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नई शिक्षा नीति से सभी को मिलेंगे समान अवसर
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नई शिक्षा नीति से सभी को मिलेंगे समान अवसर
बिजनौर। नई शिक्षा नीति लागू हो गई है। जिससे शिक्षा के क्षेत्र में नए युग का सूत्रपात हुआ है। नई नीति में सभी को शिक्षा के समान अवसर दिए गए हैं। शिक्षा को रोजगार परक बनाया गया है। युवाओं के लिए कॅरिअर विकल्प चुनने के अधिक अवसर हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में करीब 34 साल बाद बदलाव हुआ है। नीति में सभी को शिक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर दिए गए हैं। शिक्षाविद डॉ. मुकेश कुमार के अनुसार वर्ष 2020 में लागू नई शिक्षा नीति के सकारात्मक परिणाम की झलक मिलने लगी है। युवाओं को मैकाले की बाबू बनाओ नीति से निकालकर स्वदेशी स्वावलंबन की ओर बढ़ाने का प्रयास है। नई शिक्षा नीति में शिक्षा को प्राथमिक शिक्षा से लेकर शोध शिक्षा तक राष्ट्रीय आवश्यकताओं से जोड़ा गया है। शिक्षा लोक कल्याण पर आधारित है। बहुउद्देशीय ज्ञान देने वाली है। विवेक कॉलेज बिजनौर के कानून विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पुष्पा जोशी का कहना है कि नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा को बच्चे की मातृभाषा में दिया जाने का संकल्प अनूठा प्रयास है। इससे पढ़ाई बोझ नहीं होगी। राष्ट्रीय स्तर पर समान शिक्षा नीति से सभी राज्यों के युवा एक दूसरे से जुड़कर बेहतर शैक्षिक परिणाम देंगे।
ये है प्रमुख दस बदलाव
1- नई शिक्षा नीति को एकेडमिक, व्यावसायिक तथा शोध तीन भागों में बांटा गया है।
2- छात्रों को रुचि के अनुसार कोर्स चुनने की स्वतंत्रता।
3- नई शिक्षा नीति में 10+2+3 फार्मेट पूरी तरह बदल कर 5+3+3+4 कर दिया गया है।
4- प्राथमिक अर्थात कक्षा पांच तक पढ़ाई बच्चों की मातृभाषा में।
5- व्यवसायिक अर्थात तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा।
6- स्नातक के अलग-अलग वर्ष में सर्टिफिकेट देने की व्यवस्था। युवाओं को पढ़ाई के साथ नौकरी के अवसर।
7- प्रयोगात्मक पहलू अर्थात करो व सीखो की नीति पर जोर।
8- युवाओं को शैक्षिक प्रतिद्वंद्विता के लिए अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्म की तैयारी पर जोर।
9- नई शिक्षा नीति में शोध के अवसर अधिक।
10- नई शिक्षा नीति में कॅरिअर विकल्प चुनने के अधिक अवसर।
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बिजनौर। नई शिक्षा नीति लागू हो गई है। जिससे शिक्षा के क्षेत्र में नए युग का सूत्रपात हुआ है। नई नीति में सभी को शिक्षा के समान अवसर दिए गए हैं। शिक्षा को रोजगार परक बनाया गया है। युवाओं के लिए कॅरिअर विकल्प चुनने के अधिक अवसर हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में करीब 34 साल बाद बदलाव हुआ है। नीति में सभी को शिक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर दिए गए हैं। शिक्षाविद डॉ. मुकेश कुमार के अनुसार वर्ष 2020 में लागू नई शिक्षा नीति के सकारात्मक परिणाम की झलक मिलने लगी है। युवाओं को मैकाले की बाबू बनाओ नीति से निकालकर स्वदेशी स्वावलंबन की ओर बढ़ाने का प्रयास है। नई शिक्षा नीति में शिक्षा को प्राथमिक शिक्षा से लेकर शोध शिक्षा तक राष्ट्रीय आवश्यकताओं से जोड़ा गया है। शिक्षा लोक कल्याण पर आधारित है। बहुउद्देशीय ज्ञान देने वाली है। विवेक कॉलेज बिजनौर के कानून विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पुष्पा जोशी का कहना है कि नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा को बच्चे की मातृभाषा में दिया जाने का संकल्प अनूठा प्रयास है। इससे पढ़ाई बोझ नहीं होगी। राष्ट्रीय स्तर पर समान शिक्षा नीति से सभी राज्यों के युवा एक दूसरे से जुड़कर बेहतर शैक्षिक परिणाम देंगे।
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ये है प्रमुख दस बदलाव
1- नई शिक्षा नीति को एकेडमिक, व्यावसायिक तथा शोध तीन भागों में बांटा गया है।
2- छात्रों को रुचि के अनुसार कोर्स चुनने की स्वतंत्रता।
3- नई शिक्षा नीति में 10+2+3 फार्मेट पूरी तरह बदल कर 5+3+3+4 कर दिया गया है।
4- प्राथमिक अर्थात कक्षा पांच तक पढ़ाई बच्चों की मातृभाषा में।
5- व्यवसायिक अर्थात तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा।
6- स्नातक के अलग-अलग वर्ष में सर्टिफिकेट देने की व्यवस्था। युवाओं को पढ़ाई के साथ नौकरी के अवसर।
7- प्रयोगात्मक पहलू अर्थात करो व सीखो की नीति पर जोर।
8- युवाओं को शैक्षिक प्रतिद्वंद्विता के लिए अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्म की तैयारी पर जोर।
9- नई शिक्षा नीति में शोध के अवसर अधिक।
10- नई शिक्षा नीति में कॅरिअर विकल्प चुनने के अधिक अवसर।