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Bijnor News: फाइलों में तैर रहीं मछलियां, तालाब में इंसान
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बिजनौर के गांव फजलपुर में मछली पालन के लिए बनाए पक्के तालाब को स्वीमिंग पूल में किया गया तब्दील
अचल चौधरी
बिजनौर। सरकारी अनुदान लेकर मछली पालन के लिए बनाए गए पक्के तालाब में मछलियों की जगह इंसान तैर रहे हैं। लाभार्थी ने तालाब में मछली पालन के बजाए स्वीमिंग पूल बना दिया है। इसमें शुल्क लेकर तैराकी कराई जा रही है। पास में ही लगा परियोजना से संबंधित बोर्ड बता रहा है कि परियोजना की लागत 7.50 लाख रुपये थी, जिस पर 4.50 लाख रुपये परियोजना अंश और तीन लाख रुपये लाभार्थी का अंश था।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में मंडावर क्षेत्र के गांव फजलपुर में मछली पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से परियोजना की शुरुआत की गई थी। निर्माण के बाद कुछ समय तक लाभार्थी ने इस तालाब में मछली पालन किया, लेकिन बाद में इसका मूल उद्देश्य बदल दिया। अब इस पक्के तालाब को स्वीमिंग पूल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसमें आसपास के लोगों से शुल्क लेकर तैराकी कराई जा रही है, जिससे सरकारी योजना के उद्देश्य पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करना है। ऐसे में यदि सरकारी अनुदान से निर्मित परियोजना का उपयोग किसी अन्य व्यावसायिक गतिविधि के लिए किया जा रहा है, तो यह योजना की शर्तों के उल्लंघन का मामला हो सकता है।
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पहले योजना के तहत बने पक्के तालाब में मछली पालन किया गया था। अब उन्होंने पास में दूसरे कच्चे तालाब में मछली पालन कर रखा है। - विजयपाल सिंह, लाभार्थी।
-इस मामले में दिखवाया जाएगा। जिस काम के लिए सरकारी अनुदान लिया गया है, वह काम होना चाहिए। टीम गठित कर प्रकरण की जांच कराई जाएगी। - रणविजय सिंह, मुख्य विकास अधिकारी बिजनौर
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बिजनौर। सरकारी अनुदान लेकर मछली पालन के लिए बनाए गए पक्के तालाब में मछलियों की जगह इंसान तैर रहे हैं। लाभार्थी ने तालाब में मछली पालन के बजाए स्वीमिंग पूल बना दिया है। इसमें शुल्क लेकर तैराकी कराई जा रही है। पास में ही लगा परियोजना से संबंधित बोर्ड बता रहा है कि परियोजना की लागत 7.50 लाख रुपये थी, जिस पर 4.50 लाख रुपये परियोजना अंश और तीन लाख रुपये लाभार्थी का अंश था।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में मंडावर क्षेत्र के गांव फजलपुर में मछली पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से परियोजना की शुरुआत की गई थी। निर्माण के बाद कुछ समय तक लाभार्थी ने इस तालाब में मछली पालन किया, लेकिन बाद में इसका मूल उद्देश्य बदल दिया। अब इस पक्के तालाब को स्वीमिंग पूल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसमें आसपास के लोगों से शुल्क लेकर तैराकी कराई जा रही है, जिससे सरकारी योजना के उद्देश्य पर सवाल उठ रहे हैं।
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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करना है। ऐसे में यदि सरकारी अनुदान से निर्मित परियोजना का उपयोग किसी अन्य व्यावसायिक गतिविधि के लिए किया जा रहा है, तो यह योजना की शर्तों के उल्लंघन का मामला हो सकता है।
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पहले योजना के तहत बने पक्के तालाब में मछली पालन किया गया था। अब उन्होंने पास में दूसरे कच्चे तालाब में मछली पालन कर रखा है। - विजयपाल सिंह, लाभार्थी।
-इस मामले में दिखवाया जाएगा। जिस काम के लिए सरकारी अनुदान लिया गया है, वह काम होना चाहिए। टीम गठित कर प्रकरण की जांच कराई जाएगी। - रणविजय सिंह, मुख्य विकास अधिकारी बिजनौर