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रवाना में बुखार से एक और महिला की मौत
अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर
Updated Sat, 17 Sep 2016 12:55 AM IST
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बिजनौर के गांव रवाना में शुक्रवार को बुखार से पीड़ित एक और महिला की मौत हो गई। इसके साथ ही गांव में बुखार से मरने वालों की संख्या 13 हो गई है। एक माह से भी कम समय में इतनी मौतों से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।
रवाना निवासी मोहम्मदी खातून पत्नी इलियास को तीन दिन पहले बुखार आया था। परिजन दो दिन तक उसका ताजपुर के एक निजी चिकित्सक से इलाज कराते रहे। शुक्रवार को हालत गंभीर होने पर परिजन उसे मुरादाबाद ले जा रहे थे। उसकी रास्ते में ही मौत हो गई।
ग्रामीणों के अनुसार बुखार के कारण गांव में रोज ही कोई न कोई मौत हो रही है। तीन दिन पहले तो गांव में एक साथ तीन मौतें हुई थीं। इतनी संख्या में मौत होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग लापरवाही बरत रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बुखार का प्रकोप होने के बावजूद जिला मुख्यालय से कोई टीम गांव नहीं पहुंची तथा मुख्य चिकित्साधिकारी ने भी दिन ही गांव में आकर कर्तव्य की इतिश्री कर ली। उधर, सीएचसी प्रभारी डा. विशाल दिवाकर ने शुक्रवार को महिला की बुखार से मौत होने से अनभिज्ञता जताई।
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उन्होंने दावा किया कि सीएचसी पर आने वाले मरीजों का गंभीरता से उपचार कराया जा रहा है। उधर, नूरपुर के गांव चेहला में भी बुखार पीड़ितों की संख्या कम नहीं हो रही है। गांव से रोज ही 40 से 50 मरीज पीएचसी पहुंच रहे हैं। पीएचसी में चिकित्सकों और बिस्तरों की कमी से मरीज परेशान हैं। एक बैड पर दो से तीन मरीजों को लिटाकर उपचार किया जा रहा है। पीएचसी प्रभारी डा. कुनाल का कहना है कि गांव में बुखार पीड़ितों की संख्या कम हो रही है। पीएचसी आने वाले मरीजों का उचित इलाज किया जा रहा है।
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रवाना निवासी मोहम्मदी खातून पत्नी इलियास को तीन दिन पहले बुखार आया था। परिजन दो दिन तक उसका ताजपुर के एक निजी चिकित्सक से इलाज कराते रहे। शुक्रवार को हालत गंभीर होने पर परिजन उसे मुरादाबाद ले जा रहे थे। उसकी रास्ते में ही मौत हो गई।
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ग्रामीणों के अनुसार बुखार के कारण गांव में रोज ही कोई न कोई मौत हो रही है। तीन दिन पहले तो गांव में एक साथ तीन मौतें हुई थीं। इतनी संख्या में मौत होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग लापरवाही बरत रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बुखार का प्रकोप होने के बावजूद जिला मुख्यालय से कोई टीम गांव नहीं पहुंची तथा मुख्य चिकित्साधिकारी ने भी दिन ही गांव में आकर कर्तव्य की इतिश्री कर ली। उधर, सीएचसी प्रभारी डा. विशाल दिवाकर ने शुक्रवार को महिला की बुखार से मौत होने से अनभिज्ञता जताई।
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उन्होंने दावा किया कि सीएचसी पर आने वाले मरीजों का गंभीरता से उपचार कराया जा रहा है। उधर, नूरपुर के गांव चेहला में भी बुखार पीड़ितों की संख्या कम नहीं हो रही है। गांव से रोज ही 40 से 50 मरीज पीएचसी पहुंच रहे हैं। पीएचसी में चिकित्सकों और बिस्तरों की कमी से मरीज परेशान हैं। एक बैड पर दो से तीन मरीजों को लिटाकर उपचार किया जा रहा है। पीएचसी प्रभारी डा. कुनाल का कहना है कि गांव में बुखार पीड़ितों की संख्या कम हो रही है। पीएचसी आने वाले मरीजों का उचित इलाज किया जा रहा है।