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नेत्रदान के प्रेरणाश्रोत बने हुए हैं नेत्र चिकित्सक विशाल
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चांदपुर के नेत्र चिकित्सक डा.विशाल।
- फोटो : BIJNOR
नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे डा. विशाल
चांदपुर। आंख सबसे महत्वपूर्ण अंग है। हर साल किसी न किसी वजह से लाखों लोग अपनी आंखें गंवा बैठते हैं। ये लोग फिर से इस खूबसूरत दुनिया को देख सकते हैं, अगर हम और आप सब मिलकर इनकी मदद करें तो। मरणोपरांत नेत्रदान से हम इन लोगों की मदद कर सकते हैं। नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। हर साल लाखों लोगों की किसी ने किसी कारण से मौत हो जाती है। जीवित रहते उनका एक परोपकारी फैसला मरणोपरांत इन जरूरतमंदों के लिए रोशनी की किरण बन सकता है। इंसान मर कर भी दूसरे के जीवन को रोशन कर सकता है।
चांदपुर निवासी 40 वर्षीय नेत्र चिकित्सक विशाल मित्तल नेत्रदान करने वालों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। डा. विशाल पांच सालों से लोगों को नेत्रदान के प्रति प्रेरित कर रहे हैं। जब कोई मरीज उनके पास आंख की जांच या इलाज कराने जाता है तो वे उसे नेत्रदान के लिए प्रेरित करते हैं। नेत्रदान करने के फायदे बताते हैं। उनके इस प्रयास का असर दिखाई भी दे रहा है। 2010 से अब तक वे करीब 18 लोगों से नेत्रदान करा चुके हैं। उन्होंने बताया कि वे अब तक करीब पांच सौ लोगों को मरणोपरांत नेत्रदान के लिए प्रेरित कर चुके हैं। इनमें से करीब तीन सौ लोग पंजीकरण भी करा चुके हैं। यदि किसी व्यक्ति का कॉर्निया स्वस्थ है तो दो से लेकर चार लोगों का जीवन रोशन हो सकता है। डा. विशाल ने बताया कि उन्हें नेत्रदान कराने की प्रेरण सीएल गुप्ता आई बैैंक वेलफेयर सोसाइटी मुरादाबाद के सचिव सरदार गुरवेंद्र सिंह से मिली। वे नेत्रदान कराने के लिए चांदपुर आए थे। उन्होंने नेत्र दान को महादान बताया था। जीवित रहते रक्तदान और मरणोपरांत नेत्रदान। उनकी बात से प्रेरणा लेकर पिछले पांच साल से लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
आती है मुरादाबाद से चिकित्सकों की टीम
डा. विशाल ने बताया कि नेत्रदान कराने के लिए आई बैैंक वेलफेयर सोसाइटी मुरादाबाद की मदद ली जाती है। नेत्रदान के लिए पंजीकृत व्यक्ति की मौत के बाद सूचना मिलने पर आई बैैंक वेलफेयर सोसाइटी मुरादाबाद से चिकित्सकों की टीम आती है। इस प्रक्रिया में करीब 15 मिनट का समय लगता है। मौत के छह घंटे के भीतर मृतक की आंख से कार्निया निकाला जा सकता है तथा 72 घंटे के भीतर जरूरतमंद की आंखें में लगाया जाता है।
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आंखों को स्वस्थ रखने के उपाय
उन्होंने नेत्रदान के लिए आंखों को स्वस्थ रखने के सुझाव दिए। उन्होंने आहार में अधिक मात्रा में हरी सब्जियों तथा फलों को सेवन करने तथा धूम्रपान नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सूर्योदय से पहले उठकर आंखों पर 20-25 बार छींटा मारें। नजर गड़ाकर तथा तेज धूप में किसी वस्तु को न देखें। कम रोशनी में पढ़ाई न करें। नींद, आंखों में भारीपन, जलन या थकान महसूस होने पर काम को तत्काल बंद कर आंखों को थोड़ा विश्राम दें। आंख को हमेशा धूल, धुआं व तेज हवा से बचाएं। अगर लगातार आंखों से काम ले रहे हों तो बीच में एक-दोबार आंख बंद कर आंखों पर हथेलियां हल्के दबाव के साथ रखें तथा नियमित व्यायाम करें।
