कवि बिजनौर बुढ़ापे कि यह नैया,
कर दे भव से पार निकट है गंगा मैया,
शुद्ध यहां जलवायु मित्र संबंधी प्यारे,
दूर करे सब संकट प्रभु गिरिराज हमारे।
आवास पर लगा रहता था लोगों का जमावड़ा
काका हाथरसी के बिजनौर में रहने के दौरान उनके पास मिलने वालों का तांता लगा रहता था। साहित्यकारों के साथ-साथ चिकित्सक और आम नागरिक भी काका से मिलने आते थे। बिजनौर के साहित्यकार निश्तर खानकाही, अनमोल शुक्ला, अजय जनमेजय,मनोज अबोध, डॉ शशिप्रभा तथा बिजनौर के कई चिकित्सक जिनमें डॉ पीयूष वर्मा, डॉ अशोक चौधरी, डॉ अनिल अग्रवाल, डॉ नीरज गुप्ता, डॉ पीके शुक्ला भी काका हाथरसी के पास उनकी कविताएं सुनने आते थे।
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आत्मकथा में किया है बिजनौर का जिक्र
काका हाथरसी ने अपनी आत्मकथा मेरा जीवन एवन में बिजनौर का कई स्थानों पर उल्लेख किया है। उन्होंने बिजनौर के कई लोगों का भी आत्मकथा में उल्लेख किया है। मृत्यु से एक माह पूर्व बिजनौर से हाथरस चले गए थे। उनकी मृत्यु 18 सितंबर 1995 को हुई।
बिजनौर के शिक्षकों को दिया जाता है काका शिक्षक सम्मान
अनुभूति बताती हैं कि उनकी संस्था नियोफ्यूजन क्रिएटिव फाउंडेशन द्वारा काका हाथरसी की स्मृति में जनपद बिजनौर के शिक्षकों को काका हाथरसी शिक्षक सम्मान दिया जाता है। इस वर्ष यह पुरस्कार शिक्षक राम अवतार सिंह को दिया गया है।
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- काका हाथरसी ने बिजनौर में बिताए थे दो साल
विवेक गुप्ता
बिजनौर/ कोतवाली देहात। हास्य कवि काका हाथरसी का बिजनौर से बेहद जुड़ाव रहा। उन्होंने दो वर्ष बिजनौर में बिताए। जोकि यहां के लोगों से बेहद आत्मीयता रखते थे। उन्होंने अपनी आत्मकथा में भी बिजनौर का जिक्र किया।
काका हाथरसी का जन्म 18 सितंबर 1906 को हाथरस में हुआ था। काका हाथरसी की भतीजी मीना अग्रवाल का विवाह बिजनौर के वर्धमान कॉलेज में हिंदी विभाग अध्यक्ष रहे डॉ गिरिराज शरण अग्रवाल के साथ हुआ था। वह सन 1993 से 1995 तक लगभग 2 वर्ष बिजनौर में ही रहे। डॉ गिरिराज शरण अग्रवाल तथा मीना अग्रवाल की पुत्री अनुभूति को काका हाथरसी उड़न खटोला कहकर बुलाते थे। बिजनौर प्रवास के दौरान काका की अपनी नवासी अनुभूति से जमकर बनती थी। अनुभूति बताती है कि काका उन्हें पढ़ने के लेकर बेहद प्रेरित करते थे। वह काका के साथ रमी खेलती थी और काका को खूब हराती थी। अपनी हार पर भी काका मुस्कुराते रहते थे।
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बिजनौर की जलवायु की करते थे प्रशंसा
काका हाथरसी को बिजनौर की जलवायु बेहद पसंद आई थी। काका ने एक छक्का बिजनौर पर लिखा था। छक्का उनकी काव्य की ही एक विधा थी।
सोचा परिवर्तन करें, जीवन में कुछ और,
छोड़ हाथरस आ गए काका कवि बिजनौर ,
काका कवि बिजनौर बुढ़ापे कि यह नैया,
कर दे भव से पार निकट है गंगा मैया,
शुद्ध यहां जलवायु मित्र संबंधी प्यारे,
दूर करे सब संकट प्रभु गिरिराज हमारे।
आवास पर लगा रहता था लोगों का जमावड़ा
काका हाथरसी के बिजनौर में रहने के दौरान उनके पास मिलने वालों का तांता लगा रहता था। साहित्यकारों के साथ-साथ चिकित्सक और आम नागरिक भी काका से मिलने आते थे। बिजनौर के साहित्यकार निश्तर खानकाही, अनमोल शुक्ला, अजय जनमेजय,मनोज अबोध, डॉ शशिप्रभा तथा बिजनौर के कई चिकित्सक जिनमें डॉ पीयूष वर्मा, डॉ अशोक चौधरी, डॉ अनिल अग्रवाल, डॉ नीरज गुप्ता, डॉ पीके शुक्ला भी काका हाथरसी के पास उनकी कविताएं सुनने आते थे।
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आत्मकथा में किया है बिजनौर का जिक्र
काका हाथरसी ने अपनी आत्मकथा मेरा जीवन एवन में बिजनौर का कई स्थानों पर उल्लेख किया है। उन्होंने बिजनौर के कई लोगों का भी आत्मकथा में उल्लेख किया है। मृत्यु से एक माह पूर्व बिजनौर से हाथरस चले गए थे। उनकी मृत्यु 18 सितंबर 1995 को हुई।
बिजनौर के शिक्षकों को दिया जाता है काका शिक्षक सम्मान
अनुभूति बताती हैं कि उनकी संस्था नियोफ्यूजन क्रिएटिव फाउंडेशन द्वारा काका हाथरसी की स्मृति में जनपद बिजनौर के शिक्षकों को काका हाथरसी शिक्षक सम्मान दिया जाता है। इस वर्ष यह पुरस्कार शिक्षक राम अवतार सिंह को दिया गया है।