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पूर्व सीएमओ और स्टेनो का हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sat, 23 Dec 2017 11:48 PM IST
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कार्यालय में मौजूद सीएमओ व अन्य स्टाफ।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में सीएमओ कार्यालय में तीन करोड़ 11 लाख रुपये की एनआरएचएम घोटाले की फाइल लौटाने आए पूर्व सीएमओ और पूर्व स्टेनो से जमकर हंगामा किया। विवाद घोटाले की फाइल को रिसीव नहीं करने पर हुआ। इस मामले में वर्तमान सीएमओ ने एडी मुरादाबाद से दिशा-निर्देश मांगे है।
स्वास्थ्य विभाग के एनआरएचएम में वर्ष 2016 में तीन करोड़ 11 लाख का घोटाला हुआ था।
इस मामले में एक बाबू समेत दो लोग जेल में बंद है। करीब 15 दिन पहले फाइनेंस कंट्रोलर लखनऊ ने घोटाले के मामले में जानकारी मांगी थी। फाइनेंस कंट्रोलर को जानकारी देने के लिए सीएमओ ने स्टेनो मोहम्मद अहमद से फाइल मांगी थी। मगर, फाइन कहीं नही मिली। सीएमओ डा. राकेश मित्तल के अनुसार फाइल के लिए पूर्व स्टेनो फतेंद्र कुमार से संपर्क किया गया। फतेंद्र कुमार ने कहा सीएमओ कार्यालय की अलमारी में फाइल रखी हैं। जब वह बिजनौर आएंगे तो फाइल दे देंगे। शनिवार को पूर्व में तैनात रहे सीएमओ डा. सुखवीर सिंह और स्टेनो फतेंद्र कुमार फाइल लौटाने सीएमओ कार्यालय पहुंचे। दोनों ने स्टेनो मोहम्मद अहमद को घोटाले संबंधी फाइल सौंप दी, लेकिन वहां मौजूद अन्य बाबुओं और स्टेनो ने फाइल डाक में रिसीव करने से इंकार कर दिया। फतेंद्र कुमार एवं सुखवीर सिंह फाइल सीधे ही स्टेनो मोहम्मद अहमद को देना चाहते थे।
फाइल नहीं लेने पर दोनों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान लोगों की भीड़ लगने लगी और कुछ मीडिया कर्मी भी पहुंच गए। इस पर डा. सुखवीर सिंह वहां से निकल गए। फतेंद्र कुमार ने बताया उनके साथ ज्यादती की जा रही है। करीब एक घंटे तक सीएमओ कार्यालय में हंगामा चलता रहा। हंगामे के बाद भी स्टेनो मोहम्मद अहमद ने फाइल नहीं ली। सीएमओ डा. राकेश मित्तल ने बताया कि इस मामले में एडी मुरादाबाद से दिशा निर्देश मांगे गए है।
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कोर्ट के प्रत्यावेदन पर भी शासन ने नहीं लिया निर्णय : फतेंद्र
बिजनौर। पूर्व में तैनात रहे स्टेनो फतेंद्र कुमार का शासन ने 30 जून 2017 को गोरखपुर मंडल में स्थानांतरण कर दिया था। फतेंद्र कुमार ने बताया कि 12 जुलाई तक उन्हें कोई भी स्थानांतरण संबंधी आदेश नहीं मिला था। 13 जुलाई को तबियत खराब होने पर वह 15 दिन की छुट्टी पर चले गए थे। उन्होंने 28 जुलाई को छुट्टी के बाद ज्वाइन कर लिया था। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त स्थानांतरण आदेश के आधार पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद में उत्तर प्रदेश सरकार और दो अन्यों के खिलाफ रिट दायर की थी। रिट में बताया कि वर्ष 2014 में जिस आधार पर उनका मुजफ्फरनगर से बिजनौर स्थानांतरण हुआ था वह हालत अभी भी है, इसलिए स्थानांतरण का कोई औचत्य नहीं बनता है। न्यायालय ने फतेंद्र कुमार को उच्चाधिकारियों को अपना प्रत्यावेदन देने के साथ एक माह के भीतर निस्तारण के निर्देश दिए थे।
उनका कहना है कि उन्हें रिलीव करते वक्त यह नहीं बताया गया कि उन्हें चार्ज किसे देना है। बल्कि उन्हें वनसाइड रिलीव कर दिया। इसके बाद आचार संहिता लगी होने के दौरान सीएमओ कार्यालय में रखी उनकी अलमारी के ताले भी तोड़ दिए गए। कहना है कि आचार संहिता लगी होने के दौरान किसी कर्मचारी और अधिकारी को कार्य मुक्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर अधिकारियों को अभिलेख संबंधी अलमारियों तोड़नी थी तो वह उनके सामने तोड़ते। ऐसे में कोई भी अभिलेख गायब होने का उत्तरदायी अधिकारियों को होगा। वहीं सीएमओ डा.राकेश मित्तल ने बताया कि फतेंद्र कुमार ने स्थानांतरण संबंधी आदेश नहीं लिया था। इसके बाद टीम बनाकर उनके आवास पर आदेश की कॉपी चस्पा करा दी गई थी।
