{"_id":"61e701af3b0046049c6be10d","slug":"dhampur-assembly-the-game-of-checkmate-will-be-tough-on-the-electoral-board-bijnor-news-mrt5738779136","type":"story","status":"publish","title_hn":"धामपुर विधानसभा: चुनावी बिसात पर कड़ा रहेगा शह-मात का खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धामपुर विधानसभा: चुनावी बिसात पर कड़ा रहेगा शह-मात का खेल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रजनीश त्यागी
बिजनौर। धामपुर विधानसभा सीट की चुनावी बिसात पर शह और मात का खेल कड़ा होने की संभावना है। पिछले आठ विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो हर बार मुकाबला कड़ा ही रहता है। साल 2002 के चुनाव से इस सीट का मिजाज हर बार बदला-बदला ही नजर आता रहा है, लेकिन इस बार सभी दल समीकरण उनके पक्ष में होने का दावा करते नजर आ रहे हैं। दो दशकों का इतिहास देखें तो सिर्फ दो ठाकुरों के बीच ही दो दशक से चुनावी जंग चल रही है। हालांकि इस बार जनता का रुख क्या होगा, यह तो चुनाव परिणाम की तय करेंगे।
साल 1957 में धामपुर विधानसभा सीट पर पहली बार चुनाव हुआ था। उस वक्त कांग्रेस के उम्मीदवार खूब सिंह विधायक चुने गए खूब सिंह लगातार दो बार विधायक बने। 1967 में विधायक गोविंद सहाय बन गए लेकिन सीट कांग्रेस के कब्जे में ही रही। कांग्रेस के विरोध में लहर चली तो 1969 में बीकेडी के सत्तार अहमद विधायक बन गए। हालांकि 1974 में सत्तार अहमद फिर से विधायक बने कांग्रेस के टिकट पर। 1985 के चुनाव में कांग्रेस ने फिर वापसी की लेकिन इसके बाद कांग्रेस धामपुर सीट पर दोबारा जीत हासिल नहीं कर पाई।
रामलहर के दौरान 1989 में भाजपा के टिकट पर सुरेंद्र सिंह विधायक बने। 1996 में इस सीट पर सपा के मूलचंद चौहान पहली बार विधायक चुने गए। साल 2002 के चुनाव से ही इस सीट पर लगातार बदलाव होना लगा। 2007 में बसपा के टिकट पर अशोक कुमार राणा विधायक चुने गए। 2012 में सपा के टिकट पर मूलचंद चौहान ने वापसी की तो 2017 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर अशोक राणा फिर से विधायक बन गए। इन दोनों ठाकुर नेताओं के बीच ही चुनावी जंग चल रही है। अब इस चुनाव में देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में क्या चुनावी समीकरण सामने आते हैं।
विज्ञापन
--------
अब तब चुने गए विधायक
1957 खूब सिंह कांग्रेस
1962 खूब सिंह कांग्रेस
1967 गोविंद सहाय कांग्र्रेस
1969 सत्तार अहमद बीकेडी
1974 सत्तार अहमद कांग्रेस
1977 हरपाल सिंह शास्त्री जनता पार्टी
1980 श्याम सिंह जनता पार्टी सेक्यूलर
1985 बसंत सिंह कांग्रेस
1989 सुरेंद्र सिंह भाजपा
1991 राजेंद्र सिंह भाजपा
1993 राजेंद्र सिंह भाजपा
1996 मूलचंद चौहान सपा
2002 मूलंचद चौहान सपा
2007 अशोक राणा बसपा
2012 मूलचंद चौहान सपा
2017 अशोक राणा भाजपा
----------
धामपुर पर एक नजर
मतदान केंद्र 154
बूथ 326
पुरुष मतदाता 160141
महिला मतदाता 141262
कुल मतदाता 301426
------------
जातीय समीकरण बनाने में जुट गए नेता
धामपुर विधानसभा पर इस बार पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले काफी मतदाता बढ़ गए हैं। इस समय कुल मतदाताओं की संख्या यहां पर करीब तीन लाख पहुंच गई है। इस बार इस सीट पर करीब पांच हजार वोट कटे हैं, वहीं बढ़ने वाले वोटों की संख्या करीब 12 हजार बताई जा रही है। अब इस सीट पर जातीय समीकरण की बात करें तो यहां पर सबसे ज्यादा मतदाता मुस्लिम हैं और इनकी संख्या करीब 1 लाख 20 हजार होने का अनुमान लगाया जाता रहा है। वहीं अब दूसरे मतदाताओं की बात करें तो चौहान मतदाताओं की संख्या यहां पर 50 हजार, अनुसूचित मतदाता 45 हजार से ज्यादा होने के दावे किए जाते हैं। इसी तरह अन्य जातियों के मतदाताओं का अनुमान भी लगाया जा रहा है। सभी दल प्रयास कर रहे हैं कि इन आंकड़ों को अपने पक्ष में कर जीत का समीकरण तैयार कर सकें। (संवाद)
