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वन विभाग ने अभियान चलाकर कई वन्य जीवों को बचाया
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चांदपुर में मिले बिज्जू के बच्चे।
- फोटो : BIJNOR
वन विभाग ने अभियान चलाकर कई वन्य जीवों को बचाया
बिजनौर। वन विभाग ने तीन दिन में अभियान चलाकर कई वन्यजीवों को बचाया है। इनमें से कुछ को जंगल में छोड़ दिया गया है तो कुछ को अभी अपनी सुरक्षा में रखा है।
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक बृहस्पतिवार को मोहल्ला मिर्दगान के पास एक उल्लू के घायल होने की सूचना मिली। उन्होंने उल्लू को अपने आवास पर मंगवाकर उसका उपचार कराया। किरतपुर के एक गांव में वन विभाग ने एक घायल नीलगाय का उपचार कराया। बुधवार को गांव बूढ़ानंगली के जंगल से बिज्जू के तीन बच्चे व चांदपुर से दो शावक मिले। इन शावकों की आंख भी नहीं खुली थी। बूढ़ानंगली में मिले शावकों को पास में ही छोड़ दिया गया। बाकी दो बच्चों को सुरक्षा में दिया गया है। मोहम्मदपुर देवमल गांव के पास से वन विभाग को एक हिरन भी घायल हालत में मिला। उसका उपचार कराया गया लेकिन उसकी मौत हो गई। मंगलवार को नगीना के जंगल से जंगली बिल्ली का एक बच्चा भी बरामद हुआ। उसे भी सुरक्षा में दिया गया है। डीएफओ डा.एम सेम्मारन का कहना है कि वन्य जीवों के बचाव के लिए पूरा अभियान चलाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर उनका उपचार भी कराया जा रहा है। अगर किसी को किसी कोई वन्य जीव घायल हालत में मिलता है तो वन विभाग को इसकी सूचना दें।
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बिजनौर। वन विभाग ने तीन दिन में अभियान चलाकर कई वन्यजीवों को बचाया है। इनमें से कुछ को जंगल में छोड़ दिया गया है तो कुछ को अभी अपनी सुरक्षा में रखा है।
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक बृहस्पतिवार को मोहल्ला मिर्दगान के पास एक उल्लू के घायल होने की सूचना मिली। उन्होंने उल्लू को अपने आवास पर मंगवाकर उसका उपचार कराया। किरतपुर के एक गांव में वन विभाग ने एक घायल नीलगाय का उपचार कराया। बुधवार को गांव बूढ़ानंगली के जंगल से बिज्जू के तीन बच्चे व चांदपुर से दो शावक मिले। इन शावकों की आंख भी नहीं खुली थी। बूढ़ानंगली में मिले शावकों को पास में ही छोड़ दिया गया। बाकी दो बच्चों को सुरक्षा में दिया गया है। मोहम्मदपुर देवमल गांव के पास से वन विभाग को एक हिरन भी घायल हालत में मिला। उसका उपचार कराया गया लेकिन उसकी मौत हो गई। मंगलवार को नगीना के जंगल से जंगली बिल्ली का एक बच्चा भी बरामद हुआ। उसे भी सुरक्षा में दिया गया है। डीएफओ डा.एम सेम्मारन का कहना है कि वन्य जीवों के बचाव के लिए पूरा अभियान चलाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर उनका उपचार भी कराया जा रहा है। अगर किसी को किसी कोई वन्य जीव घायल हालत में मिलता है तो वन विभाग को इसकी सूचना दें।
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