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कताई मिल चलने की उम्मीद जगी
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Fri, 20 Jul 2018 12:04 AM IST
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नगीना में बंद पड़ी कताई मिल।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में प्रदेश में बंद पड़ी सरकारी क्षेत्र की कताई मिलों को फिर से चलाने की कवायद शुरू की गई है। मिल चलाने के लिए इनकी ग्राउंड रिपोर्ट मांगी गई है। बिजनौर के नगीना में स्थित कताई मिल के चलने की भी इससे उम्मीद जगी है। कताई मिल के चलने से क्षेत्र के एक हजार से ज्यादा बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।
नगीना क्षेत्र में कताई मिल स्थित है। 2001 में मिल पर ताले लग गए थे। मिल को ताले लगने से हजारों श्रमिक बेरोजगार हो गए थे। तभी से कताई मिल का संचालन फिर से करने की मांग चलती आ रही है। कताई मिल हर चुनाव में मुद्दा बनती है। मिल चलाने के लिए सभी नेता वादे करते थे, पर इसे पूरा नहीं किया गया, लेकिन अब कताई मिल चलने की आस जगी है। शासन ने बंद पड़ी कताई मिल के बारे में जानकारी मांगी है।
मिल की मशीनों, उसकी जमीन आदि के बारे में पूछा गया है। अगर मिल में मशीन मरम्मत के बाद चलने की हालत में मिली तो फिर से चलाया जा सकता है। मिल के संचालन में कच्चे माल के रूप में कपास का इस्तेमाल किया जाता है। कपास दूसरे राज्यों से मंगाई जाती है। अगर प्रदेश की सभी मिलों का संचालन हो गया तो दूसरे प्रदेश के किसानों को भी कपास का अच्छा दाम मिलेगा। उपायुक्त उद्योग अमिता वर्मा के अनुसार शासन ने कताई मिल के संबंध में जानकारी मांगी है। यह जानकारी जल्दी ही शासन को भेज दी जाएगी।
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घाटा होने पर 2001 में बंद कर दी थी मिल
मिल में सूत बनाने का काम होता था। यहां तैयार हुआ सूत पूरे देश तथा विदेशों में भी सप्लाई होता था। नगीना की कताई मिल में बने सूत से कपड़े बनते थे। कताई मिल से नगीना क्षेत्र में काफी रोजगार मिला था। इसमें करीब डेढ़ हजार तक का स्टाफ व श्रमिक काम करते थे। मिल के चक्के घूमने से क्षेत्र के परिवारों के घरों में चूल्हे जलते थे। मिल को घाटा होने पर 2001 में इसे बंद कर दिया गया था। मिल में करीब एक हजार कर्मचारी दूसरे जिलों से थे। कताई मिल में काम करने वाले कर्मचारियों की कॉलोनी भी थी। मिल बंद होने के बाद भी यहां वे कई साल तक इसके फिर से शुरू होने की आस में रहते रहे, लेकिन मिल बंद होने पर वे भी चले गए। मिल में मशीनें अब पुरानी हो चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार इनको फिर से चलाने में काफी बजट खर्च होगा। इसके बजाए मिल को अत्याधुनिक मशीनें लगाकर नए सिरे से चलाना बेहतर रहेगा।
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नगीना क्षेत्र में कताई मिल स्थित है। 2001 में मिल पर ताले लग गए थे। मिल को ताले लगने से हजारों श्रमिक बेरोजगार हो गए थे। तभी से कताई मिल का संचालन फिर से करने की मांग चलती आ रही है। कताई मिल हर चुनाव में मुद्दा बनती है। मिल चलाने के लिए सभी नेता वादे करते थे, पर इसे पूरा नहीं किया गया, लेकिन अब कताई मिल चलने की आस जगी है। शासन ने बंद पड़ी कताई मिल के बारे में जानकारी मांगी है।
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मिल की मशीनों, उसकी जमीन आदि के बारे में पूछा गया है। अगर मिल में मशीन मरम्मत के बाद चलने की हालत में मिली तो फिर से चलाया जा सकता है। मिल के संचालन में कच्चे माल के रूप में कपास का इस्तेमाल किया जाता है। कपास दूसरे राज्यों से मंगाई जाती है। अगर प्रदेश की सभी मिलों का संचालन हो गया तो दूसरे प्रदेश के किसानों को भी कपास का अच्छा दाम मिलेगा। उपायुक्त उद्योग अमिता वर्मा के अनुसार शासन ने कताई मिल के संबंध में जानकारी मांगी है। यह जानकारी जल्दी ही शासन को भेज दी जाएगी।
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घाटा होने पर 2001 में बंद कर दी थी मिल
मिल में सूत बनाने का काम होता था। यहां तैयार हुआ सूत पूरे देश तथा विदेशों में भी सप्लाई होता था। नगीना की कताई मिल में बने सूत से कपड़े बनते थे। कताई मिल से नगीना क्षेत्र में काफी रोजगार मिला था। इसमें करीब डेढ़ हजार तक का स्टाफ व श्रमिक काम करते थे। मिल के चक्के घूमने से क्षेत्र के परिवारों के घरों में चूल्हे जलते थे। मिल को घाटा होने पर 2001 में इसे बंद कर दिया गया था। मिल में करीब एक हजार कर्मचारी दूसरे जिलों से थे। कताई मिल में काम करने वाले कर्मचारियों की कॉलोनी भी थी। मिल बंद होने के बाद भी यहां वे कई साल तक इसके फिर से शुरू होने की आस में रहते रहे, लेकिन मिल बंद होने पर वे भी चले गए। मिल में मशीनें अब पुरानी हो चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार इनको फिर से चलाने में काफी बजट खर्च होगा। इसके बजाए मिल को अत्याधुनिक मशीनें लगाकर नए सिरे से चलाना बेहतर रहेगा।