{"_id":"5846fde64f1c1b104f4488a3","slug":"hausla-poshan-yojna-ne-dam-toda","type":"story","status":"publish","title_hn":"हौसला पोषण योजना ने दम तोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हौसला पोषण योजना ने दम तोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Dec 2016 12:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धामपुर। प्रदेश सरकार की सरीखी योजनाओं में शामिल हौसला पोषण योजना ने जमीन पर उतरने से पहले ही दम तोड़ दिया है। अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाएं हौसला पोषण योजना के लाभ से वंचित है।
सूबे की सपा सरकार ने शिक्षा का नया सत्र चालू होने पर सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए हौसला पोषण योजना की शुरूआत की थी।
कुछ माह योजना ठीकठाक चली। गर्भवती महिलाओं ने भी स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही से बचने के लिए घर की दहलीज को लांघ आंगनबाड़ी केंद्रों पर खाना खाने के लिए आना शुरू कर दिया था। महिला रेशमा, कविता, ललिता, खुर्शीदा, जैबुल आदि ने कहा कि योजना चालू होने के शुरूआती दो माह तक तो महिलाओं को रोटी से लेकर सब्जी में घी भी परोसा गया। दो-चार माह बाद भी बीते योजना के धरातल पर आने से पहले ही पैर उखड़ गए। शासन से धन न आने की वजह से पिछले दिनों करीब एक माह तक गर्भवती महिलाओं को केंद्रों पर खाना नहीं मिला।
विज्ञापन
उत्साहित होकर महिलाएं केंद्रों तक तो पहुंची, लेकिन भोजन नहीं मिला। वह भी जनपद के हर आंगनबाड़ी केंद्र तक नहीं पहुंच पाया। शासन से पूरा धन न आने की वजह से परियोजना अधिकारी ने आंगनबाड़ियों को भी पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया कि खातों में धन आए तभी खाना खिलाना है। अपनी जेब से धन खर्च करने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
सूबे की सपा सरकार ने शिक्षा का नया सत्र चालू होने पर सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए हौसला पोषण योजना की शुरूआत की थी।
विज्ञापन
कुछ माह योजना ठीकठाक चली। गर्भवती महिलाओं ने भी स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही से बचने के लिए घर की दहलीज को लांघ आंगनबाड़ी केंद्रों पर खाना खाने के लिए आना शुरू कर दिया था। महिला रेशमा, कविता, ललिता, खुर्शीदा, जैबुल आदि ने कहा कि योजना चालू होने के शुरूआती दो माह तक तो महिलाओं को रोटी से लेकर सब्जी में घी भी परोसा गया। दो-चार माह बाद भी बीते योजना के धरातल पर आने से पहले ही पैर उखड़ गए। शासन से धन न आने की वजह से पिछले दिनों करीब एक माह तक गर्भवती महिलाओं को केंद्रों पर खाना नहीं मिला।
विज्ञापन
उत्साहित होकर महिलाएं केंद्रों तक तो पहुंची, लेकिन भोजन नहीं मिला। वह भी जनपद के हर आंगनबाड़ी केंद्र तक नहीं पहुंच पाया। शासन से पूरा धन न आने की वजह से परियोजना अधिकारी ने आंगनबाड़ियों को भी पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया कि खातों में धन आए तभी खाना खिलाना है। अपनी जेब से धन खर्च करने की जरूरत नहीं है।