विज्ञापन
बिजनौर। धामपुर विधानसभा सीट की चुनावी बिसात पर शह और मात का खेल कड़ा होने की संभावना है। पिछले आठ विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो हर बार मुकाबला कड़ा ही रहता है। साल 2002 के चुनाव से इस सीट का मिजाज हर बार बदला-बदला ही नजर आता रहा है, लेकिन इस बार सभी दल समीकरण उनके पक्ष में होने का दावा करते नजर आ रहे हैं। दो दशकों का इतिहास देखें तो सिर्फ दो ठाकुरों के बीच ही दो दशक से चुनावी जंग चल रही है। हालांकि इस बार जनता का रुख क्या होगा, यह तो चुनाव परिणाम की तय करेंगे।
साल 1957 में धामपुर विधानसभा सीट पर पहली बार चुनाव हुआ था। उस वक्त कांग्रेस के उम्मीदवार खूब सिंह विधायक चुने गए खूब सिंह लगातार दो बार विधायक बने। 1967 में विधायक गोविंद सहाय बन गए लेकिन सीट कांग्रेस के कब्जे में ही रही। कांग्रेस के विरोध में लहर चली तो 1969 में बीकेडी के सत्तार अहमद विधायक बन गए। हालांकि 1974 में सत्तार अहमद फिर से विधायक बने कांग्रेस के टिकट पर। 1985 के चुनाव में कांग्रेस ने फिर वापसी की लेकिन इसके बाद कांग्रेस धामपुर सीट पर दोबारा जीत हासिल नहीं कर पाई।
विज्ञापन
रामलहर के दौरान 1989 में भाजपा के टिकट पर सुरेंद्र सिंह विधायक बने। 1996 में इस सीट पर सपा के मूलचंद चौहान पहली बार विधायक चुने गए। साल 2002 के चुनाव से ही इस सीट पर लगातार बदलाव होना लगा। 2007 में बसपा के टिकट पर अशोक कुमार राणा विधायक चुने गए। 2012 में सपा के टिकट पर मूलचंद चौहान ने वापसी की तो 2017 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर अशोक राणा फिर से विधायक बन गए। इन दोनों ठाकुर नेताओं के बीच ही चुनावी जंग चल रही है। अब इस चुनाव में देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में क्या चुनावी समीकरण सामने आते हैं।
विज्ञापन
--------
अब तब चुने गए विधायक
1957 खूब सिंह कांग्रेस
1962 खूब सिंह कांग्रेस
1967 गोविंद सहाय कांग्र्रेस
1969 सत्तार अहमद बीकेडी
1974 सत्तार अहमद कांग्रेस
1977 हरपाल सिंह शास्त्री जनता पार्टी
1980 श्याम सिंह जनता पार्टी सेक्यूलर
1985 बसंत सिंह कांग्रेस
1989 सुरेंद्र सिंह भाजपा
1991 राजेंद्र सिंह भाजपा
1993 राजेंद्र सिंह भाजपा
1996 मूलचंद चौहान सपा
2002 मूलंचद चौहान सपा
2007 अशोक राणा बसपा
2012 मूलचंद चौहान सपा
2017 अशोक राणा भाजपा
----------
धामपुर पर एक नजर
मतदान केंद्र 154
बूथ 326
पुरुष मतदाता 160141
महिला मतदाता 141262
कुल मतदाता 301426
------------
जातीय समीकरण बनाने में जुट गए नेता
धामपुर विधानसभा पर इस बार पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले काफी मतदाता बढ़ गए हैं। इस समय कुल मतदाताओं की संख्या यहां पर करीब तीन लाख पहुंच गई है। इस बार इस सीट पर करीब पांच हजार वोट कटे हैं, वहीं बढ़ने वाले वोटों की संख्या करीब 12 हजार बताई जा रही है। अब इस सीट पर जातीय समीकरण की बात करें तो यहां पर सबसे ज्यादा मतदाता मुस्लिम हैं और इनकी संख्या करीब 1 लाख 20 हजार होने का अनुमान लगाया जाता रहा है। वहीं अब दूसरे मतदाताओं की बात करें तो चौहान मतदाताओं की संख्या यहां पर 50 हजार, अनुसूचित मतदाता 45 हजार से ज्यादा होने के दावे किए जाते हैं। इसी तरह अन्य जातियों के मतदाताओं का अनुमान भी लगाया जा रहा है। सभी दल प्रयास कर रहे हैं कि इन आंकड़ों को अपने पक्ष में कर जीत का समीकरण तैयार कर सकें। (संवाद)