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बेगुनाही साबित करने में लगे दस साल
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 19 Dec 2016 11:47 PM IST
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बिजनौर में कत्ल के जुर्म में भाई की जगह दस साल से सलाखों के पीछे बंद एक बेगुनाह को जेल से आजादी मिलने वाली है। कोर्ट ने उसे अंतरिम जमानत पर छोड़ने का आदेश दे दिया है। पुलिस ने हत्यारोपी पप्पू के नहीं मिलने पर उसके भाई को पप्पू बताकर जेल भेज दिया था। अपनी बेगुनाही साबित करने में पप्पू को दस साल लग गए।
नगीना देहात थाना क्षेत्र के गांव साबूवाला निवासी धर्मी उर्फ धर्मपाल का वर्ष 2001 में कत्ल हो गया था। मृतक के पिता की ओर से गांव के ही गुड्डू, उसके भाई पप्पू एवं भगवत व इंद्रा को नामजद किया गया था। पुलिस ने गुड्डू, भगवत व इंद्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पप्पू पर ढाई हजार का इनाम घोषित किया गया था। कोर्ट ने पप्पू की फाइल अलग करते हुए गुड्डू, भगवत व इंद्रा को उम्रकैद की सजा सुना दी थी। पप्पू की गिरफ्तारी नहीं होने पर कोर्ट की फटकार के बाद नगीना देहात थाने में ही तैनात एक दरोगा ने पप्पू की 30 अप्रैल 2006 को गिरफ्तारी दिखाई थी। गिरफ्तारी का आरोपी के परिजनों ने यह कहकर विरोध किया था कि पप्पू की जगह बाले सिंह को गिरफ्तार किया गया है और उसे पप्पू बताया जा रहा है। इस मामले में तमाम प्रयासों के बाद भी कहीं सुनवाई नहीं हुई और पप्पू की जगह गिरफ्तार उसका भाई बाला सिंह जेल में ही पड़ा रहा। बाले सिंह की मां राजकुमारी ने लगातार प्रयास जारी रखी।
राजकुमारी का कहना था कि बाला सिंह पंजाब में नौकरी करता था और उससे मिलने गांव आया था। इस दौरान पुलिस ने उसे पप्पू बताकर गिरफ्तार कर लिया। इस केस का अभियुक्त पप्पू पहले भी किसी मामले में जेल जा चुका था। पुलिस ने पप्पू के फिंगर प्रिंट व पांच अन्य पहचान चिह्न अपने रिकॉर्ड में रख रखे थे। पहचान चिह्न पप्पू के नाम से जेल में बंद बाला सिंह से मेल नहीं खाते थे। फिंगर प्रिंट को जांच के लिए फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया। जेल से प्राप्त पप्पू के नाम से बंद बाला सिंह के फिंगर प्रिंट अलग पाए गए, तब इस बात की तसदीक हुई कि अपने भाई पप्पू के नाम से जेल में बंद व्यक्ति जो अपने को बाला सिंह बताता है वह पप्पू नहीं है। पीड़ित के अधिवक्ता कोमल सिंह के अनुसार एडीजे कोर्ट नंबर तीन संदीप जैन ने इस पूरे मामले में विचार करने के बाद पप्पू के नाम से जेल में बंद बाला सिंह को अंतरिम जमानत पर छोड़ने के आदेश दिए हैं। आदेश अभी जेल प्रशासन को नहीं मिले हैं।
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नगीना देहात थाना क्षेत्र के गांव साबूवाला निवासी धर्मी उर्फ धर्मपाल का वर्ष 2001 में कत्ल हो गया था। मृतक के पिता की ओर से गांव के ही गुड्डू, उसके भाई पप्पू एवं भगवत व इंद्रा को नामजद किया गया था। पुलिस ने गुड्डू, भगवत व इंद्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पप्पू पर ढाई हजार का इनाम घोषित किया गया था। कोर्ट ने पप्पू की फाइल अलग करते हुए गुड्डू, भगवत व इंद्रा को उम्रकैद की सजा सुना दी थी। पप्पू की गिरफ्तारी नहीं होने पर कोर्ट की फटकार के बाद नगीना देहात थाने में ही तैनात एक दरोगा ने पप्पू की 30 अप्रैल 2006 को गिरफ्तारी दिखाई थी। गिरफ्तारी का आरोपी के परिजनों ने यह कहकर विरोध किया था कि पप्पू की जगह बाले सिंह को गिरफ्तार किया गया है और उसे पप्पू बताया जा रहा है। इस मामले में तमाम प्रयासों के बाद भी कहीं सुनवाई नहीं हुई और पप्पू की जगह गिरफ्तार उसका भाई बाला सिंह जेल में ही पड़ा रहा। बाले सिंह की मां राजकुमारी ने लगातार प्रयास जारी रखी।
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राजकुमारी का कहना था कि बाला सिंह पंजाब में नौकरी करता था और उससे मिलने गांव आया था। इस दौरान पुलिस ने उसे पप्पू बताकर गिरफ्तार कर लिया। इस केस का अभियुक्त पप्पू पहले भी किसी मामले में जेल जा चुका था। पुलिस ने पप्पू के फिंगर प्रिंट व पांच अन्य पहचान चिह्न अपने रिकॉर्ड में रख रखे थे। पहचान चिह्न पप्पू के नाम से जेल में बंद बाला सिंह से मेल नहीं खाते थे। फिंगर प्रिंट को जांच के लिए फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया। जेल से प्राप्त पप्पू के नाम से बंद बाला सिंह के फिंगर प्रिंट अलग पाए गए, तब इस बात की तसदीक हुई कि अपने भाई पप्पू के नाम से जेल में बंद व्यक्ति जो अपने को बाला सिंह बताता है वह पप्पू नहीं है। पीड़ित के अधिवक्ता कोमल सिंह के अनुसार एडीजे कोर्ट नंबर तीन संदीप जैन ने इस पूरे मामले में विचार करने के बाद पप्पू के नाम से जेल में बंद बाला सिंह को अंतरिम जमानत पर छोड़ने के आदेश दिए हैं। आदेश अभी जेल प्रशासन को नहीं मिले हैं।
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