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गंगा में फिर से शुरू होगी डॉल्फिन की गणना
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गंगा में फिर से शुरू होगी डॉल्फिन की गणना
बिजनौर। गंगा में डॉल्फिन की गणना के लिए फिर से अभियान चलाया जाएगा। देखा जाएगा कि गंगा में डॉल्फिन की संख्या में कितना इजाफा इस साल भी जारी रहता है या नहीं। इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम इसी माह फिर से गणना करेगी। गणना के आधार पर ही डॉल्फिन के संरक्षण के लिए काम किया जाता है।
गंगा में डॉल्फिन की संख्या में पिछले कुछ सालों से लगातार इजाफा हुआ है। डॉल्फिन पानी से बाहर आते हुए अजीब सी आवाज निकालती है, इसलिए डॉल्फिन की गणना से जुड़े अभियान का नाम इसी आवाज के आधार पर ‘मेरी गंगा, मेरी सूंस’ रखा गया है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइल्ड फंड) के प्रतिनिधियों द्वारा बिजनौर में गंगा बैराज से डॉल्फिन की गणना शुरू होती है, जो बुलंदशहर में नरौरा तक 177 किमी धारा में होती है। कुछ साल पहले तक गंगा में 22 डॉल्फिन ही थी, जिसकी संख्या पिछले साल बढ़कर 41 हो गई थी। जिले में गंगा नदी की धारा में भी काफी डॉल्फिन दिखी थी। इस माह फिर से डॉल्फिन की गणना के लिए अभियान चलाया जाएगा। असल में डॉल्फिन की गणना पिछले माह अक्तूबर में होनी थी, लेकिन पहाड़ों पर हुई बारिश की वजह से गंगा का जलस्तर बहुत बढ़ गया था। गंगा में बाढ़ जैसे हालात थे। इस वजह से अक्तूबर में गणना नहीं की गई थी।
साल-दर-साल डॉल्फिनों की संख्या पर एकनजर
साल डॉल्फिन
2015 22
2016 30
2017 32
2018 33
2019 35
2020 41
नोट: आंकड़े डब्ल्यूडब्ल्यूएफ से लिए गए हैं।
तरंगों से करती है शिकार
गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन को गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन कहते हैं। यह समंदर में मिलने वाली डॉल्फिन से अलग होती हैं। गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन अंधी होती हैं। ये गंगा में मछलियां खाती हैं और अपने रडार सिस्टम से निकलने वाली तरंगों से शिकार की पहचान कर उसे पकड़ती हैं। मादा डॉल्फिन की लंबाई पौने दो मीटर तक होती है। नर डॉल्फिन मादा से छोटा होता है।
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सामाजिक प्राणी हैं डॉल्फिन
गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन सामाजिक प्राणी होती हैं। यह कभी कभी नाव या पानी में तैरने वाले मनुष्यों पास आकर उनके साथ तैरने लगती हैं। यह आक्रामक प्रवृत्ति की नहीं होती हैं और मनुष्य पर हमला नहीं करती हैं।
वर्जन
गंगा में डॉल्फिन की गणना जल्द ही शुरू की जाएगी। इसके लिए तिथि अभी निर्धारित नहीं की गई हैं।
- शाहनवाज खान, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ कोआर्डिनेटर
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बिजनौर। गंगा में डॉल्फिन की गणना के लिए फिर से अभियान चलाया जाएगा। देखा जाएगा कि गंगा में डॉल्फिन की संख्या में कितना इजाफा इस साल भी जारी रहता है या नहीं। इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम इसी माह फिर से गणना करेगी। गणना के आधार पर ही डॉल्फिन के संरक्षण के लिए काम किया जाता है।
गंगा में डॉल्फिन की संख्या में पिछले कुछ सालों से लगातार इजाफा हुआ है। डॉल्फिन पानी से बाहर आते हुए अजीब सी आवाज निकालती है, इसलिए डॉल्फिन की गणना से जुड़े अभियान का नाम इसी आवाज के आधार पर ‘मेरी गंगा, मेरी सूंस’ रखा गया है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइल्ड फंड) के प्रतिनिधियों द्वारा बिजनौर में गंगा बैराज से डॉल्फिन की गणना शुरू होती है, जो बुलंदशहर में नरौरा तक 177 किमी धारा में होती है। कुछ साल पहले तक गंगा में 22 डॉल्फिन ही थी, जिसकी संख्या पिछले साल बढ़कर 41 हो गई थी। जिले में गंगा नदी की धारा में भी काफी डॉल्फिन दिखी थी। इस माह फिर से डॉल्फिन की गणना के लिए अभियान चलाया जाएगा। असल में डॉल्फिन की गणना पिछले माह अक्तूबर में होनी थी, लेकिन पहाड़ों पर हुई बारिश की वजह से गंगा का जलस्तर बहुत बढ़ गया था। गंगा में बाढ़ जैसे हालात थे। इस वजह से अक्तूबर में गणना नहीं की गई थी।
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साल-दर-साल डॉल्फिनों की संख्या पर एकनजर
साल डॉल्फिन
2015 22
2016 30
2017 32
2018 33
2019 35
2020 41
नोट: आंकड़े डब्ल्यूडब्ल्यूएफ से लिए गए हैं।
तरंगों से करती है शिकार
गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन को गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन कहते हैं। यह समंदर में मिलने वाली डॉल्फिन से अलग होती हैं। गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन अंधी होती हैं। ये गंगा में मछलियां खाती हैं और अपने रडार सिस्टम से निकलने वाली तरंगों से शिकार की पहचान कर उसे पकड़ती हैं। मादा डॉल्फिन की लंबाई पौने दो मीटर तक होती है। नर डॉल्फिन मादा से छोटा होता है।
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सामाजिक प्राणी हैं डॉल्फिन
गेंगेटिक रीवर डॉल्फिन सामाजिक प्राणी होती हैं। यह कभी कभी नाव या पानी में तैरने वाले मनुष्यों पास आकर उनके साथ तैरने लगती हैं। यह आक्रामक प्रवृत्ति की नहीं होती हैं और मनुष्य पर हमला नहीं करती हैं।
वर्जन
गंगा में डॉल्फिन की गणना जल्द ही शुरू की जाएगी। इसके लिए तिथि अभी निर्धारित नहीं की गई हैं।
- शाहनवाज खान, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ कोआर्डिनेटर