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गंगा बैराज क्षेत्र घड़ियालों के लिए मुफीद
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 12 Oct 2015 12:10 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर। शास्त्रों व पुराणों में घड़ियाल को गंगा का वाहक माना गया है। गंगा में घड़ियालों की संख्या बढ़ रही है। गंगा बैराज का क्षेत्र घड़ियालों के लिए सर्वाधिक मुफीद होता जा रहा है। इस क्षेत्र में टीम को 300 घड़ियाल मिले हैं, जबकि गत वर्षों में गंगा में कुल 571 घड़ियाल छोड़े गए थे।
वन विभाग की टीम और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने सन 2008 में गंगा में घड़ियाल को विकसित करने के लिए प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। समय-समय पर बिजनौर बैराज, मखदूमपुर घाट, गढ़मुक्तेश्वर व उससे आगे कई स्थानों पर घड़ियालों के बच्चे छोड़े गए। अब तक गंगा में छोड़े गए घड़ियालों की संख्या 571 है। हाल में टीम ने गंगा में बिजनौर बैराज से लेकर मखदूमघाट तक सर्वे किया। सर्वे में टीम को इस क्षेत्र में 300 घड़ियाल दिखाई दिए। इस क्षेत्र में घड़ियालों का बढ़ना गंगा जल व वातावरण की शुद्धता के लिए शुभ संकेत है।
आस-पास के क्षेत्र से आए घड़ियाल
बैराज से मखदूमपुर घाट के बीच घड़ियाल आसपास के क्षेत्र से भी आए है। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक घड़ियाल के परिवार में वृद्धि नहीं हुई है। गढ़मुक्तेश्वर आदि क्षेत्र से घड़ियालों ने अपना प्रवास बदलकर बैराज से मखदूमपुर के बीच बना लिया है।
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रतिनिधि संजीव यादव ने बताया कि बिजनौर बैराज से लेकर मखदूमपुर घाट तक 45 घड़ियाल ऐसे हैं, जिनकी आयु नौ वर्ष से लेकर दस वर्ष के बीच है। यह क्षेत्र घड़ियाल के लिए सबसे अधिक मुफीद है। डीएफओ सलील कुमार शुक्ला का कहना है कि बिजनौर बैराज से मखदूमपुर घाट तक घड़ियाल का बढ़ना स्वच्छ व निर्मल गंगाजल का प्रतीक है।
गंगा स्वच्छ अभियान के लिए यह पहला और अच्छा संकेत भी है।
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बिजनौर। शास्त्रों व पुराणों में घड़ियाल को गंगा का वाहक माना गया है। गंगा में घड़ियालों की संख्या बढ़ रही है। गंगा बैराज का क्षेत्र घड़ियालों के लिए सर्वाधिक मुफीद होता जा रहा है। इस क्षेत्र में टीम को 300 घड़ियाल मिले हैं, जबकि गत वर्षों में गंगा में कुल 571 घड़ियाल छोड़े गए थे।
वन विभाग की टीम और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने सन 2008 में गंगा में घड़ियाल को विकसित करने के लिए प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। समय-समय पर बिजनौर बैराज, मखदूमपुर घाट, गढ़मुक्तेश्वर व उससे आगे कई स्थानों पर घड़ियालों के बच्चे छोड़े गए। अब तक गंगा में छोड़े गए घड़ियालों की संख्या 571 है। हाल में टीम ने गंगा में बिजनौर बैराज से लेकर मखदूमघाट तक सर्वे किया। सर्वे में टीम को इस क्षेत्र में 300 घड़ियाल दिखाई दिए। इस क्षेत्र में घड़ियालों का बढ़ना गंगा जल व वातावरण की शुद्धता के लिए शुभ संकेत है।
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आस-पास के क्षेत्र से आए घड़ियाल
बैराज से मखदूमपुर घाट के बीच घड़ियाल आसपास के क्षेत्र से भी आए है। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक घड़ियाल के परिवार में वृद्धि नहीं हुई है। गढ़मुक्तेश्वर आदि क्षेत्र से घड़ियालों ने अपना प्रवास बदलकर बैराज से मखदूमपुर के बीच बना लिया है।
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रतिनिधि संजीव यादव ने बताया कि बिजनौर बैराज से लेकर मखदूमपुर घाट तक 45 घड़ियाल ऐसे हैं, जिनकी आयु नौ वर्ष से लेकर दस वर्ष के बीच है। यह क्षेत्र घड़ियाल के लिए सबसे अधिक मुफीद है। डीएफओ सलील कुमार शुक्ला का कहना है कि बिजनौर बैराज से मखदूमपुर घाट तक घड़ियाल का बढ़ना स्वच्छ व निर्मल गंगाजल का प्रतीक है।
गंगा स्वच्छ अभियान के लिए यह पहला और अच्छा संकेत भी है।