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वनों में इंसानों का दखल पड़ रहा भारी
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वनों में इंसानों का दखल पड़ रहा भारी
बिजनौर। वनों में इंसानों का दखल अब भारी पड़ने लगा है। वन्य जीव आबादी से बाहर आकर अब हिंसक रूप अपना रहे हैं। गुलदार ने 20 दिन के अंदर एक महिला और एक बच्चे को मार डाला। महीना भर पहले ही एक हाथी ने एक यात्री को बस से खींचकर पटककर मार दिया था। ऐसी घटनाओं के बढ़ने से वनों के आसपास गांवों में रहने वाले लोगों में दहशत है। उन्होंने वन विभाग से सुरक्षा मांगी है।
वनों से निकलकर अब गुलदार गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। पहले वन विभाग को गुलदार के हमले के महीने में इक्का दुक्का सूचनाएं ही मिलती थीं, लेकिन अब महीने में तीन से चार घटनाएं सामने आ रही हैं। जिले में इस साल में गुलदार के 12 शावक भी खेतों से मिल चुके हैं। 27 नवंबर को गुलदार ने गांव चमरूफेरू निवासी शमला देवी को खेत में ही मार डाला था। सोमवार को गुलदार नजीबाबाद के गांव प्रेमपुरी में एक बच्चे चेतन को उठाकर ले गया और उसे मार दिया। यह जिले का पहला मामला है जब गुलदार ने किसी बच्चे को घर से उठाकर जंगल में ले जाकर मार दिया। गुलदार के हिंसक होकर इंसानों पर हमला करने से वन विभाग के अधिकारी भी हैरत में हैं। कुछ दिनों पहले कालागढ़ टाइगर रिजर्व के जंगल में हाथी ने एक बस पर हमला बोल दिया था। हाथी ने एक शिक्षक को बस से खींचकर पटक पटककर मार डाला था।
हाथी बाघ से भी ज्यादा खतरनाक
हाथी गुस्सा आने पर बाघ और गुलदार से भी ज्यादा हिंसक हो जाता है। गुलदार तो केवल एक ही इंसान को निशाना बनाकर मार सकता है, लेकिन हाथी काफी तबाही मचाता है। इक्कड़ हाथी बहुत गुस्सैल व चिड़चिड़े होते हैं। यह इंसान को देखते ही उन पर हमला बोल देते हैं। 2013 में नरभक्षी बाघिन ने अमानगढ़ रेंज के आसपास आतंक मचाया था। बाघिन ने नौ लोगों को मार दिया था। शासन ने बाघिन को नरभक्षी घोषित कर दिया था। बाद में बाघिन के हमले अपने आप बंद हो गए थे।
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पर्यटन का दबाव बढ़ने पर परेशान हैं जानवर
बिजनौर। वन क्षेत्रों में पर्यटन का दबाव बढ़ रहा है। शोर शराबा रहता है। लकड़ी माफिया पेड़ काटते हैं। ऐसे में वनों के आखिरी छोर पर रहने वाले वन्य जीव बाहर की ओर निकलने को विवश होते हैं। आसपास के गांव वाले जंगलों से लकड़ी और पशुओं के लिए चारा लाते हैं। हालांकि इनसे वन्यजीवन प्रभावित नहीं होते हैं, लेकिन वन्य जीवों का शिकार अधिकतर ऐसे ही लोग बनते हैं। गुलदार अपने बच्चों को ईख के खेतों में जन्म देते हैं। इस समय खेत खाली हो रहे हैं। इससे गुलदार भी हिंसक हो रहे हैं।
लगवा रहे पिंजरे : डॉ. सेम्मारन
डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के मुताबिक जिलेवासी बिना किसी काम के वन क्षेत्र में न जाएं। गुलदार के हमले जहां देखने को मिल रहे हैं, वहां उन्हें पकड़ने के लिए पिंजरे लगवाए जा रहे हैं। गुलदार के इंसानों पर बढ़ते हमले हैरान करने वाले हैं।
