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हिंदी हैं हम : हिंदी विषय नहीं, भावना को प्रकट करने का माध्यम

Fri, 10 Sep 2021 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Sep 2021 12:03 AM IST
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Hindi Hain Hum : Workshop at Bijnor Public School
बिजनौर पब्लिक स्कूल में अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम हिंदी हैं हम कार्यक्रम में उपस्थित छात् - फोटो : BIJNOR
हिंदी हैं हम : हिंदी विषय नहीं, भावना को प्रकट करने का माध्यम
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बिजनौर। अमर उजाला फाउंडेशन के कार्यक्रम हिंदी हैं हम के अंतर्गत बिजनौर स्थित बिजनौर पब्लिक स्कूल में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी को अपनाने तथा हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने की बात कही गई। कार्यक्रम में कवियों ने अपनी कविताएं सुनाई तथा छात्राओं ने भी स्वरचित कविताओं का पाठ किया।
अमर उजाला द्वारा बिजनौर पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ प्रधानाचार्य विकास त्यागी ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हिंदी का प्रयोग अधिक से अधिक होना चाहिए। हिंदी हमारी मातृभाषा है, लेकिन कई बार हम हिंदी की अवहेलना करते हैं। हमें हिंदी को अपनाना होगा तभी हिंदी आगे बढ़ पाएगी। जनपद के प्रसिद्ध कवि संजीव शर्मा एकल ने कार्यक्रम में अपनी कविताओं से समा बांध दिया। उन्होंने पढ़ा ‘एक साल में एक दिन देते हैं सम्मान और हिंदी से चाहते खूब बढ़ाये मान, हिंदी उर्दू समान रखते हैं, एक जैसा बयान रखते हैं। उन्होंने बच्चों से हिंदी से जुड़ने का आह्वान किया। विवेक पुस्तकालय के अध्यक्ष शिव कुमार कश्यप ने कहा कि हिंदी से छात्र-छात्राओं को जोड़ने की आवश्यकता है। इसके लिए कहानियां और कविताएं सशक्त माध्यम है।
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उन्होंने कहा कि पुराने समय में दादी और नानी द्वारा सुनाई गई कहानियां बच्चों का ज्ञानवर्द्धन करने के साथ-साथ उचित मार्गदर्शन भी करती थी। हमें फिर से कविताओं और कहानियों पर लौटने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में विद्यालय की छात्रा सुमैया नवाज ने स्वरचित कविता सुनाई। ‘पढ़ना है मुझे पढ़ना है मुझे, ज्यादा चाहते नहीं है मेरी बस समाज की सारी पुरानी सोचो को बदलना है मुझे’। सुमैया नवाज की कविता को बेहद पसंद किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिंदी शिक्षिका चेतना भटनागर ने कहा कि हिंदी समूचे विश्व में बोली जाने वाली तीसरी सबसे बड़ी भाषा है।
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हिंदी भाषा के साथ-साथ संस्कार प्रदान करती है। आज कुछ लोग हिंदी बोलने में शर्म महसूस करते हैं जबकि पूरे विश्व में आज हिंदी की पताका लहरा रही है। शिक्षिका विद्योत्तमा सिंह ने हिंदी के इतिहास पर प्रकाश डाला तथा हिंदी को संपूर्ण वैज्ञानिक भाषा बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी आज बाजार की आवश्यकता बन गई है। भारत के प्रत्येक राज्य में हिंदी का प्रसार बढ़ रहा है साथ ही पूरे विश्व में हिंदी बोली और पढ़ी जा रही है। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन और प्रधानाचार्य विकास त्यागी द्वारा कवि संजीव शर्मा एकल तथा शिव कुमार कश्यप को सम्मानित किया गया।
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