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सपने पूरे करने को घर में बना ली शूटिंग रेंज
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Fri, 03 Mar 2017 12:35 AM IST
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बिजनौर में निशानेबाजी करती शूटर आकांक्षा चौधरी।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में अगर कुछ करने की लगन हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं हैं। स्वाहेड़ी की आकांक्षा चौधरी ने ये बात साबित कर दी है। एक साल की कड़ी मेहनत से शूटिंग में शानदार प्रदर्शन कर वर्ल्ड कप में एंट्री की दहलीज पर खड़ी आकांक्षा एक ही साल में शूटिंग में तीन मेडल जीत चुकी है। सीनियर स्टैंडिंग पोजीशन 10 मीटर एयर रायफल में देश की पहली महिला शूटर आकांक्षा का सपना वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीतना है। अपना प्रदर्शन और निखारने के लिए आकांक्षा ने घर पर ही शूटिंग रेंज बनवाना शुरू कर दिया है।
गांव स्वाहेड़ी निवासी आकांक्षा दिव्यांग है। बचपन में उसे निशानेबाजी का शौक था, लेकिन जिले में कोई शूटिंग रेंज नहीं थी। बिजनौर के नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में इनडोर शूटिंग रेंज खुला तो वह रेंज में जाने लगी। एक ही साल में आकांक्षा में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लिया। तीन प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल और एक में सिल्वर मेडल जीता। शानदार प्रदर्शन कर रही आकांक्षा का वर्ल्ड कप में सलेक्शन पक्का माना जा रहा है। बैंक में कार्यरत आकांक्षा का स्कोर 400 में से 398 है, जबकि वर्ल्ड रिकॉर्ड 410 का है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पुणे में आकांक्षा ओलंपिक में शूटिंग में मेडल जीतने वाले गगन नारंग की शूटिंग रेंज गई। वहां उन्होंने प्रैक्टिस करने की इच्छा जताई तो एक साल का खर्च करीब दस लाख रुपये बताया गया। इस पर आकांक्षा ने अपने घर ही प्रैक्टिस करने का निर्णय लिया और शूटिंग रेंज बनवा ली। आकांक्षा के अनुसार शूटिंग रेंज में दो लाख से ज्यादा रुपये लग जाएंगे। इस समय रेंज निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है। रेंज बनने के बाद वह शूटिंग पर और ज्यादा फोकस करेगी।
अरूणिमा सिन्हा से है दोस्ती
माउंट एवरेस्ट पर अपनी हिम्मत का झंडा लहराने वाली दिव्यांग अरूणिमा सिन्हा आकांक्षा चौधरी की दोस्त हैं। अरूणिमा सिन्हा आकांक्षा को प्रोत्साहित करती रहती हैं। वे भी अब आकांक्षा की तरह शूटिंग में हाथ आजमाने की तैयारी कर रही हैं।
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तीन गोल्ड, एक सिल्वर मेडल जीता
आकांक्षा प्री स्टेट सीनियर शूटिंग प्रतियोगिता, दिल्ली में आयोजित स्टेट सीनियर शूटिंग प्रतियोगिता, दिल्ली में आयोजित प्री नेशनल शूटिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीत चुकी है। पुणे में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में आकांक्षा ने सिल्वर मेडल झटका है।
भाई करते हैं प्रोत्साहित
आकांक्षा के पास खुद की एयर रायफल है। उसकी कीमत करीब सवा दो लाख रुपये है। आकांक्षा के भाई मोहित और रोहित भी उसे प्रोत्साहित करती हैं।
देश के लिए जीतना है गोल्ड: आकांक्षा
आकांक्षा के अनुसार वह वर्ल्ड कप और पैरा ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहती है। खुद को निखारने के लिए वह घर पर शूटिंग रेंज बनवा रही है। गोल्ड मेडल जीतने के लिए वह जीतोड़ मेहनत कर रही है।
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गांव स्वाहेड़ी निवासी आकांक्षा दिव्यांग है। बचपन में उसे निशानेबाजी का शौक था, लेकिन जिले में कोई शूटिंग रेंज नहीं थी। बिजनौर के नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में इनडोर शूटिंग रेंज खुला तो वह रेंज में जाने लगी। एक ही साल में आकांक्षा में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लिया। तीन प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल और एक में सिल्वर मेडल जीता। शानदार प्रदर्शन कर रही आकांक्षा का वर्ल्ड कप में सलेक्शन पक्का माना जा रहा है। बैंक में कार्यरत आकांक्षा का स्कोर 400 में से 398 है, जबकि वर्ल्ड रिकॉर्ड 410 का है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पुणे में आकांक्षा ओलंपिक में शूटिंग में मेडल जीतने वाले गगन नारंग की शूटिंग रेंज गई। वहां उन्होंने प्रैक्टिस करने की इच्छा जताई तो एक साल का खर्च करीब दस लाख रुपये बताया गया। इस पर आकांक्षा ने अपने घर ही प्रैक्टिस करने का निर्णय लिया और शूटिंग रेंज बनवा ली। आकांक्षा के अनुसार शूटिंग रेंज में दो लाख से ज्यादा रुपये लग जाएंगे। इस समय रेंज निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है। रेंज बनने के बाद वह शूटिंग पर और ज्यादा फोकस करेगी।
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अरूणिमा सिन्हा से है दोस्ती
माउंट एवरेस्ट पर अपनी हिम्मत का झंडा लहराने वाली दिव्यांग अरूणिमा सिन्हा आकांक्षा चौधरी की दोस्त हैं। अरूणिमा सिन्हा आकांक्षा को प्रोत्साहित करती रहती हैं। वे भी अब आकांक्षा की तरह शूटिंग में हाथ आजमाने की तैयारी कर रही हैं।
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तीन गोल्ड, एक सिल्वर मेडल जीता
आकांक्षा प्री स्टेट सीनियर शूटिंग प्रतियोगिता, दिल्ली में आयोजित स्टेट सीनियर शूटिंग प्रतियोगिता, दिल्ली में आयोजित प्री नेशनल शूटिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीत चुकी है। पुणे में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में आकांक्षा ने सिल्वर मेडल झटका है।
भाई करते हैं प्रोत्साहित
आकांक्षा के पास खुद की एयर रायफल है। उसकी कीमत करीब सवा दो लाख रुपये है। आकांक्षा के भाई मोहित और रोहित भी उसे प्रोत्साहित करती हैं।
देश के लिए जीतना है गोल्ड: आकांक्षा
आकांक्षा के अनुसार वह वर्ल्ड कप और पैरा ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना चाहती है। खुद को निखारने के लिए वह घर पर शूटिंग रेंज बनवा रही है। गोल्ड मेडल जीतने के लिए वह जीतोड़ मेहनत कर रही है।