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Bijnor News: 250 राउंड फायरिंग, चार घंटे आतिशबाजी, गजराज ने तब छोड़ी आबादी

Sun, 16 Jun 2024 01:46 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jun 2024 01:46 AM IST
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Firing 250 rounds, fireworks for four hours, Gajraj then left the population
नई कालोनी में अमलताश के पेड़ के नीचे खड़ा हाथी जिसे देखती जनता । स्रोत संवाद।
- गांव हबीबवाला में युवक मुर्सलीन की जान लेने वाला हाथी कार्बेट पार्क में पहुंचा
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-50 किलोमीटर घूमकर जंगल तक पहुंचा
- 5 रेंज के वनकर्मी हाथी को खदेड़ने में लगे थे

रजनीश त्यागी
बिजनौर। कार्बेट पार्क से निकलकर आबादी की ओर आए गजराज पर जब सभी हाका और तरकीब विफल हो गई, वन विभाग को हवाई फायरिंग और आतिशबाजी का सहारा लेना पड़ा। उसे खदेड़ने में वन अफसरों और कर्मियों ने 250 राउंड से ज्यादा हवाई फायरिंग की। वहीं, चार घंटे से अधिक समय तक आतिशबाजी की। तब कहीं जाकर हाथी साहूवाला रेंज होता हुआ कार्बेट पार्क के जंगलों में चला गया।
एक सप्ताह पहले कार्बेट पार्क से निकला इक्कड़ हाथी अफजलगढ़ क्षेत्र में पहुंचा। यहां पर बंद स्टोन क्रेशर और खेतों में उत्पात बचाने के बाद यह आगे बढ़ गया। बुधवार को धामपुर रेंज के गांव हबीबवाला के जंगलों में भी उत्पात मचाया। इस दौरान उसने एक 30 वर्षीय मुर्सलीन को भी पटककर मार डाला। इसके बाद जिले की पांच रेंज की टीम, डीएफओ, एसडीओ के साथ वन संरक्षक भी हालात की गंभीरता को समझते हुए मौके पर पहुंचे।
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वन्य जीवों को खदड़ने की पुरानी हाका तरकीब भी अपनाई गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद वन कर्मियों ने हाथी को साहूवाला रेंज तक खदेड़ने का रूट मैप तैयार किया और अलग-अलग टीमों को इसमें लगाया गया। एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि करीब 250 राउंड हवाई फायरिंग की गई। इसके अलावा 400 से ज्यादा तेज आवाज करने वाले पटाखे भी छोड़े गए। तय रूट पर उसे लगातार खदेड़ा गया और वह फिर साहूवाला रेंज में प्रवेश कर गया। यहां पर भी उसपर नजर रखी गई, लेकिन शनिवार तक वह कार्बेट पार्क के जंगलों तक पहुंच गया।
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झुंड से अलग हुआ था हाथी
करीब एक सप्ताह तक आतंक का पर्याय बना हाथी इक्कड़ था। वन विशेषज्ञ बताते हैं कि इक्कड़ हाथी उसे कहते हैं जिसे झुंड से अलग कर दिया जाता है। यह उत्पाती होते हैं, इसी कारण झुंड के अन्य हाथी मिलकर उसे अलग कर देते हैं। इसके बाद यह आम लोगों के लिए और बड़ा खतरा बन जाता है। अकेले हाथी से हमेशा सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि यह उत्पात मचाते हुए चलता है।


कहने को सामाजिक वानिकी, वन्य जीव मचा रहे उत्पात
बिजनौर वन प्रभाग सामाजिक वानिकी है। कमाल यह है कि इसी वन प्रभाग में पिछले दो साल से वन्य जीवों ने सबसे ज्यादा उत्पात मचाया हुआ है। जहां रोजाना कहीं न कहीं गुलदार दिख रहा है तो पिछले डेढ़ साल में 20 से ज्यादा लोग अपनी जान गुलदार के हमले में गवां चुके हैं। अब हाथी जंगल से बाहर आकर खूब उत्पात मचा रहे हैं। सामाजिक वानिकी होने के कारण वन विभाग के पास वन्य जीवों को नियंत्रण करने के पर्याप्त संसाधन नहीं है।
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