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आकाशवाणी ट्रांसमीटर बना गुलदारों का आशियाना
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आकाशवाणी का ट्रांसमीटर बना गुलदारों का आशियाना
नजीबाबाद। नगर के आबादी क्षेत्र से काफी नजदीक आकाशवाणी ट्रांसमीटर परिसर में गुलदारों ने अपना आशियाना बना लिया है। एक वर्ष में ये गुलदार कई लोगों पर हमला कर चुके हैं। ट्रांसमीटर पर लगे सीसीटीवी कैमरों में प्रतिदिन दो से तीन गुलदार विचरण करते दिखाई देते हैं। इसके बावजूद हिंसक वन्य जीवों से जन सुरक्षा के प्रति सामाजिक वानिकी ने कोई कदम नहीं उठाए।
कोटद्वार मार्ग स्थित गांव समीपुर क्षेत्र में आकाशवाणी नजीबाबाद के ट्रांसमीटर क्षेत्र में गुलदारों का कुनबा विकसित हो रहा है। एक वर्ष पूर्व दो गुलदारों ने अपना आशियाना बनाया था। ट्रांसमीटर के करीब 25 बीघा क्षेत्र में घास-फूंस और पेड़ों के बीच तीन से चार गुलदार अपना आशियाना बना चुके हैं। आकाशवाणी नजीबाबाद के अधिकारी और कर्मचारी जोखिम उठाकर ट्रांसमीटर में आने वाली तकनीकी खराबियों को रेडियो का संचालन सुचारु रखने के लिए जान जोखिम में डालकर काम करने को विवश हैं। आकाशवाणी नजीबाबाद के ट्रांसमीटर पर सीसीटीवी कैमरों में रोजाना दो से तीन गुलदार विचरण करते नजर आते हैं। आकाशवाणी नजीबाबाद ट्रांसमीटर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र समीपुर के बीच कोटद्वार मार्ग से समीपुर को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग हैं इसके आसपास खेत हैं।
एक वर्ष पूर्व खेत में काम कर रहे अवकाश पर आए समीपुर के एक सैनिक और किसान पर गुलदार ने ट्रांसमीटर की दीवार फांदकर हमला किया था। सूचना के बावजूद सामाजिक वानिकी ने यहां पिंजरा नहीं लगाया। आकाशवाणी के एडीपी अभियांत्रिकी दिनेश चंद्रा, एई तिलकराम सामाजिक वानिकी और वन विभाग को आठ माह पूर्व से ही लगातार हिंसक वन्य जीव गुलदार के कुनबे से ट्रांसमीटर और क्षेत्रवासियों को मुक्ति दिलाने की लिखित मांग कर चुके हैं। डीएफओ बिजनौर को गुलदार के स्वतंत्र विचरण की सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
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विशेषज्ञ बोले जानलेवा बन सकता है गुलदार कुनबा
नजीबाबाद। वन्यजीव विशेषज्ञ नवाब सैद बिन आसिफ का कहना है कि गुलदार का आबादी क्षेत्र में विचरण खतरनाक हो सकता है। कभी भी हिंसक होकर गुलदार जनहानि पहुंचा सकता है। उत्तर प्रदेश वन्य जीव सुरक्षा में लगे राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि बाघ और गुलदार की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। बिजनौर में हिंसक जीवों से सुरक्षा वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। उन्होंने गुलदारों को तत्काल ट्रैंकुलाइज कर घने जंगलों में छोड़े जाने की सलाह दी।
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नजीबाबाद। नगर के आबादी क्षेत्र से काफी नजदीक आकाशवाणी ट्रांसमीटर परिसर में गुलदारों ने अपना आशियाना बना लिया है। एक वर्ष में ये गुलदार कई लोगों पर हमला कर चुके हैं। ट्रांसमीटर पर लगे सीसीटीवी कैमरों में प्रतिदिन दो से तीन गुलदार विचरण करते दिखाई देते हैं। इसके बावजूद हिंसक वन्य जीवों से जन सुरक्षा के प्रति सामाजिक वानिकी ने कोई कदम नहीं उठाए।
कोटद्वार मार्ग स्थित गांव समीपुर क्षेत्र में आकाशवाणी नजीबाबाद के ट्रांसमीटर क्षेत्र में गुलदारों का कुनबा विकसित हो रहा है। एक वर्ष पूर्व दो गुलदारों ने अपना आशियाना बनाया था। ट्रांसमीटर के करीब 25 बीघा क्षेत्र में घास-फूंस और पेड़ों के बीच तीन से चार गुलदार अपना आशियाना बना चुके हैं। आकाशवाणी नजीबाबाद के अधिकारी और कर्मचारी जोखिम उठाकर ट्रांसमीटर में आने वाली तकनीकी खराबियों को रेडियो का संचालन सुचारु रखने के लिए जान जोखिम में डालकर काम करने को विवश हैं। आकाशवाणी नजीबाबाद के ट्रांसमीटर पर सीसीटीवी कैमरों में रोजाना दो से तीन गुलदार विचरण करते नजर आते हैं। आकाशवाणी नजीबाबाद ट्रांसमीटर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र समीपुर के बीच कोटद्वार मार्ग से समीपुर को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग हैं इसके आसपास खेत हैं।
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एक वर्ष पूर्व खेत में काम कर रहे अवकाश पर आए समीपुर के एक सैनिक और किसान पर गुलदार ने ट्रांसमीटर की दीवार फांदकर हमला किया था। सूचना के बावजूद सामाजिक वानिकी ने यहां पिंजरा नहीं लगाया। आकाशवाणी के एडीपी अभियांत्रिकी दिनेश चंद्रा, एई तिलकराम सामाजिक वानिकी और वन विभाग को आठ माह पूर्व से ही लगातार हिंसक वन्य जीव गुलदार के कुनबे से ट्रांसमीटर और क्षेत्रवासियों को मुक्ति दिलाने की लिखित मांग कर चुके हैं। डीएफओ बिजनौर को गुलदार के स्वतंत्र विचरण की सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
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विशेषज्ञ बोले जानलेवा बन सकता है गुलदार कुनबा
नजीबाबाद। वन्यजीव विशेषज्ञ नवाब सैद बिन आसिफ का कहना है कि गुलदार का आबादी क्षेत्र में विचरण खतरनाक हो सकता है। कभी भी हिंसक होकर गुलदार जनहानि पहुंचा सकता है। उत्तर प्रदेश वन्य जीव सुरक्षा में लगे राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि बाघ और गुलदार की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। बिजनौर में हिंसक जीवों से सुरक्षा वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। उन्होंने गुलदारों को तत्काल ट्रैंकुलाइज कर घने जंगलों में छोड़े जाने की सलाह दी।