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वह हंसकर बोल रहे हैं, बगल में खंजर है...
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वह हंसकर बोल रहे हैं, बगल में खंजर है...
बिजनौर, नगीना। गंगा जमुनी काव्य मंच नगीना के तत्वावधान में आयोजित शेर-ए-नशिस्त व काव्य गोष्ठी में कवियों व शायरों ने अपने कलाम व कविताओं से लोगों को मग्न मुग्ध कर दिया।
रविवार की रात्रि प्रेम पुस्तकालय में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ इंद्रजीत जोशी की सरस्वती वंदना व अकरम की नाते पाक से दुआ। मोहम्मद अकरम ने कहा लोग एक दूसरे से मोहब्बत करें, हर बशर के लिए है पयाम आपका। उर्दू शायर डॉ. आलमगीर काजमी ने कहा कि अजीब यास अजब बेकसी का मंजर है, वह हंस के बोल रहे हैं बगल में खंजर है। हास्य कवि हुड़दंग नगीनवी ने कहा कि प्रेम, आस्था, त्याग सब हुए स्वार्थ में खर्च- लड़ने को बस रह गए मंदिर, मस्जिद, चर्च। कवि कृष्ण कुमार ने कहा कि गीता, रामायण, महाभारत हमें धर्म की राह दिखाते हैं- ओम नाम सबसे ही बड़ा वेद पुराण बताते हैं।
डॉ. अंजू बिश्नोई ने कहा कि कतरा/ कतरा रोशनी का बन जाएंगे, हो अंधेरा कितना भी घना भोर बनकर आएंगे।
शायर शाहिद अंजुम ने कहा कि उफ जाने कैसी चमकी है बर्फ आसमान पर धूप, और हो गया है अंधेरा शहर शहर। इंडियन नगीनवी ने कहा कि कुर्बानियों को तेरी भुलाया न जाएगा, आंचल का तेरा कर्ज उतारा न जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता आलमगीर काजमी ने व संचालन नंदलाल ने किया। इस मौके पर निशात अहमद एडवोकेट, मो. अकरम रईस अहमद, मो. शाहिद, विनीत गर्ग, फुरकान अहमद अंसारी आदि मौजूद रहे।
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बिजनौर, नगीना। गंगा जमुनी काव्य मंच नगीना के तत्वावधान में आयोजित शेर-ए-नशिस्त व काव्य गोष्ठी में कवियों व शायरों ने अपने कलाम व कविताओं से लोगों को मग्न मुग्ध कर दिया।
रविवार की रात्रि प्रेम पुस्तकालय में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ इंद्रजीत जोशी की सरस्वती वंदना व अकरम की नाते पाक से दुआ। मोहम्मद अकरम ने कहा लोग एक दूसरे से मोहब्बत करें, हर बशर के लिए है पयाम आपका। उर्दू शायर डॉ. आलमगीर काजमी ने कहा कि अजीब यास अजब बेकसी का मंजर है, वह हंस के बोल रहे हैं बगल में खंजर है। हास्य कवि हुड़दंग नगीनवी ने कहा कि प्रेम, आस्था, त्याग सब हुए स्वार्थ में खर्च- लड़ने को बस रह गए मंदिर, मस्जिद, चर्च। कवि कृष्ण कुमार ने कहा कि गीता, रामायण, महाभारत हमें धर्म की राह दिखाते हैं- ओम नाम सबसे ही बड़ा वेद पुराण बताते हैं।
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डॉ. अंजू बिश्नोई ने कहा कि कतरा/ कतरा रोशनी का बन जाएंगे, हो अंधेरा कितना भी घना भोर बनकर आएंगे।
शायर शाहिद अंजुम ने कहा कि उफ जाने कैसी चमकी है बर्फ आसमान पर धूप, और हो गया है अंधेरा शहर शहर। इंडियन नगीनवी ने कहा कि कुर्बानियों को तेरी भुलाया न जाएगा, आंचल का तेरा कर्ज उतारा न जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता आलमगीर काजमी ने व संचालन नंदलाल ने किया। इस मौके पर निशात अहमद एडवोकेट, मो. अकरम रईस अहमद, मो. शाहिद, विनीत गर्ग, फुरकान अहमद अंसारी आदि मौजूद रहे।
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