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बिजनौर। वनों में इंसानों का दखल अब भारी पड़ने लगा है। वन्य जीव आबादी से बाहर आकर अब हिंसक रूप अपना रहे हैं। गुलदार ने 20 दिन के अंदर एक महिला और एक बच्चे को मार डाला। महीना भर पहले ही एक हाथी ने एक यात्री को बस से खींचकर पटककर मार दिया था। ऐसी घटनाओं के बढ़ने से वनों के आसपास गांवों में रहने वाले लोगों में दहशत है। उन्होंने वन विभाग से सुरक्षा मांगी है।
वनों से निकलकर अब गुलदार गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। पहले वन विभाग को गुलदार के हमले के महीने में इक्का दुक्का सूचनाएं ही मिलती थीं, लेकिन अब महीने में तीन से चार घटनाएं सामने आ रही हैं। जिले में इस साल में गुलदार के 12 शावक भी खेतों से मिल चुके हैं। 27 नवंबर को गुलदार ने गांव चमरूफेरू निवासी शमला देवी को खेत में ही मार डाला था। सोमवार को गुलदार नजीबाबाद के गांव प्रेमपुरी में एक बच्चे चेतन को उठाकर ले गया और उसे मार दिया। यह जिले का पहला मामला है जब गुलदार ने किसी बच्चे को घर से उठाकर जंगल में ले जाकर मार दिया। गुलदार के हिंसक होकर इंसानों पर हमला करने से वन विभाग के अधिकारी भी हैरत में हैं। कुछ दिनों पहले कालागढ़ टाइगर रिजर्व के जंगल में हाथी ने एक बस पर हमला बोल दिया था। हाथी ने एक शिक्षक को बस से खींचकर पटक पटककर मार डाला था।
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हाथी बाघ से भी ज्यादा खतरनाक
हाथी गुस्सा आने पर बाघ और गुलदार से भी ज्यादा हिंसक हो जाता है। गुलदार तो केवल एक ही इंसान को निशाना बनाकर मार सकता है, लेकिन हाथी काफी तबाही मचाता है। इक्कड़ हाथी बहुत गुस्सैल व चिड़चिड़े होते हैं। यह इंसान को देखते ही उन पर हमला बोल देते हैं। 2013 में नरभक्षी बाघिन ने अमानगढ़ रेंज के आसपास आतंक मचाया था। बाघिन ने नौ लोगों को मार दिया था। शासन ने बाघिन को नरभक्षी घोषित कर दिया था। बाद में बाघिन के हमले अपने आप बंद हो गए थे।
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पर्यटन का दबाव बढ़ने पर परेशान हैं जानवर
बिजनौर। वन क्षेत्रों में पर्यटन का दबाव बढ़ रहा है। शोर शराबा रहता है। लकड़ी माफिया पेड़ काटते हैं। ऐसे में वनों के आखिरी छोर पर रहने वाले वन्य जीव बाहर की ओर निकलने को विवश होते हैं। आसपास के गांव वाले जंगलों से लकड़ी और पशुओं के लिए चारा लाते हैं। हालांकि इनसे वन्यजीवन प्रभावित नहीं होते हैं, लेकिन वन्य जीवों का शिकार अधिकतर ऐसे ही लोग बनते हैं। गुलदार अपने बच्चों को ईख के खेतों में जन्म देते हैं। इस समय खेत खाली हो रहे हैं। इससे गुलदार भी हिंसक हो रहे हैं।
लगवा रहे पिंजरे : डॉ. सेम्मारन
डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के मुताबिक जिलेवासी बिना किसी काम के वन क्षेत्र में न जाएं। गुलदार के हमले जहां देखने को मिल रहे हैं, वहां उन्हें पकड़ने के लिए पिंजरे लगवाए जा रहे हैं। गुलदार के इंसानों पर बढ़ते हमले हैरान करने वाले हैं।