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तीन महीने से बारिश ने मुंह मोड़ा, न ठंड न कोहरा
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बिजनौर। दो दिन की शीतलहर, एक दो दिन कोहरा और एक दिन का पाला। ठंड के नाम पर जिले में इस बार अब तक केवल इतना ही हुआ है। बारिश न होने की वजह से ठंड गायब है। कोहरा आना तो दूर पिछले सालों के बराबर ओस तक इस साल नहीं पड़ रही है। बारिश नहीं होने की वजह से रबी की फसलें प्रभावित होंगी। साथ ही इससे भूगर्भ जल स्तर भी प्रभावित हो सकता है।
नदियों से घिरे जिले में बारिश भी फसलों की सिंचाई में अहम भूमिका है। जिले में हर साल एक हजार एमएम से अधिक बारिश होती है। जिले में जनवरी से लेकर अगस्त तक अच्छी-खासी बारिश हुई। अगस्त में तो इतनी बारिश हुई थी कि गंगा किनारे कई सालों से सूखे पड़े स्त्रोत से भी पानी की धारा फूट पड़ी थी। लेकिन आधे अगस्त के बाद बारिश ने मुंह मोड़ लिया। हर महीने में होने वाली औसत बारिश जिले में रिकॉर्ड रहती है। सितंबर में जिले में औसतन 192 एमएम, अक्तूबर में औसतन 30 एमएम और नवंबर में साढ़े चार एमएम बारिश होती है। बारिश से मौसम में नमी रहती है। कोहरा भी इस वजह से आता है और पाला भी इसी वजह से पड़ता है। मौसम में नमी होती है तो सामान्य हवा भी शीतलहर सी लगती है। लेकिन इस साल सितंबर में केवल 3.4 एमएम बारिश हुई। अक्तूबर और नवंबर में तो बारिश की बूंद भी नहीं बरसी। दिसंबर का पहला सप्ताह चल रहा है लेकिन तापमान अब भी 25 डिग्री सेल्सियस तक जा रहा है, जबकि इसे 22 डिग्री सेल्सियस तक रहना चाहिए। पूरा दिन धूप खिलने से बहुत ज्यादा गर्म कपड़े पहनने की जरूरत महसूस ही नहीं होती। रात को ही गर्म कपड़ों का प्रयोग किया जा रहा है।
सिंचाई की ज्यादा जरूरत
सर्दी में सामान्य तौर पर फसलों को कम पानी देना होता है। एक बार सिंचाई करने पर करीब 20 दिन तक सिंचाई की जरूरत नहीं होती। लेकिन ज्यादा सर्दी न पड़ने पर 15 दिन में ही सिंचाई करनी होती है। भूमिगत जल का दोहन व किसान की मेहनत, लागत दोनों बढ़ती हैं। वाष्पन की दर अधिक होने से पानी जल्दी सूख जाता है।
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फसलें होंगी प्रभावित
रबी में मुख्य रूप से सरसों, गेहूं की फसल किसान बोते हैं। जिले में इन फसलों का रकबा करीब एक लाख 70 हजार हेक्टेअर है। उत्तर भारत में खेतों में मेक्सिन प्रजाति का गेहूं बोया जाता है। जितनी अधिक सर्दी होती है, गेहूं की पैदावार उतनी ही अच्छी होती है। लेकिन बारिश न होने से गेहूं की फसल ज्यादा विकसित नहीं होती है। गेहूं की बाली भी ज्यादा नहीं बढ़ती है।
बारिश की नमी से ही होती है ठंड
नगीना स्थित मौसम वेधशाला के सेवानिवृत्त प्रेक्षक आरके शर्मा का कहना है कि बारिश न होने से मौसम पर असर पड़ा है। मौसम में नमी से ही ठंड रहती है। बारिश न होने से वजह से अभी तक ठंड नहीं हुई है। बारिश होने पर ही ठंड बढ़ सकती है।
