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फरवरी में बढ़ने लगेगा गुलदारों का कुनबा

Tue, 07 Jan 2020 11:09 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jan 2020 11:09 PM IST
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Guldar's clan will grow in February
फरवरी में बढ़ने लगेगा गुलदारों का कुनबा
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बिजनौर। जिले में सिर्फ 15 दिन में ही गुलदार दिखने की 100 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। फरवरी से खेतों में गुलदारों का कुनबा और बढ़ना शुरू हो जाएगा। खेतों में मादा गुलदार शावकों को जन्म देंगी। गुलदार के शावक सबसे अधिक फरवरी में ही पैदा होते हैं। इस दौरान मादा गुलदार बच्चों की सुरक्षा के लिए और अधिक हिंसक हो जाती है।
सेवानिवृत्त डीएफओ नरेंद्र सिरोही के अनुसार गन्ने के खेतों को गुलदार ने अपना आशियाना बना लिया है। गुलदार अमानगढ़ के जंगलों को छोड़कर खेतों में आबादी के पास पहुंच रहे हैं। खेतों में गुलदार सबसे बड़ा शिकारी जीव है। जिले में गांवों के आसपास गुलदारों के दिखने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। पिछले करीब 15 दिन में ही गुलदार दिखने की 100 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। अब गुलदारों की संख्या फरवरी में फिर से बढ़ जाएगी। मादा गुलदार वैसे तो अधिकतर फरवरी में ही प्रसव करती हैं। गुलदार एक बार में चार से पांच बच्चे तक देती है। जंगल में रहने वाली गुलदार गन्ने के खेतों में ही शावकों को जन्म देती है। शावकों को गन्ने के खेतों में सुरक्षा, गर्मी दोनों मिलती हैं। फरवरी में खेतों में गुलदारों की संख्या बढ़ जाएगी। ऐसे में जहां खेतों में गुलदार दिखता है वहां किसानों को बहुत सतर्क होने की जरूरत है। सेवानिवृत्त डीएफओ नरेंद्र सिरोही ने बताया कि खासतौर से तराई में खेती करने वाले किसानों को बहुत सावधान रहकर काम करना चाहिए।
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ट्रैप कैमरों से होगी गणना
बाघों की तरह गुलदारों की गिनती के लिए अब वन विभाग ट्रैप कैमरों का सहारा लेगा। जिन खेतों के पास गुलदार दिखने की सूचना मिलेगी वहां पर ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। देखा जाएगा कि वहां गुलदार है भी या नहीं। इसी आधार पर गणना की जाएगी।
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वन्य जीव हुए कम
बाघों के साथ संघर्ष से बचने के लिए गुलदारों ने जंगलों में गन्ने के खेतों में शरण ली थी। खेतों में अब नीलगाय, गीदड़ व अन्य वन्य जीव पहले से बहुत कम हो गए हैं। वन विभाग के अफसरों का मानना है कि गुलदार को जंगल में अब शिकार भी कम मिल रहे हैं। इस वजह से वह इंसानों पर हमले कर रहे हैं।
गन्ना रकबा कम होने पर वनों में जा सकता है गुलदार
गुलदार को वनों में खदेड़ने का एकमात्र तरीका है गन्ने के रकबे को कम करना। लेकिन ऐसा बहुत मुश्किल है। बिजनौर जिला गन्ने की बेल्ट है। यहां पर करीब सवा दो लाख हेक्टेयर जमीन में गन्ना खड़ा है। जिले में ऐसा कोई गांव नहीं जहां के जंगल में सैकड़ों बीघा जमीन में गन्ना न खड़ा हो।
गुलदार पकड़ने की नहीं नीति
सूबे में गुलदार को पकड़ने के लिए कोई नीति भी नहीं है। गुजरात में अगर कोई गुलदार पकड़ा जाता है तो वन विभाग उसके कान में चिप लगा देता है और वन में छोड़ देता है। दोबारा पकड़े जाने पर फिर से वन में छोड़ा जाता है। अगर गुलदार फिर से गांवों के पास पकड़ा जाता है तो फिर विभाग मानता है कि गुलदार इंसानी जान के लिए खतरा बन सकता है। गुलदार को फिर सफारी में छोड़ा जाता है।

सतर्क रहें किसान
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक जहां गुलदार दिखता है वहां किसान सतर्क रहें। गुलदारों की आबादी बढ़ना स्वाभाविक प्रक्रिया है। गुलदार नीलगाय, सुअर आदि जीवों का शिकार करके इंसानों को फायदा पहुंचाता है।
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