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दुष्यंत कुमार पुस्तकालय एंव सांस्कृतिक केन्द्र
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जनता को समर्पित किया दुष्यंत कुमार पुस्तकालय
बिजनौर। पक गई है आदतें, बातों से सर होंगी नहीं, कोई हंगामा करो, ऐसे गुजर होगी नहीं...हिंदी गजलकार एवं कवि दुष्यंत कुमार की इन लाइनों के साथ ही उनके नाम पर तैयार हुआ पुस्तकालय जनता को समर्पित कर दिया गया। अब तक वादों, मांग और आश्वासनों तक सिमटा पुस्तकालय अब धरातल पर उतर गया। सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के पास दुष्यंत कुमार पुस्तकालय एवं सांस्कृतिक केंद्र का मंगलवार को मुरादाबाद मंडलायुक्त आंजनेय कुमार, जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने फीता काटकर उद्घाटन कर दिया।
जिले में लंबे समय से दुष्यंत कुमार के नाम पर जिला मुख्यालय पर पुस्तकालय और संग्रहालय बनाने की मांग चली आ रही थी। मंगलवार को उद्घाटन के मौके पर मौजूद साहित्यकार और प्रबुद्ध जनों ने प्रशासन की इस प्रयास की सराहना की। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार ने कहा कि युवाओं के बौद्धिक विकास के लिए किताबें वरदान हैं, जिनका अध्ययन करके युवा वर्ग अपने भविष्य को उज्ज्वल और वैभवशाली बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट के आधुनिक दौर के बावजूद किताबों की अहमियत किसी भी प्रकार से कम नहीं हुई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस स्थान को साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक केन्द्र के रूप में विकसित करें, ताकि शहर और आसपास के क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिल सकें।
डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि जब वह बिजनौर आए तो दुष्यंत कुमार के नाम पर यहां कोई धरोहर न होने से अचंभित थे। इसके बाद जिला पुस्तकालय को उन्हें समर्पित करने की योजना बनानी शुरू कर दी, जो आज अंजाम तक पहुंच चुकी है। कहा कि इस लाइब्रेरी के निर्माण का उद्देश्य जहां, यहां के लोगों को जिले के गौरवशाली साहित्यिक इतिहास से परिचित कराना है, वहीं स्थानीय युवाओं के लिए प्रतियोगात्मक परीक्षाओं की तैयारी के लिए पर्याप्त संख्या में पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराना है। उन्होंने बिजनौर जिले के बहुत से स्थानों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का निरंतर रूप से प्रयास करने की बात कही। इस मौके पर सीडीओ केपी सिंह, डीएफओ डॉ.अनिल पटेल, एसडीएम सदर विक्रमादित्य सिंह मलिक, तहसीलदार सदर प्रीति सिंह व जिले के साहित्यकार व प्रबुद्धजन मौजूद रहे।
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जनसहयोग से पूरा हुआ निर्माण : एसडीएम
एसडीएम सदर विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि हमें इस पुस्तकालय के जीर्णोद्धार व नए भवन के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। हमने जनसहयोग के माध्यम से इसका निर्माण पूरा कराया। साथ ही यहां पर गौरवशाली साहित्य से संबंधित पुस्तकें, युवाओं को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने के लिए पुस्तकें आदि भी उपलब्ध कराई गई हैं।
छह करोड़ से पैतृक गांव में तैयार होगा संग्रहालय
पुस्तकालय के उद्घाटन के मौके पर डीएम उमेश मिश्रा ने बताया कि कवि दुष्यंत कुमार के पैतृक गांव राजपुर नवादा में संग्रहालय बनाने के लिए करीब छह करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है। इस गांव तक पहुंचने वाली सड़क का नाम भी दुष्यंत कुमार के नाम पर रहेगा। संग्रहालय का थ्री डी नक्शा पहले ही तैयार हो चुका है। इसे भव्य तरीके से तैयार किया जाएगा।
रंग लाई अमर उजाला की मुहिम
अमर उजाला ने पिछले वर्ष ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के दौरान ही दुष्यंत कुमार के नाम पर पुस्तकालय और संग्रहालय का मुद्दा उठाया था। डीएम उमेश मिश्रा को भी इस अभियान में शामिल किया गया तो यह मुहिम आगे बढ़ने लगी। दुष्यंत कुमार पुस्तकालय एवं सांस्कृतिक केंद्र के उद्घाटन के साथ ही यह मुहिम सफल हो गई।
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खुश हूं, अपने जिले ने दिया सम्मान : आलोक त्यागी
भोपाल में रह रहे कवि दुष्यंत कुमार के बड़े बेटे आलोक त्यागी ने दुष्यंत कुमार पुस्तकालय और सांस्कृतिक केंद्र के उद्घाटन पर जिलेवासियों को बधाई दी। साथ ही इस अभियान को सफल बनाने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को भी धन्यवाद दिया। कहा कि यह जानकर खुशी हुई कि अपने जिले में भी उन्हें अब भोपाल जैसा सम्मान मिलना शुरू हो गया है।
