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Bijnor News: मेडिकल अस्पताल में नहीं हीमोफीलिया का इलाज, रेफर होते हैं मरीज

Mon, 17 Apr 2023 12:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Mon, 17 Apr 2023 12:35 AM IST
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Hemophilia is not treated in medical hospital, patients are referred
बिजनौर के महात्मा विदुर मे​डिकल काॅलेज की प्राचार्या डॉ ​उर्मिला कार्या।
विश्व हीमोफीलिया दिवस पर विशेष...
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- अस्पताल में हीमोफीलिया ग्रसित मरीज को केवल मिलता है रक्त
- 35 हीमोफीलिया ग्रसित मरीज हैं बिजनौर में
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। हीमोफीलिया को गंभीर बीमारियों में माना जाता है। मगर बिजनौर मेडिकल अस्पताल में हीफोफीलिया ग्रसित मरीजों के लिए उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। मरीजों को मेरठ या अन्य जगह रेफर किया जाता है। इलाज की सुविधा नहीं होने से जिले के ग्रसित मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले में इस समय 35 लोग हीमोफीलिया से ग्रसित हैं।

विश्व हीमोफीलिया दिवस 17 अप्रैल को मनाया जा रहा है। यह एक अनुवांशिक बीमारी है। जो लोगों को अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है। मेडिकल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आरएस वर्मा ने बताया कि रक्त में थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की कमी होने से हीमोफीलिया की बीमारी होती है। वहीं फेक्टर 8 और विटामिन के की कमी से भी हीमोफीलिया होता है।
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हीमोफीलिया से ग्रसित लोगों में रक्त का थक्का नहीं जमता है। जिसकी वजह से हल्की सी खरोंच आने पर भी उनका खून बहने लगता है। जिसे रोकने के लिए फेक्टर 8 इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। मगर बिजनौर मेडिकल कॉलेज इंजेक्शन नहीं है। जरूरत पड़ने पर उन्हें रक्त उपलब्ध हो जाता है।
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हीमोफीलिया के लक्षण-
-नाक से लगातार खून बहना
-मसूड़ों से खून बहना
-त्वचा का आसानी से छिल जाना
-ज्यादा रक्तस्राव के कारण जोड़ो में दर्द होना
-सिर दर्द, गर्दन में अकड़न होती है
हीमोफीलिया से बचाव-
-समस्या होने पर तुरंत फेक्टर 8 का इंजेक्शन लगवाएं
-समय-समय पर जांच कराएं
-शरीर में जिस पदार्थ कह कमी हो, उसे दूर करें
वर्जन::
अस्पताल में अभी हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों के लिए इलाज की व्यवस्था नहीं है। इसका इलाज मंहगा है। इसलिए सभी जगह उपचार की व्यवस्था नहीं होती है। मेडिकल कॉलेज के पूरी तरह संचालित होने के बाद सुविधाएं बढ़ जाएंगी। हीमोफीलिया का भी इलाज संभव हो सकेगा।.....डॉ. उर्मिला कार्या, प्राचार्या, महात्मा विदुर मेडिकल कॉलेज, बिजनौर

हीमोफीलिया ग्रसित मरीजाें की मदद कर रही आई ड्रीम टू ट्रस्ट संस्था
मेरठ में आई ड्रीम टू ट्रस्ट पंजीकृत है। जो बिजनौर में भी काम कर रही है। संस्था के संस्थापक राजन चौधरी का कहना है कि वह उत्तरी भारत में हीमोफीलिया को लेकर काम कर रहे हैं। बिजनौर में हीमोफीलिया के 35 मरीज पंजीकृत हैं। फेक्टर 8 इंजेक्शन 10 हजार रुपये तक का आता है। हर कोई मरीज इस इंजेक्शन को नहीं खरीद पाता है। इसलिए हीमोफीलिया से ग्रसित मरीजों की वह सहायता कर रहे है। वह खुद भी इस बीमारी से ग्रसित हैं। बिजनौर के दो हीमोफीलिया से ग्रसित बोर्ड परीक्षार्थियों को इंजेक्शन दिया है। जिससे उन्हें परीक्षा देने में कोई परेशानी न हो।
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