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चांदपुर। आंख सबसे महत्वपूर्ण अंग है। हर साल किसी न किसी वजह से लाखों लोग अपनी आंखें गंवा बैठते हैं। ये लोग फिर से इस खूबसूरत दुनिया को देख सकते हैं, अगर हम और आप सब मिलकर इनकी मदद करें तो। मरणोपरांत नेत्रदान से हम इन लोगों की मदद कर सकते हैं। नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। हर साल लाखों लोगों की किसी ने किसी कारण से मौत हो जाती है। जीवित रहते उनका एक परोपकारी फैसला मरणोपरांत इन जरूरतमंदों के लिए रोशनी की किरण बन सकता है। इंसान मर कर भी दूसरे के जीवन को रोशन कर सकता है।
चांदपुर निवासी 40 वर्षीय नेत्र चिकित्सक विशाल मित्तल नेत्रदान करने वालों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। डा. विशाल पांच सालों से लोगों को नेत्रदान के प्रति प्रेरित कर रहे हैं। जब कोई मरीज उनके पास आंख की जांच या इलाज कराने जाता है तो वे उसे नेत्रदान के लिए प्रेरित करते हैं। नेत्रदान करने के फायदे बताते हैं। उनके इस प्रयास का असर दिखाई भी दे रहा है। 2010 से अब तक वे करीब 18 लोगों से नेत्रदान करा चुके हैं। उन्होंने बताया कि वे अब तक करीब पांच सौ लोगों को मरणोपरांत नेत्रदान के लिए प्रेरित कर चुके हैं। इनमें से करीब तीन सौ लोग पंजीकरण भी करा चुके हैं। यदि किसी व्यक्ति का कॉर्निया स्वस्थ है तो दो से लेकर चार लोगों का जीवन रोशन हो सकता है। डा. विशाल ने बताया कि उन्हें नेत्रदान कराने की प्रेरण सीएल गुप्ता आई बैैंक वेलफेयर सोसाइटी मुरादाबाद के सचिव सरदार गुरवेंद्र सिंह से मिली। वे नेत्रदान कराने के लिए चांदपुर आए थे। उन्होंने नेत्र दान को महादान बताया था। जीवित रहते रक्तदान और मरणोपरांत नेत्रदान। उनकी बात से प्रेरणा लेकर पिछले पांच साल से लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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आती है मुरादाबाद से चिकित्सकों की टीम
डा. विशाल ने बताया कि नेत्रदान कराने के लिए आई बैैंक वेलफेयर सोसाइटी मुरादाबाद की मदद ली जाती है। नेत्रदान के लिए पंजीकृत व्यक्ति की मौत के बाद सूचना मिलने पर आई बैैंक वेलफेयर सोसाइटी मुरादाबाद से चिकित्सकों की टीम आती है। इस प्रक्रिया में करीब 15 मिनट का समय लगता है। मौत के छह घंटे के भीतर मृतक की आंख से कार्निया निकाला जा सकता है तथा 72 घंटे के भीतर जरूरतमंद की आंखें में लगाया जाता है।
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आंखों को स्वस्थ रखने के उपाय
उन्होंने नेत्रदान के लिए आंखों को स्वस्थ रखने के सुझाव दिए। उन्होंने आहार में अधिक मात्रा में हरी सब्जियों तथा फलों को सेवन करने तथा धूम्रपान नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सूर्योदय से पहले उठकर आंखों पर 20-25 बार छींटा मारें। नजर गड़ाकर तथा तेज धूप में किसी वस्तु को न देखें। कम रोशनी में पढ़ाई न करें। नींद, आंखों में भारीपन, जलन या थकान महसूस होने पर काम को तत्काल बंद कर आंखों को थोड़ा विश्राम दें। आंख को हमेशा धूल, धुआं व तेज हवा से बचाएं। अगर लगातार आंखों से काम ले रहे हों तो बीच में एक-दोबार आंख बंद कर आंखों पर हथेलियां हल्के दबाव के साथ रखें तथा नियमित व्यायाम करें।