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गंगा में दीपदान कर किया पितरों का तर्पण
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गंगा में दीपदान कर किया पितरों का तर्पण
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। भागीरथी में पितरों का तर्पण करने के लिए दीपदान किया गया। पितरों की शांति के लिए उनके नाम से बेड़े पर दीपक रखकर गंगा की धारा में प्रवाहित किए गए। एक साथ हजारों दीये गंगा में प्रवाहित होने से गंगा में सुंदर नजारा देखने को मिला।
पितरों का तर्पण करने के लिए मां गंगा में दीपदान किया जाता है। जिन परिवारों में पिछले एक साल में किसी की मौत हुई है, उसके नाम से मां गंगा की धारा में दीपदान किया जाता है। दीपदान करने के लिए विदुर कुटी, गंगा बैराज पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। दीये को गंगा में प्रवाहित करने के लिए गंगा के किनारे उगने वाले फूस की पत्तियों को तिकोना आकार दिया जाता है। इसे बेड़ा कहा जाता है। सुबह से ही गंगा के आसपास के गांवों में रहने वाले गांव वाले बेड़े बनाने में लग गए थे। श्रद्धालुओं को पांच रुपये में एक बेड़ा बेचा गया। शाम होते होते जिले भर से श्रद्धालु गंगा के तट पर एकत्र हुए और गंगा में डुबकी लगाई। इसके बाद पूर्वजों की याद में पूजन किया। गंगा मैया में पितरों के नाम का दीया जलाकर बेड़े पर रखकर प्रवाहित किया गया। पितरों के नाम पर खिचड़ी का दान भी किया गया। विदुर कुटी के साथ साथ गंगा बैराज, मंडावली घाट व चांदपुर क्षेत्र में भी दीपदान किया गया।
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बिजनौर। भागीरथी में पितरों का तर्पण करने के लिए दीपदान किया गया। पितरों की शांति के लिए उनके नाम से बेड़े पर दीपक रखकर गंगा की धारा में प्रवाहित किए गए। एक साथ हजारों दीये गंगा में प्रवाहित होने से गंगा में सुंदर नजारा देखने को मिला।
पितरों का तर्पण करने के लिए मां गंगा में दीपदान किया जाता है। जिन परिवारों में पिछले एक साल में किसी की मौत हुई है, उसके नाम से मां गंगा की धारा में दीपदान किया जाता है। दीपदान करने के लिए विदुर कुटी, गंगा बैराज पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। दीये को गंगा में प्रवाहित करने के लिए गंगा के किनारे उगने वाले फूस की पत्तियों को तिकोना आकार दिया जाता है। इसे बेड़ा कहा जाता है। सुबह से ही गंगा के आसपास के गांवों में रहने वाले गांव वाले बेड़े बनाने में लग गए थे। श्रद्धालुओं को पांच रुपये में एक बेड़ा बेचा गया। शाम होते होते जिले भर से श्रद्धालु गंगा के तट पर एकत्र हुए और गंगा में डुबकी लगाई। इसके बाद पूर्वजों की याद में पूजन किया। गंगा मैया में पितरों के नाम का दीया जलाकर बेड़े पर रखकर प्रवाहित किया गया। पितरों के नाम पर खिचड़ी का दान भी किया गया। विदुर कुटी के साथ साथ गंगा बैराज, मंडावली घाट व चांदपुर क्षेत्र में भी दीपदान किया गया।
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