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Bijnor News: शिक्षा और रोजगार में अग्रणी गांव के रूप में है ढकौली की पहचान

Sun, 15 Sep 2024 11:35 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2024 11:35 PM IST
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Dhakauli is recognized as a leading village in education and employment.
हमारा गांव...
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- रेलवे, शिक्षा, वन, स्वास्थ्य, पंचायत राज सहित अन्य विभागों में काम रहे गांव के लोग

- 03 लोग गांव के पीएचडी हैं
- 100 से ज्यादा लोग पोस्ट ग्रेजुएट हैं
- 200 लोगों ने अलग-अलग विषयों में ग्रेजुएशन की है

महकार सिंह तोमर
नहटौर। शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र नहटौर के गांव ढकौली ने अपनी अलग पहचान बनाई है। ढकौली को शिक्षित गांव के रूप में जाना जाता है। इसका कारण गांव के लोगों का शिक्षित होना और अच्छी नौकरियां हासिल करना है। खेती करने वाले लोग भी ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट हैं।

गांव ढकौली के तीन लोग पीएचडी है। 100 से अधिक लोग पोस्ट ग्रेजुएट और करीब 200 लोग ग्रेजुएट हैं। गांव के ज्यादा परिवारों में ग्रेजुएट हैं और नौकरी कर रहे हैं। साथ ही ढकौली की पहचान शिक्षकों के गांव के रूप में भी है। क्योंकि गांव की एक महिला शिक्षा सचिवालय लखनऊ में समीक्षा अधिकारी, तीन लोग विभिन्न डिग्री काॅलेज में प्रोफेसर, 11 लोग विभिन्न इंटर काॅलेजों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता और एलटी ग्रेड में कार्यरत हैं।
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21 लोग प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक हैं। यहां के शिक्षक रामौतार सिंह को 2023 में राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा बीएड, बीटीसी, सीटीइटी, यूपीटीईटी, सुपरटीईटी होल्डर युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे हैं।
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खाकी में भी दबदबा
गांव के 30 लोग सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस, पीएसी, होमगार्ड, पीआरडी आदि में कार्यरत हैं। इसमें कांस्टेबल से लेकर स्टेनो, सब-इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर तक हैं। इसके अलावा यहां के लोग रेलवे, वन विभाग, पंचायत राज विभाग, स्वास्थ्य विभाग, कस्टम विभाग, बैंकिंग आदि कई विभागों में सेवाएं दे रहे हैं।





प्राथमिक विद्यालय ने बदल दी गांव की तकदीर

ग्रामीण जसवंत सिंह ने बताया कि गांव में प्राथमिक विद्यालय की स्थापना आजादी के बाद साल 1949 में हुई थी। विद्यालय का निर्माण के लिए धूंधी सिंह लंबरदार ने जमीन दान दी थी। गांव के साथ ही दूसरे गांव के बच्चे भी यहां शिक्षा लेने आते थे। अब यह विद्यालय पूर्व माध्यमिक विद्यालय तक उच्चीकृत हो गया है।

पहाड़ी वाल्मीकि ने अंग्रेज अफसर से की थी बात
वयोवृद्ध उमराव सिंह ने बताया कि गांव में एक बार कोई अंग्रेज अफसर आया था। गांव के लोग अंग्रेजी बोलना नहीं जानते थे। तब गांव के ही पहाड़ी वाल्मीकि ने उससे अंग्रेजी में बात कर अपनी योग्यता का लोहा मनवाया था। पहाड़ी वाल्मीकि के बड़े बेटे ने राष्ट्रपति भवन, दूसरे ने अपोलो हॉस्पिटल, तीसरे बेटे ने आर्मी में नौकरी की। आज उनकी तीसरी पीढ़ी भी अच्छे पदों पर है।



मास्टर मोहन सिंह ने जगाई उच्च शिक्षा की अलख
ग्रामीण धर्मवीर सिंह, मदनपाल सिंह, रामपाल सिंह आदि ने बताया कि वैसे तो गांव लोग पहले से ही पढ़े लिखे थे। लेकिन गांव में उच्च शिक्षा की अलख जगाने वाले सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक मोहन सिंह हैं। उन्होंने स्वयं उच्च शिक्षा प्राप्त की और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित किया। वे आज भी युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं।
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