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स्वास्थ्य विभाग के एनआरएचएम में वर्ष 2016 में तीन करोड़ 11 लाख का घोटाला हुआ था।
इस मामले में एक बाबू समेत दो लोग जेल में बंद है। करीब 15 दिन पहले फाइनेंस कंट्रोलर लखनऊ ने घोटाले के मामले में जानकारी मांगी थी। फाइनेंस कंट्रोलर को जानकारी देने के लिए सीएमओ ने स्टेनो मोहम्मद अहमद से फाइल मांगी थी। मगर, फाइन कहीं नही मिली। सीएमओ डा. राकेश मित्तल के अनुसार फाइल के लिए पूर्व स्टेनो फतेंद्र कुमार से संपर्क किया गया। फतेंद्र कुमार ने कहा सीएमओ कार्यालय की अलमारी में फाइल रखी हैं। जब वह बिजनौर आएंगे तो फाइल दे देंगे। शनिवार को पूर्व में तैनात रहे सीएमओ डा. सुखवीर सिंह और स्टेनो फतेंद्र कुमार फाइल लौटाने सीएमओ कार्यालय पहुंचे। दोनों ने स्टेनो मोहम्मद अहमद को घोटाले संबंधी फाइल सौंप दी, लेकिन वहां मौजूद अन्य बाबुओं और स्टेनो ने फाइल डाक में रिसीव करने से इंकार कर दिया। फतेंद्र कुमार एवं सुखवीर सिंह फाइल सीधे ही स्टेनो मोहम्मद अहमद को देना चाहते थे।
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फाइल नहीं लेने पर दोनों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान लोगों की भीड़ लगने लगी और कुछ मीडिया कर्मी भी पहुंच गए। इस पर डा. सुखवीर सिंह वहां से निकल गए। फतेंद्र कुमार ने बताया उनके साथ ज्यादती की जा रही है। करीब एक घंटे तक सीएमओ कार्यालय में हंगामा चलता रहा। हंगामे के बाद भी स्टेनो मोहम्मद अहमद ने फाइल नहीं ली। सीएमओ डा. राकेश मित्तल ने बताया कि इस मामले में एडी मुरादाबाद से दिशा निर्देश मांगे गए है।
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कोर्ट के प्रत्यावेदन पर भी शासन ने नहीं लिया निर्णय : फतेंद्र
बिजनौर। पूर्व में तैनात रहे स्टेनो फतेंद्र कुमार का शासन ने 30 जून 2017 को गोरखपुर मंडल में स्थानांतरण कर दिया था। फतेंद्र कुमार ने बताया कि 12 जुलाई तक उन्हें कोई भी स्थानांतरण संबंधी आदेश नहीं मिला था। 13 जुलाई को तबियत खराब होने पर वह 15 दिन की छुट्टी पर चले गए थे। उन्होंने 28 जुलाई को छुट्टी के बाद ज्वाइन कर लिया था। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त स्थानांतरण आदेश के आधार पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद में उत्तर प्रदेश सरकार और दो अन्यों के खिलाफ रिट दायर की थी। रिट में बताया कि वर्ष 2014 में जिस आधार पर उनका मुजफ्फरनगर से बिजनौर स्थानांतरण हुआ था वह हालत अभी भी है, इसलिए स्थानांतरण का कोई औचत्य नहीं बनता है। न्यायालय ने फतेंद्र कुमार को उच्चाधिकारियों को अपना प्रत्यावेदन देने के साथ एक माह के भीतर निस्तारण के निर्देश दिए थे।
उनका कहना है कि उन्हें रिलीव करते वक्त यह नहीं बताया गया कि उन्हें चार्ज किसे देना है। बल्कि उन्हें वनसाइड रिलीव कर दिया। इसके बाद आचार संहिता लगी होने के दौरान सीएमओ कार्यालय में रखी उनकी अलमारी के ताले भी तोड़ दिए गए। कहना है कि आचार संहिता लगी होने के दौरान किसी कर्मचारी और अधिकारी को कार्य मुक्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर अधिकारियों को अभिलेख संबंधी अलमारियों तोड़नी थी तो वह उनके सामने तोड़ते। ऐसे में कोई भी अभिलेख गायब होने का उत्तरदायी अधिकारियों को होगा। वहीं सीएमओ डा.राकेश मित्तल ने बताया कि फतेंद्र कुमार ने स्थानांतरण संबंधी आदेश नहीं लिया था। इसके बाद टीम बनाकर उनके आवास पर आदेश की कॉपी चस्पा करा दी गई थी।