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पांच हजार से अधिक परिवार सूरज की रोशनी से हो रहे जगमग
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बिजनौर। जिले में पांच हजार से अधिक घर सौर ऊर्जा से जगमग हो रहे हैं। दो गांवों को तो बिजली की लाइन के बजाए सौर ऊर्जा से ही पूरी तरह जगमग किया गया है। यहां तक कि नलकूप भी सौर ऊर्जा से चलाए जा रहे हैं। लगातार लोग सौर ऊर्जा की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
बिजली की कटौती, अनियमित्ता और महंगाई, इन तीनों चीजों ने लोगों को सौर ऊर्जा की ओर आकर्षित किया है। हर महीने आने वाले बिल से निजात पाने के लिए जनता ने सौर ऊर्जा को अपनाया है। अब घरों पर भी सौर ऊर्जा पैनल आराम से देखे जा सकते हैं।
जिले के डीडीपीएस स्कूल, माउंट लिट्रा जी स्कूल समेत कई स्कूल और कई अस्पताल सौर ऊर्जा से ही संचालित हो रहे हैं। एक बार सौर ऊर्जा के पैनल लगवाने पर 20 से 25 सालों तक बिजली के बिल से निजात मिल जाती है। सौर ऊर्जा पैनल लगवाने वाले बीआईटी संस्थान के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ.राघव मेहरा ने पिछले साल तीन किलोवाट का पैनल डेढ़ लाख में लगवाया था, जिस पर 80 हजार रुपये की सब्सिडी मिल गई।
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डॉ.राघव मेहरा बताते हैं कि उनका पैनल अधिकतम दो किलोवाट बिजली बनाता है। उनके यहां बिजली कनेक्शन भी हैं। वे बताते हैं कि जो बिजली फालतू बनती है वह विद्युत निगम को चली जाती है। जब कभी मौसम खराब होने की वजह से घर की जरूरत पूरी नहीं होती तो वे निगम की बिजली खर्च करते हैं। तब उनके द्वारा दी गई यूनिट से निगम की ली गई यूनिट एडजस्ट हो जाती हैं। उनके अनुसार वे एक साल में आमतौर पर बिजली बिल के 35 से 40 हजार रुपये भरते थे, अब एक साल में केवल साढ़े आठ हजार रुपये का ही बिल जमा करना पड़ा है।
दो गांव पूरी तरह सौर ऊर्जा से रोशन
गंगा पार के दो गांव रामसहायवाला व कोटावाली को पूरी तरह सोलर से ही रोशन किया गया है। इन गांवों में बिजली की लाइन नहीं जा सकती है। सौर ऊर्जा से ही गांव रोशन हुए हैं। गांव वालों की सभी जरूरत सौर ऊर्जा पूरी कर रही है। सौर ऊर्जा पैनल सरकार की ओर से नि:शुल्क लगवाए गए हैं। गांव कोटावाली निवासी अर्जुन, वीरेंद्र, ऋषिपाल सिंह आदि का कहना है कि सौर ऊर्जा का उन्हें बहुत फायदा हुआ है।
सरकारी कार्यालय में भी लग रहे पैनल
नेडा के परियोजना अधिकारी एसके सिंह के अनुसार जनता सौर ऊर्जा के प्रति काफी जागरूक हुई है। सभी सरकारी कार्यालयों पर भी सौर ऊर्जा पैनल लगाए जा रहे हैं।
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बिजली की कटौती, अनियमित्ता और महंगाई, इन तीनों चीजों ने लोगों को सौर ऊर्जा की ओर आकर्षित किया है। हर महीने आने वाले बिल से निजात पाने के लिए जनता ने सौर ऊर्जा को अपनाया है। अब घरों पर भी सौर ऊर्जा पैनल आराम से देखे जा सकते हैं।
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जिले के डीडीपीएस स्कूल, माउंट लिट्रा जी स्कूल समेत कई स्कूल और कई अस्पताल सौर ऊर्जा से ही संचालित हो रहे हैं। एक बार सौर ऊर्जा के पैनल लगवाने पर 20 से 25 सालों तक बिजली के बिल से निजात मिल जाती है। सौर ऊर्जा पैनल लगवाने वाले बीआईटी संस्थान के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ.राघव मेहरा ने पिछले साल तीन किलोवाट का पैनल डेढ़ लाख में लगवाया था, जिस पर 80 हजार रुपये की सब्सिडी मिल गई।
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डॉ.राघव मेहरा बताते हैं कि उनका पैनल अधिकतम दो किलोवाट बिजली बनाता है। उनके यहां बिजली कनेक्शन भी हैं। वे बताते हैं कि जो बिजली फालतू बनती है वह विद्युत निगम को चली जाती है। जब कभी मौसम खराब होने की वजह से घर की जरूरत पूरी नहीं होती तो वे निगम की बिजली खर्च करते हैं। तब उनके द्वारा दी गई यूनिट से निगम की ली गई यूनिट एडजस्ट हो जाती हैं। उनके अनुसार वे एक साल में आमतौर पर बिजली बिल के 35 से 40 हजार रुपये भरते थे, अब एक साल में केवल साढ़े आठ हजार रुपये का ही बिल जमा करना पड़ा है।
दो गांव पूरी तरह सौर ऊर्जा से रोशन
गंगा पार के दो गांव रामसहायवाला व कोटावाली को पूरी तरह सोलर से ही रोशन किया गया है। इन गांवों में बिजली की लाइन नहीं जा सकती है। सौर ऊर्जा से ही गांव रोशन हुए हैं। गांव वालों की सभी जरूरत सौर ऊर्जा पूरी कर रही है। सौर ऊर्जा पैनल सरकार की ओर से नि:शुल्क लगवाए गए हैं। गांव कोटावाली निवासी अर्जुन, वीरेंद्र, ऋषिपाल सिंह आदि का कहना है कि सौर ऊर्जा का उन्हें बहुत फायदा हुआ है।
सरकारी कार्यालय में भी लग रहे पैनल
नेडा के परियोजना अधिकारी एसके सिंह के अनुसार जनता सौर ऊर्जा के प्रति काफी जागरूक हुई है। सभी सरकारी कार्यालयों पर भी सौर ऊर्जा पैनल लगाए जा रहे हैं।