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दशकों की मांग होगी पूरी, बिजनौर में बनेगा दुष्यंत कुमार वाचनालय
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बिजनौर पुस्तकालय एवं सांकृतिक केंद्र।
- फोटो : BIJNOR
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दशकों की मांग होगी पूरी, बिजनौर में बनेगा दुष्यंत कुमार वाचनालय
रजनीश त्यागी
बिजनौर। आज वीरान अपना घर देखा तो झांक कर कई बार देखा, पांव टूटे हुए नजर आए, एक ठहरा हुआ खंडहर देखा। दुष्यंत कुमार त्यागी की ये लाइनें उन्हीं पर सटीक बैठ रहीं थीं, लेकिन अब उनकी यादों को सहेजने की कवायद बिजनौर में शुरू हो चुकी है। जिले में दशकों से चली आ रही साहित्यकारों की मांग भी पूरी होने जा रही है। जिला पुस्तकालय अब दुष्यंत कुमार वाचनालय के नाम से जाना जाएगा। पुस्तकालय का सिर्फ नाम ही नहीं बदलेगा, बल्कि इसे विकसित करने के साथ-साथ दुष्यंत कुमार का संपूर्ण साहित्य, उनकी यादों से जुड़ी चीजों को यहां पर संजोया जाएगा। डीएम उमेश मिश्रा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर इसकी पूरी रूप रेखा बनानी शुरू कर दी है।
जिला प्रशासन ने सालों से चल रही आ रही साहित्यकारों की मांग पर विचार कर लिया है। बाकायदा प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसमें जिला मुख्यालय पर सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में स्थित जिला पुस्तकालय का नाम दुष्यंत कुमार वाचनालय किया जाना है। सब कुछ ठीक रहा तो यह दुष्यंत कुमार त्यागी की पुण्यतिथि 30 दिसंबर को उन्हें समर्पित भी कर दिया जाएगा। पुस्तकालय में हिंदी गजल सम्राट का साहित्य रखा जाएगा, जोकि पाठकों को पढ़ने के लिए मुहैया हो सकेगा। बता दें कि अमर उजाला के कार्यक्रम ‘हिंदी हैं हम’ में भी यह मुद्दा उठा था। उस समय डीएम उमेश मिश्रा ने इस पर विचार कर कार्य कराने का आश्वासन दिया था। (संवाद)
सहेज कर रखी जाएंगी यादें
दुष्यंत कुमार त्यागी वाचनालय में सिर्फ किताबें ही नहीं होगी, बल्कि उनसे जुड़ी वस्तुओं और यादों को सहेज कर रखा जाएगा। वाचनालय के हिस्से में संग्रहालय बनाने की कवायद भी है। इसके लिए जिला प्रशासन ने दुष्यंत कुमार त्यागी के परिवार, रिश्तेदार और परिचित रहे लोगों से संपर्क करने का मन बनाया है। जिससे उनसे जुड़ी वस्तुओं या अन्य यादों को जुटाया जा सके। दुनियाभर में प्रसिद्ध रहे दुष्यंत कुमार त्यागी अपने ही जिले में उपेक्षित रहे। उनके गांव राजपुर नवादा के बाहर एक गेट बना हुआ है। पिछले साल एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने मंडावली थाने की पुलिस चौकी को दुष्यंत कुमार त्यागी को समर्पित किया है। इसके अलावा कुछ नहीं था। हालांकि अब वाचनालय की कवायद बढ़ी है।
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होगा कवि सम्मेलन, शुरू होगा दुष्यंत कुमार सम्मान
दुष्यंत कुमार वाचनालय के साथ-साथ उनकी पुण्यतिथि पर कवि सम्मेलन या हिंदी साहित्य का कार्यक्रम कराने की योजना भी जिला प्रशासन बना रहा है। जिसमें दुष्यंत कुमार की याद में साहित्यकारों को एक मंच पर एकत्रित किया जाएगा। इसके अलावा जिला प्रशासन मेधावी छात्रों को दुष्यंत कुमार सम्मान देना शुरू करने पर भी विचार कर रहा है।
------ कोट
जिला पुस्तकालय को दुष्यंत कुमार वाचनालय बनाने पर विचार चल रहा है। इसके लिए पूरा प्रस्ताव तैयार हो रहा है। इसके अतिरिक्त प्रयास है कि दुष्यंत कुमार के जन्मदिवस या पुण्यतिथि पर साहित्यिक कार्यक्रम, दुष्यंत कुमार के नाम पर सम्मान शुरू किया जाए - उमेश मिश्रा, डीएम।
