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‘शिक्षित होकर देश की तरक्की में सहभागी बन रहीं छात्राएं’

Wed, 20 Mar 2019 12:09 AM IST
Deepak Sharma अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर Published by: Deepak Sharma Updated Wed, 20 Mar 2019 12:09 AM IST
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Girls becoming educated and participating in the country's development'
नारी गरिमा की शपथ लेतीं छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
अफजलगढ़ में  अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अपराजिता अभियान के तहत विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में मंगलवार को पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 200 छात्राओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सोनी दीक्षित ने कहा महिलाएं किसी भी क्षेत्र में कमजोर नहीं हैं। महिलाओं को कभी भी कम नहीं समझना चाहिए। उन्होंने छात्राओं के पोस्टरों पर उकेरे चित्रों की सराहना की। इस मौके पर छात्राओं ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ शीर्षक पर लघु नाटक पेश किया, जिसमें समाज को गर्भ में पल रही बेटियों की सुरक्षा कर उन्हें बचाने और उच्च शिक्षा दिलाकर देश का होनहार बनाने का संदेश दिया। अतिथियों ने इस मौके पर चल रहे अभियान के तहत छात्राओं को नारी गरिमा को बनाए रखने और उनके चेहरे पर आत्म विश्वासी मुस्कान लाने के लिए जिम्मेदारी से काम करने की शपथ दिलाई। छात्राओं ने हाथ उठाकर शपथ ग्रहण की।
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विद्या मंदिर के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में विद्यालय की सभी छात्राओं ने प्रतिभाग किया। अतिथि सोनी दीक्षित और रेखा रानी ने अमर उजाला की ओर से चल रहे अपराजिता कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया गया कि अमर उजाला की ओर से नारी गरिमा के प्रति छात्राओं में उनकी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से काम करने का बोध कराया जा रहा है। कार्यक्रम की जितनी प्रशंसा की जाए, कम ही होगी। उन्होंने महिलाओं व छात्राओं से आत्मनिर्भर बनने को प्रेरित किया। कहा कि छात्राएं अपना क्षेत्र चुनकर अपनी इच्छानुसार अपने कैरियर को आगे बढ़ा सकती है। इसके लिए कला का क्षेत्र भी बहुत अच्छा है। वह आर्ट कला में भी बहुत आगे तक जा सकती है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। समाज हित में भी महिलाएं बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही है। आज महिलाएं आईएएस, आईपीएस व अन्य अधिकारी बनकर देशसेवा कर रही है। इनमें ऐसा नहीं है कि शहरी क्षेत्र की महिला है इनमें अब ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी काफी आगे हैं। कस्बे , शहर व ग्रामीण क्षेत्र की छात्राएं उच्च शिक्षा ग्रहण कर उच्च पदों पर पहुंचकर समाज हित में योगदान दे सकती है। असामाजिक तत्वों से अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकती है। उच्च शिक्षा सुरक्षा की भावना पैदा करती है। इसके अलावा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से नाटक की प्रस्तुति दी गई। उन्होंने समाज में महिलाओं को अधिक से अधिक जागरूक करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया ।
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सम्मान की परिधि को और बढ़ाएं
छात्रा अनम जहां के अनुसार बेटियां देश का मान बढ़ा रही है। तो उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। समाज में उन्हें सम्मान मिल भी रहा है। पर वह इस सम्मान की परिधि को बढ़ाने का प्रयास करती रहें।
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 बेटियां विश्व में पहचान कायम कर रही हैं
छात्रा खुशी का कहना है कि बेटियां आज और पहले से त्याग करती चली आई है। जो वीरता और त्याग का प्रतीक है। आज पूरे विश्व में बेटियां अपनी पहचान कायम कर रही हैं।

बेटियों को भी बेटों के समान ही शिक्षा दें
छात्रा अनूफ का कहना है कि जिस प्रकार बेटों को समाज में सम्मान दिया जाता है। बेटियों को भी मिलना चाहिए वह समाज हित में आगे बढ़ रही है। पर संकुचित सोच के सामने आज भी बेटियों को बेटों के समान शिक्षा और अन्य सुविधाएं देने में कंजूसी बरती जा रही है। ऐसा नहीं होना चाहिए।

देश को विश्व में चमकाने की है प्रबल इच्छा
छात्रा अलीशा का कहना है कि वह उच्च शिक्षा हासिल कर देश और समाज की सेवा कर अपने माता-पिता का सम्मान बढ़ाने की इच्छा रखती है। वह पूरे मनोयोग से माता-पिता के आशीर्वाद से शिक्षा क्षेत्र में उच्च पढ़ाई कर देश के नाम को और बेहतर ढंग से विश्व में चमकाना चाहती है।
महिलाएं कर रहीं जागरूक
छात्रा काजल का कहना है कि महिलाएं अब समाज में भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए जागरूक करने का कार्य कर रही है। जो नारी गरिमा को बनाए रखने के लिए जरूरी है। जब तक हम सभी मिल छात्राओं और महिलाओं को उनकी गरिमा के बारे में जानकारी नहीं देंगे। तब तक महिलाएं घर की चारदीवारी के भीतर ही दम तोड़ती रहेगी।

उपयुक्त परिस्थितियां मिलने पर ही आगे बढ़ा जा सकता है
शिक्षिका स्वांजलि सिंह का कहना है कि यदि रुचि के अनुसार परिस्थिति मिले तो छात्राएं हर क्षेत्र में आगे निकल सकती है।

 बेटों की तरह ही पढ़ाना चाहिए बेटियों को
शिक्षिका शिखा गुप्ता  का कहना है कि  बेटियों को भी बेटों की तरह से ही पढ़ाना लिखाना चाहिए। ताकि वह भी शिक्षित होकर समाज का अभिन्न अंग बन देश की तरक्की में घर परिवार के नाम को रोशन कर सकें।

देश की तरक्की में किसी से पीछे नहीं महिलाएं
शिक्षिका पूजा रानी का कहना है कि आज जरूरत है समाज में भेदभाव मिटाकर बेटे-बेटियों को बराबर समझने की। जब से विभिन्न माध्यमों से जाग्रति आई है तब से महिलाओं ने समाज की प्रति जिम्मेदारी को समझा और देश की तरक्की के लिए दिनरात एक कर दायित्वों का निर्वहन करने में किसी से पीछे नहीं है।
अभियान है सराहनीय
शिक्षिका गीता चौहान का कहना है कि आर्ट कला को चुनकर भी आज  के समय में भविष्य को संवारा जा सकता है। क्षेत्र कोई सा भी हो। पर मेहनत से आगे बढ़ धमाल मचाने में सबसे आगे है। उन्होंने अमर उजाला के इस अभियान की प्रशंसा की ।

अभियान ने किया प्रोत्साहित
शिक्षिका अरुणा चौहान का कहना कि समाज के लोगों के साथ हमें बेटियों को जन्म देने, भ्रूण में पल रहीं बेटी को प्रोत्साहित करने, लिंग विभेद के चलते गर्भ में उसकी हत्या न करने व बेटियों को बेटों के समान शिक्षा देने को प्रेरित किया है।
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