गेहूं पनपता है ठंड में
कृषि वैज्ञानिक डा.केके सिंह के अनुसार बारिश न होने से फसलों की सिंचाई ज्यादा करनी होगी। गेहूं की फसल ठंड होने पर ही अच्छी रहती है। अभी ठंड के लिए काफी समय है।
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नदियों से घिरे जिले में बारिश भी फसलों की सिंचाई में अहम भूमिका है। जिले में हर साल एक हजार एमएम से अधिक बारिश होती है। जिले में जनवरी से लेकर अगस्त तक अच्छी-खासी बारिश हुई। अगस्त में तो इतनी बारिश हुई थी कि गंगा किनारे कई सालों से सूखे पड़े स्त्रोत से भी पानी की धारा फूट पड़ी थी। लेकिन आधे अगस्त के बाद बारिश ने मुंह मोड़ लिया। हर महीने में होने वाली औसत बारिश जिले में रिकॉर्ड रहती है। सितंबर में जिले में औसतन 192 एमएम, अक्तूबर में औसतन 30 एमएम और नवंबर में साढ़े चार एमएम बारिश होती है। बारिश से मौसम में नमी रहती है। कोहरा भी इस वजह से आता है और पाला भी इसी वजह से पड़ता है। मौसम में नमी होती है तो सामान्य हवा भी शीतलहर सी लगती है। लेकिन इस साल सितंबर में केवल 3.4 एमएम बारिश हुई। अक्तूबर और नवंबर में तो बारिश की बूंद भी नहीं बरसी। दिसंबर का पहला सप्ताह चल रहा है लेकिन तापमान अब भी 25 डिग्री सेल्सियस तक जा रहा है, जबकि इसे 22 डिग्री सेल्सियस तक रहना चाहिए। पूरा दिन धूप खिलने से बहुत ज्यादा गर्म कपड़े पहनने की जरूरत महसूस ही नहीं होती। रात को ही गर्म कपड़ों का प्रयोग किया जा रहा है।
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सिंचाई की ज्यादा जरूरत
सर्दी में सामान्य तौर पर फसलों को कम पानी देना होता है। एक बार सिंचाई करने पर करीब 20 दिन तक सिंचाई की जरूरत नहीं होती। लेकिन ज्यादा सर्दी न पड़ने पर 15 दिन में ही सिंचाई करनी होती है। भूमिगत जल का दोहन व किसान की मेहनत, लागत दोनों बढ़ती हैं। वाष्पन की दर अधिक होने से पानी जल्दी सूख जाता है।
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फसलें होंगी प्रभावित
रबी में मुख्य रूप से सरसों, गेहूं की फसल किसान बोते हैं। जिले में इन फसलों का रकबा करीब एक लाख 70 हजार हेक्टेअर है। उत्तर भारत में खेतों में मेक्सिन प्रजाति का गेहूं बोया जाता है। जितनी अधिक सर्दी होती है, गेहूं की पैदावार उतनी ही अच्छी होती है। लेकिन बारिश न होने से गेहूं की फसल ज्यादा विकसित नहीं होती है। गेहूं की बाली भी ज्यादा नहीं बढ़ती है।
बारिश की नमी से ही होती है ठंड
नगीना स्थित मौसम वेधशाला के सेवानिवृत्त प्रेक्षक आरके शर्मा का कहना है कि बारिश न होने से मौसम पर असर पड़ा है। मौसम में नमी से ही ठंड रहती है। बारिश न होने से वजह से अभी तक ठंड नहीं हुई है। बारिश होने पर ही ठंड बढ़ सकती है।
गेहूं पनपता है ठंड में
कृषि वैज्ञानिक डा.केके सिंह के अनुसार बारिश न होने से फसलों की सिंचाई ज्यादा करनी होगी। गेहूं की फसल ठंड होने पर ही अच्छी रहती है। अभी ठंड के लिए काफी समय है।