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Bijnor News: इंसान लगाएंगे मुखौटा, गुलदार खाएंगे धोखा

Wed, 29 Nov 2023 11:15 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 29 Nov 2023 11:15 PM IST
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Humans will wear masks, henchmen will be deceived
बिजनौर में पिंजरे में कैद गुलदार
- वन विभाग ने तैयार की गुलदार-इंसानों में संघर्ष रोकने की रणनीति
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- ग्रामीणों को दी जाएगी सुंदरवन की तरह सिर के पीछे मुखौटा लगाने की सलाह
- रिजर्व फॉरेस्ट और गांव के आसपास गन्ना सबसे पहले काटने की रणनीति



रजनीश त्यागी
बिजनौर। जिले में अब वन विभाग ने भी मान लिया है कि लोगों को गुलदार से बचने के तरीके सीखने होंगे। गुलदार को लेकर जिले में 73 गांवों को संवेदनशील घोषित किया गया है। वहीं, वन अफसरों ने गुलदार और इंसानों के बीच संघर्ष रोकने के लिए पूरी रणनीति बनाई है। इनमें सतर्कता के साथ-साथ सुंदरवन की तर्ज पर इन क्षेत्रों के लोगों को सिर के पीछे मुखौटा लगाने की सलाह भी दी जा रही है। वहां के इस प्रयोग को बाघ और गुलदार से बचने के लिए कारगर उपाय भी माना जा रहा है।
जिले में पिछले पांच सालों से गुलदार के हमले बढ़ रहे हैं। इस साल में ही 17 लोगों की जान गुलदार के हमलों में जा चुकी है। सबसे ज्यादा हमले अफजलगढ़ और नगीना क्षेत्र में हुए हैं। ऐसे में वन विभाग ने जिले के 73 गांवों को संवेदनशील की श्रेणी में रखा है। इन गांवों को माना है कि यहां पर सबसे ज्यादा गुलदार और इंसानों के बीच संघर्ष होने की संभावना है।
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अब इस संघर्ष को रोकने के लिए ग्रामीणों को जागरूक करने की योजना तैयार की है। इसमें सुंदरवन से लेकर पीलीभत तक में नरभक्षी बाघ और गुलदार के हमलों के बाद अपनाए गए तरीकों को भी शामिल किया गया है। एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि इसकी पूरी योजना तैयार कर ली गई है। इसमें गन्ना विभाग, बिजली विभाग, शिक्षा विभाग को भी शामिल किया गया है। (संवाद)
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वन विभाग ने तैयार की यह योजना
- संवेदनशील 73 गांवों में रात के समय प्रकाश की व्यवस्था रहेगी
- इन गांवों में सार्वजनिक और निजी शौचालय क्रियाशील रहेंगे
- स्कूल और प्रमुख मार्गाें के किनारे की जाएगी घास की सफाई
- ग्राम पंचायत स्तर पर संकल्प सभाओं के माध्यम से जन जागरुकता कराएंगे
- अतिसंवेदनशील गांवों के बाहर फॉक्स लाइट (ब्लिंकिंग लाइट) लगाई जाएंगी
- अति संवेदनशील गांवों का सर्वे कराकर मुखौटा बांटे जाएंगे


अब झुंड में दिखने लगे हैं गुलदार
आमतौर पर अभी तक माना जाता था कि गुलदार झुंड में नहीं रहते। मादा गुलदार अकेले ही अपने बच्चों को पालती है। इस साल ऐसे मामले कई बार सामने आए, जब लोगों ने एक नीलगाय और निराश्रित गोवंश के पीछे एक से ज्यादा गुलदार दौड़ते देखे। गन्ने के खेतों में रह रहे गुलदार झुंड में मिलकर शिकार करने लगे हैं। ट्रैप कैमरों में इसकी तस्वीरे भी कैद हुई, जिसमें दो गुलदार एक साथ दिख रहे हैं।

गन्ने के जंगल का राजा बन बैठा गुलदार

जिले की भोगोलिक स्थिति की बात करें तो 70 किलोमीटर से ज्यादा सीमा उत्तराखंड के रिजर्व फॉरेस्ट से लगी हुई है। वहीं जिले में करीब तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना हो रहा है। ऐसे में गुलदार जंगल से निकले तो उन्हें छिपने, रहने के लिए गन्ने के खेत मिल गए। रिजर्व फॉरेस्ट में गुलदार को सबसे ज्यादा डर बाघ का होता है। आमना-सामना होने पर बाघ गुलदार को मार डालता है। ऐसे में जब गुलदार गन्ने के खेतों में आए तो यहां उनका किसी से संघर्ष नहीं था। वह गन्ने के खेतों का राजा बन गया। जो भी अन्य जीव यहां मौजूद थे, वह उसके लिए आसान शिकार थे।




जहां के ग्रामीण जागरूक, वहां घटे गुलदार के हमले
जिले में गुलदार-मानव संघर्ष रोकने के लिए कई विभागों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। इसकी पूरी योजना तैयार की जा रही है। देखने में आया है कि जहां के ग्रामीण जागरूक हुए हैं और गुलदार से बचने के तरीके सीखे हैं, वहां हमले घट रहे हैं। इसमें जंगल में काम करते समय मुखौटा लगाना भी कारकर उपाय साबित हो सकता है। ग्रामीणों को जल्द मुखौटे बांटे जाएंगे। - ज्ञान सिंह, एसडीओ, वन विभाग
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