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एक मंच पर आकर भी साथ नहीं आए किसान संगठन

Wed, 09 Dec 2020 11:56 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 09 Dec 2020 11:56 PM IST
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Farmers' organizations did not come together on one platform
एक मंच पर आकर भी साथ नहीं आए किसान संगठन
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बिजनौर। मंगलवार को हुए किसान आंदोलन में एक मंच पर आकर भी किसान संगठन एक दूसरे के साथ नहीं आए। किसान नेता अपने अपने संगठनों को चमकाने में लगे रहे। आम किसान भी इस संगठन से नहीं जुड़ सका। जिले में जाम तो कई जगह लगे लेकिन इनमें किसानों की संख्या ज्यादा नहीं रही।
कई मांगों को लेकर किसानों ने मंगलवार को आंदोलन किया था। इसमें सभी संगठनों ने जिले भर में करीब 61 जगह पर चक्का जाम किया था। किसानों ने बैठक में यह निर्णय लिया था कि सभी किसान संगठन एक दूसरे का सहयोग करेंगे। किसी भी दल के कार्यकर्ता हों वे अपने पास लग रहे जाम में शामिल होंगे भले ही वह किसी भी संगठन का हो। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। सभी संगठनों के नेता व कार्यकर्ता अपने अपने चक्का जाम में ही शामिल हुए। सभी अपने अपने संगठन को चमकाने में लगे रहे।
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अगर कोई संगठन का पदाधिकारी अपने संगठन के चक्का जाम में जाने की कोशिश करता तो उसे दूसरे संगठन के पदाधिकारियों के विरोध का भी सामना करना पड़ा। कई जगह ऐसे किसानों को ही दूसरे संगठन वालों ने वापस लौटा दिया जो अपने संगठन के चक्का जाम में जाने की कोशिश कर रहे थे। एक दो नेता ही ऐसे रहे जो अपने संगठन के अलावा दूसरे संगठन के चक्का जाम में भी शामिल हुए। ऐसा भी कहीं देखने को मिला कि किसी संगठन के पदाधिकारी ने दूसरे संगठन के जाम में फंसे अपने परिचितों को निकलवाने की कोशिश की लेकिन उन्हें नहीं निकलने दिया गया। किसान संगठन एक मंच पर आने की घोषणा के बाद भी अपने अपने खेमों में ही बंटे नजर आए।
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पदाधिकारी ही रहे धरने में
किसान संगठनों ने अपने अपने प्रभाव के क्षेत्रों के हिसाब से चक्का जाम के प्वाइंट तय किए थे। इसके बाद भी वे जनता को पूरी तरह अपने साथ नहीं जोड़ पाए। केवल पदाधिकारी व मुख्य कार्यकर्ता ही जाम में शामिल हुए। किसान रोज की तरह अपने कामों में जुटे रहे।

किसान संगठन बढ़ रहे लगातार
जिले में किसान संगठनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भाकियू का प्रभाव सबसे ज्यादा है। इनके अलावा राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन, आजाद किसान यूनियन, भाकियू भानू, भाकियू अंबावता, भाकियू लोकशक्ति, भाकियू तोमर आदि संगठन भी सक्रिय हैं। सबके पदाधिकारी तो अलग अलग होते हैं लेकिन इनके धरनों में जाने वाले किसान एक ही होते हैं। इस वजह से किसान भी लगातार संगठनों में बंट रहे हैं और संयुक्त चक्का जाम जैसे आह्वान पर भी ज्यादा भीड़ नहीं जुटी।
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