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बिजनौर। पक गई है आदतें, बातों से सर होंगी नहीं, कोई हंगामा करो, ऐसे गुजर होगी नहीं...हिंदी गजलकार एवं कवि दुष्यंत कुमार की इन लाइनों के साथ ही उनके नाम पर तैयार हुआ पुस्तकालय जनता को समर्पित कर दिया गया। अब तक वादों, मांग और आश्वासनों तक सिमटा पुस्तकालय अब धरातल पर उतर गया। सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के पास दुष्यंत कुमार पुस्तकालय एवं सांस्कृतिक केंद्र का मंगलवार को मुरादाबाद मंडलायुक्त आंजनेय कुमार, जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने फीता काटकर उद्घाटन कर दिया।
जिले में लंबे समय से दुष्यंत कुमार के नाम पर जिला मुख्यालय पर पुस्तकालय और संग्रहालय बनाने की मांग चली आ रही थी। मंगलवार को उद्घाटन के मौके पर मौजूद साहित्यकार और प्रबुद्ध जनों ने प्रशासन की इस प्रयास की सराहना की। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार ने कहा कि युवाओं के बौद्धिक विकास के लिए किताबें वरदान हैं, जिनका अध्ययन करके युवा वर्ग अपने भविष्य को उज्ज्वल और वैभवशाली बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट के आधुनिक दौर के बावजूद किताबों की अहमियत किसी भी प्रकार से कम नहीं हुई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस स्थान को साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक केन्द्र के रूप में विकसित करें, ताकि शहर और आसपास के क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिल सकें।
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डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि जब वह बिजनौर आए तो दुष्यंत कुमार के नाम पर यहां कोई धरोहर न होने से अचंभित थे। इसके बाद जिला पुस्तकालय को उन्हें समर्पित करने की योजना बनानी शुरू कर दी, जो आज अंजाम तक पहुंच चुकी है। कहा कि इस लाइब्रेरी के निर्माण का उद्देश्य जहां, यहां के लोगों को जिले के गौरवशाली साहित्यिक इतिहास से परिचित कराना है, वहीं स्थानीय युवाओं के लिए प्रतियोगात्मक परीक्षाओं की तैयारी के लिए पर्याप्त संख्या में पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराना है। उन्होंने बिजनौर जिले के बहुत से स्थानों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का निरंतर रूप से प्रयास करने की बात कही। इस मौके पर सीडीओ केपी सिंह, डीएफओ डॉ.अनिल पटेल, एसडीएम सदर विक्रमादित्य सिंह मलिक, तहसीलदार सदर प्रीति सिंह व जिले के साहित्यकार व प्रबुद्धजन मौजूद रहे।
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जनसहयोग से पूरा हुआ निर्माण : एसडीएम
एसडीएम सदर विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि हमें इस पुस्तकालय के जीर्णोद्धार व नए भवन के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। हमने जनसहयोग के माध्यम से इसका निर्माण पूरा कराया। साथ ही यहां पर गौरवशाली साहित्य से संबंधित पुस्तकें, युवाओं को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने के लिए पुस्तकें आदि भी उपलब्ध कराई गई हैं।
छह करोड़ से पैतृक गांव में तैयार होगा संग्रहालय
पुस्तकालय के उद्घाटन के मौके पर डीएम उमेश मिश्रा ने बताया कि कवि दुष्यंत कुमार के पैतृक गांव राजपुर नवादा में संग्रहालय बनाने के लिए करीब छह करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है। इस गांव तक पहुंचने वाली सड़क का नाम भी दुष्यंत कुमार के नाम पर रहेगा। संग्रहालय का थ्री डी नक्शा पहले ही तैयार हो चुका है। इसे भव्य तरीके से तैयार किया जाएगा।
रंग लाई अमर उजाला की मुहिम
अमर उजाला ने पिछले वर्ष ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के दौरान ही दुष्यंत कुमार के नाम पर पुस्तकालय और संग्रहालय का मुद्दा उठाया था। डीएम उमेश मिश्रा को भी इस अभियान में शामिल किया गया तो यह मुहिम आगे बढ़ने लगी। दुष्यंत कुमार पुस्तकालय एवं सांस्कृतिक केंद्र के उद्घाटन के साथ ही यह मुहिम सफल हो गई।
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खुश हूं, अपने जिले ने दिया सम्मान : आलोक त्यागी
भोपाल में रह रहे कवि दुष्यंत कुमार के बड़े बेटे आलोक त्यागी ने दुष्यंत कुमार पुस्तकालय और सांस्कृतिक केंद्र के उद्घाटन पर जिलेवासियों को बधाई दी। साथ ही इस अभियान को सफल बनाने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को भी धन्यवाद दिया। कहा कि यह जानकर खुशी हुई कि अपने जिले में भी उन्हें अब भोपाल जैसा सम्मान मिलना शुरू हो गया है।