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Bijnor News: आतिशबाजी बीते दिनों की बात, अब गूंजते हैं वैदिक मंत्र

Sat, 11 Nov 2023 11:00 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Nov 2023 11:00 PM IST
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Fireworks are a thing of the past, now Vedic mantras echo
बिजनौर के ग्राम गढ़ी बगीची में यज्ञ करते ग्रामीण।
स्वाहेड़ी और गढ़ी बगीची में दीपावली पर नहीं जलाए जाते हैं पटाखे
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- बुजुर्गों की पहल पर आर्य समाज की परंपरा का पालन कर रहे सभी


मोहम्मद यूनुस
गजरौला शिव (बिजनौर)। स्वाहेड़ी और गढ़ी बगीची गांव में दीपावली पर पटाखे छोड़ना अब बीते जमाने की बात हो गई है। अब इन गांव में हर घर में दीपावली पर हवन यज्ञ होता है और वैदिक मंत्र गूंजते हैं। हालांकि इक्का दुक्का बालकों को छोड़ दें तो गांव के लोग पटाखों से दूरी बनाए हुए हैं।

स्वाहेड़ी गांव के युवा नशे में फंसकर अक्सर किसी न किसी झगड़े में पड़ जाते थे। गांव में झगड़ों में त्योहारों पर शराब पीकर हुड़दंग करना और तमंचे से फायरिंग करना भी आम बात थी। मगर, धीरे-धीरे गांव के बुजुर्गों ने मामले को समझा और बदलने की कोशिश की। सभी ने आर्य समाज की परंपरा का पालन शुरू किया। हर घर से नशाखोरी को दूर किया। कुछ वर्ष पहले पुलिस के अधिकारियों को भी फिर से गांव में बुलाकर बैठक की गई।
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बैठक में धनतेरस से लेकर दीपावली तक हवन यज्ञ करने का निर्णय लिया गया। अब गांव में धनतेरस से लेकर गोवर्धन पूजा तक तीन दिन तक गांव स्वाहेड़ी व गढ़ी बगीची के हर घर में यज्ञ का आयोजन किया जाता है। साथ ही गांव में दीपावली पर होने वाले इस हवन में सभी गांव वाले जाति बिरादरी के बंधन को तोड़कर यज्ञ करते हैं। जहां दीपावली पर पर्यावरण प्रदूषण होता है, वहीं स्वाहेड़ी, गढ़ी बगीची के गांव वाले पर्यावरण को हवन से शुद्ध करते हैं।
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स्वाहेड़ी में बेटियों को बचाने की शपथ स्वामी ओमवेश ने दिलाई थी
गांव में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को कई साल से चलाया जा रहा है। सभी गांव वाले बेटी बचाने, बेटी पढ़ने की शपथ लेते हैं। इस नारे को स्वाहेड़ी में सबसे पहले स्वामी ओमवेश ने दिया था। गांव वाले कन्या भ्रूण हत्या को सबसे बड़ा पाप बताते हैं। आर्य समाज के प्रधान डॉक्टर विद्यासागर आर्य ने बताया कि ग्रामीण दीपावली पर पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संदेश देते हैं। गांव की इस परंपरा को सभी को अपनाना चाहिए।

अमित आर्य के अनुसार गांव में पुरानी परंपराओं का फिर से पालन किया जा रहा है। गांव के पूर्व प्रधान जयपाल सिंह आर्य का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा यज्ञ परंपरा शुरू करने से सब कुछ बदल गया है। आज गांव के लोगों को बाकी जगहों पर होने वाले यज्ञ कार्यक्रमों में भी शामिल किया जाता है। ममता आर्य का कहना है कि अब गांव के युवा नशाखोरी, झगड़े से दूर है। अब गांव के युवा सामाजिक मुद्दों को भी उठा रहे हैं।
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