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। आज वीरान अपना घर देखा तो झांक कर कई बार देखा, पांव टूटे हुए नजर आए, एक ठहरा हुआ खंडहर देखा। दुष्यंत कुमार त्यागी की ये लाइनें उन्हीं पर सटीक बैठ रहीं थीं, लेकिन अब उनकी यादों को सहेजने की कवायद बिजनौर में शुरू हो चुकी है। जिले में दशकों से चली आ रही साहित्यकारों की मांग भी पूरी होने जा रही है। जिला पुस्तकालय अब दुष्यंत कुमार वाचनालय के नाम से जाना जाएगा। पुस्तकालय का सिर्फ नाम ही नहीं बदलेगा, बल्कि इसे विकसित करने के साथ-साथ दुष्यंत कुमार का संपूर्ण साहित्य, उनकी यादों से जुड़ी चीजों को यहां पर संजोया जाएगा। डीएम उमेश मिश्रा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर इसकी पूरी रूप रेखा बनानी शुरू कर दी है।
जिला प्रशासन ने सालों से चल रही आ रही साहित्यकारों की मांग पर विचार कर लिया है। बाकायदा प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसमें जिला मुख्यालय पर सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में स्थित जिला पुस्तकालय का नाम दुष्यंत कुमार वाचनालय किया जाना है। सब कुछ ठीक रहा तो यह दुष्यंत कुमार त्यागी की पुण्यतिथि 30 दिसंबर को उन्हें समर्पित भी कर दिया जाएगा। पुस्तकालय में हिंदी गजल सम्राट का साहित्य रखा जाएगा, जोकि पाठकों को पढ़ने के लिए मुहैया हो सकेगा। बता दें कि अमर उजाला के कार्यक्रम ‘हिंदी हैं हम’ में भी यह मुद्दा उठा था। उस समय डीएम उमेश मिश्रा ने इस पर विचार कर कार्य कराने का आश्वासन दिया था। (संवाद)
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सहेज कर रखी जाएंगी यादें
दुष्यंत कुमार त्यागी वाचनालय में सिर्फ किताबें ही नहीं होगी, बल्कि उनसे जुड़ी वस्तुओं और यादों को सहेज कर रखा जाएगा। वाचनालय के हिस्से में संग्रहालय बनाने की कवायद भी है। इसके लिए जिला प्रशासन ने दुष्यंत कुमार त्यागी के परिवार, रिश्तेदार और परिचित रहे लोगों से संपर्क करने का मन बनाया है। जिससे उनसे जुड़ी वस्तुओं या अन्य यादों को जुटाया जा सके। दुनियाभर में प्रसिद्ध रहे दुष्यंत कुमार त्यागी अपने ही जिले में उपेक्षित रहे। उनके गांव राजपुर नवादा के बाहर एक गेट बना हुआ है। पिछले साल एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने मंडावली थाने की पुलिस चौकी को दुष्यंत कुमार त्यागी को समर्पित किया है। इसके अलावा कुछ नहीं था। हालांकि अब वाचनालय की कवायद बढ़ी है।
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होगा कवि सम्मेलन, शुरू होगा दुष्यंत कुमार सम्मान
दुष्यंत कुमार वाचनालय के साथ-साथ उनकी पुण्यतिथि पर कवि सम्मेलन या हिंदी साहित्य का कार्यक्रम कराने की योजना भी जिला प्रशासन बना रहा है। जिसमें दुष्यंत कुमार की याद में साहित्यकारों को एक मंच पर एकत्रित किया जाएगा। इसके अलावा जिला प्रशासन मेधावी छात्रों को दुष्यंत कुमार सम्मान देना शुरू करने पर भी विचार कर रहा है।
------ कोट
जिला पुस्तकालय को दुष्यंत कुमार वाचनालय बनाने पर विचार चल रहा है। इसके लिए पूरा प्रस्ताव तैयार हो रहा है। इसके अतिरिक्त प्रयास है कि दुष्यंत कुमार के जन्मदिवस या पुण्यतिथि पर साहित्यिक कार्यक्रम, दुष्यंत कुमार के नाम पर सम्मान शुरू किया जाए - उमेश मिश्रा, डीएम।