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सवा सौ साल पुराना है बिजनौर की रामलीला का इतिहास

Thu, 30 Sep 2021 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Sep 2021 11:54 PM IST
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History of Ramlila of Bijnor is one hundred and fifty years old
History of Ramlila of Bijnor is one hundred and fifty years old
सवा सौ साल पुराना है बिजनौर की रामलीला का इतिहास
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बिजनौर। शहर की रामलीला का इतिहास लगभग 124 साल पुराना है। इस बार रामलीला का 125वीं बार मंचन रामलीला मैदान में किया जाएगा। पूर्व में शहर के कलाकारों की ओर से ही मंचित की जाने वाली रामलीला का वर्तमान में दिल्ली की एक संस्था द्वारा मंचन किया जाता है।
बिजनौर स्थित रामलीला मैदान में होने वाली रामलीला की परंपरा बेहद समृद्ध रही है। रामलीला कमेटी के मुख्य संरक्षक संजय गुप्ता बताते हैं कि शहर में 1897 में पहली बार रामलीला का मंचन किया गया था। रामलीला मंचन में बिजनौर के सोती परिवार का प्रमुख योगदान रहा। 1915 में सोती हरनाम कुमार ने अपनी जमीन रामलीला को दान दे दी थी, तब से यह मैदान रामलीला मैदान के नाम से जाना जाता है। रामलीला कमेटी के संरक्षक एसके बबली बताते हैं कि 1897 में शुरू हुई रामलीला की परंपरा आज तक जारी है। किसी वर्ष भी रामलीला का मंचन बाधित नहीं हुआ। गत वर्ष कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए रामलीला मंचन किया गया था।
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रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अचल अग्रवाल बताते हैं कि पूर्व में शहर के कलाकारों की ओर से ही रामलीला का मंचन किया जाता था। धीरे-धीरे लोगों की व्यस्तता बढ़ती गई और रामलीला की तैयारी के लिए कलाकारों के पास समय कम हो गया। आठ वर्ष पूर्व रामलीला मंचन के लिए कंठस्थ कला केंद्र दिल्ली के कलाकारों को बुलाया जाने लगा। रामलीला कमेटी के महामंत्री राहुल शर्मा ने बताया कि इस वर्ष भी कोरोना गाइडलाइन के अनुसार ही रामलीला का मंचन किया जाएगा। पूर्व में रामलीला मंचन के दौरान कई जुलूस निकलते थे, जिनमें भरत मिलाप और राम बारात के बड़े जुलूस निकलते थे। गत वर्ष कोरोना बीमारी के कारण यह जुलूस नहीं निकल पाए और इस वर्ष भी जुलूस नहीं निकाले जाएंगे।
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रामलीला कमेटी के संयोजक वरुण अग्रवाल भोलू एडवोकेट बताते हैं कि रामलीला मैदान में दो मंदिरों का सुंदरीकरण भी कराया जा रहा है। लोग रामलीला मंचन के साथ-साथ मंदिर में आशीर्वाद भी लेते हैं। रामलीला कमेटी के कोषाध्यक्ष राहुल गुप्ता बताते हैं कि रामलीला देखने के लिए आज भी लोग उत्सुक रहते हैं। गत वर्ष कोविड-19 के कारण लोग घर से कम निकले, लेकिन रामलीला को आज भी बहुत लोग पसंद करते हैं। रामलीला कमेटी के भवन मंत्री प्रदीप कौशिक बताते हैं कि राम के चरित्र को समाज तक पहुंचाने में रामलीला का महत्वपूर्ण योगदान है। रामलीला आज भी भारत की समृद्ध परंपरा का हिस्सा है। सभी लोगों को इससे जुड़ना चाहिए तथा राम के आदर्शों को अपनाना चाहिए।
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