फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Epilepsy will be cured by medicines, not by smelling shoes and stockings

जूता-मोजा सुंघाने से नहीं, दवाओं से ठीक होगी मिर्गी

Sun, 13 Feb 2022 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Feb 2022 11:54 PM IST
विज्ञापन
Epilepsy will be cured by medicines, not by smelling shoes and stockings
जूता-मोजा सुंघाने से नहीं, दवाओं से ठीक होगी मिर्गी
विज्ञापन

बिजनौर। अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस हर साल फरवरी के दूसरे सोमवार को मनाया जाता है। इसे न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर भी कहा जाता है। जो लोग मिर्गी से ग्रसित है, उन्हें सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। इसका मुख्य कारण लोगों में अंधविश्वास ज्यादा होना है। लोग मिर्गी के दौरे को भूत-प्रेत का साया समझ तंत्र-मंत्र से इलाज कराते हैं, जिससे मरीज की हालत ठीक होने के बजाय बिगड़ जाती है। चिकित्सक के पास ले जाने के बजाये लोग मरीज को जूता-मोजा सुंघाने लगते हैं। जिला अस्पताल में रोजाना मिर्गी के पांच से दस मरीज आते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अभी भी अंधविश्वास में डूबे हुए हैं। जब किसी को मिर्गी का दौरा पड़ता है तो लोग उसे तंत्र-मंत्र से ठीक कराने के लिए बाबाओं के पास ले जाते हैं। इससे मरीज की परेशानी बढ़ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज का सिटी स्कैन कर उपचार किया जाता है, जिसके बाद मरीज को दवा दी जाती है। वहीं अगर मरीज की हालत ज्यादा गंभीर होती है तो उसे मेरठ मेडिकल के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में एमआरआई और ईईजी करने के लिए साधन नहीं हैं, जिसके चलते मरीज की हालत गंभीर होने पर रेफर कर दिया जाता है।
विज्ञापन

मिर्गी के मरीज को होती हैं ये परेशानी
मिर्गी के मरीज के सिर में तेज दर्द होती है, उसे बार-बार सिर पटकने को मन करता है।
मिर्गी के मरीज को चक्कर आता है।
मरीज को बार-बार उल्टी आती है।
मिर्गी का दौरा पड़ने के ये हैं कारण
कैल्सीफायड ग्रेन्युलोमा के कारण दौरा पड़ता है।
न्यूरोसिटी कारगों होने से मिर्गी का दौरा पड़ता है।
ब्रेन टीवी होने से भी किसी व्यक्ति को दौरे पड़ने लगते हैं।
सरकोइडोसिस की समस्या होने से भी मिर्गी के दौरे पड़ते हैं।
वर्जन....
जिला अस्पताल में रोजाना पांच से दस मरीज मिर्गी के आते हैं, जिन्हें सिटी स्कैन कर दवा दी जाती है। जिला अस्पताल में एमआरआई और ईईजी करने के लिए साधन नहीं है। हालांकि ज्यादातर मरीज दवा से ही ठीक हो जाते हैं, जिनमें कारण का पता चल जाता है कि किस कारण से दौरे पड़ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

- डॉ. आरएस वर्मा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed