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आतंकियों के संपर्क में है कुख्यात मुनीर!
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Fri, 15 Apr 2016 12:22 AM IST
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बदमाश मुनीर
- फोटो : अमर उजाला
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आईएनए अधिकारी तंजील अहमद को सनसनीखेज तरीके से शूट करने वाले शातिर अपराधी मुनीर के नेपाल भागने की सूचना पर एटीएस सतर्क हो गई है। यह अंदेशा जताया जा रहा है कि अगर वह नेपाल भागा है तो इसमें उसकी किसी स्लीपिंग सेल ने मदद की हो सकती है।
एटीएस पहले तंजील अहमद हत्याकांड के पीछे किसी टेरेरिस्ट लिंक की संभावना पर छानबीन कर रही थी। पर जब यह सामने आया कि हत्या निजी रंजिश और संपत्ति विवाद की वजह से हुई तब से एटीएस ने अपनी यह पड़ताल बंद कर दी। पर अब एक बार फिर एटीएस ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया और यूपी के नेपाल सीमा से सटे ऐसे जिलों में सक्रियता बढ़ाई हैे, जहां स्लीपिंग सेल मौजूद होने की जांच एजेंसी के पास सूचना है।
एटीएस के सूत्रों का कहना है कि पहले भी विभिन्न आतंकी संगठनों ने स्थानीय स्तर के युवकों व अपराधियों को अपने मकसद से जोड़ने की कोशिश की है। बाद में इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) से जुड़े सिमी के सदस्यों ने यह काम जारी रखा है। अपने मंसूबों को हासिल करने के लिए न सिर्फ अपराध किए बल्कि ऐसे नवयुवकों को भी जोड़ा है। एटीएस के अधिकारियों का कहना है कि हालांकि, अभी तक मुनीर के किसी आतंकी संगठन से जुड़ा होने की कोई पुख्ता सूचना नहीं है, पर उनकी जांच जारी है। औपचारिक तौर पर आला अफसर भी यह कह रहे हैं कि एटीएस मुनीर को तलाश करने की सभी कोशिशों में जुटी है। साथ ही उसके संपर्कों पर नजर रखी जा रही है। आईएनए अधिकारी तंजील अहमद की हत्या के मामले में गवाही देने वालों को जान का खतरा है। गवाही देने के साथ ही मुकदमा दर्ज कराने वाले तंजील के भाई रागिब पर भी खतरा बताया जा रहा है। गवाही देने वालों में मुनीर का रिश्तेदार बाबी और नजदीकी इमामुल हक शामिल हैं। इन दोनों ने कलमबंद बयान में मुनीर पर हत्यारा होने का अंदेशा जताया है। जबकि रागिब ने तंजील की हत्या की एफआईआर दर्ज कराते हुए मुनीर व अन्य को नामजद किया है। एक उच्च पुलिस अधिकारी ने माना कि मुनीर इतना शातिर है कि वह कुछ भी कर सकता है। जिला स्तर पर इन सभी की सुरक्षा के समुचित प्रबंध करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
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आजम के कोर्ट में बयान
बिजनौर में एनआईए अफसर तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना के मर्डर में पुलिस ने मुनीर के एक और दोस्त आजम को सरकारी गवाह बना लिया है। पुलिस ने बृहस्पतिवार को आजम के भी सीजेएम कोर्ट में 164 के तहत बयान दर्ज कराए। इससे पूर्व. दो सरकारी गवाहों के पुलिस पहले ही कोर्ट में बयान दर्ज करा चुकी है। पुलिस तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना के मर्डर केस को मजबूत करने में जुटी है। पुलिस तंजील मर्डर के सरकारी गवाहों के कोर्ट में बयान दर्ज करा रही है, ताकि बाद में ये गवाह अपनी गवाही से मुकर न जाए। पुलिस ने दो दिन पहले कसबा झालू निवासी मुनीर के फुफेरे भाई बॉबी उर्फ फजल व सहसपुर निवासी इनामुलहक को सरकारी गवाह बनाते हुए उनके कोर्ट में 164 के बयान दर्ज कराए थे। इन दोनों के सामने मुनीर व रैय्यान ने तंजील अहमद का मर्डर करने की बात कबूली थी। बृहस्पतिवार को पुलिस ने सहसपुर निवासी मुनीर के एक और दोस्त आजम के भी सीजेएम कोर्ट में 164 के बयान दर्ज कराए।
रैगिंग से टूटे मुनीर ने उठाए हथियार
िजनौर। अलीगढ़ के एक कॉलेज में पढ़ाई के दौरान सीनियर छात्रों के रैगिंग से तंग आकर शर्मीले स्वभाव का मुनीर अपने हाथों में हथियार उठाने को मजबूर हो गया। उसने रैंगिग करने वाले एक-एक छात्रों से अपने अपमान का बदला लिया। यही से उसने जरायम की दुनिया में दस्तक दी। एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना के मर्डर में अब पुलिस महकमे को मुनीर की तलाश है। इनामी मुनीर की तलाश में कई प्रदेशों की पुलिस खाक छान रही है। हालांकि पुलिस महकमे को कामयाबी नहीं मिली है।
सहसपुर से इंटर की पढ़ाई के बाद मुनीर अलीगढ़ के एक कॉलेज में दाखिला लिया। पढ़ाई के दौरान सीनियर छात्रों ने उसकी रैगिंग लेनी शुरू कर दी। सीनियर छात्रों के प्रताड़ना से तंग आकर मुनीर ने जरायम की दुनिया में कदम रखने को ठान ली। रैगिंग करने वालों से बदला लेने के लिए अलीगढ़ के कुछ अपराधी प्रवृत्ति के युवकों से दोस्ती की। मुनीर ने रैगिंग करने वाले एक-एक छात्र से अपने अपमान का बदला लिया। मुनीर छात्रों के एक गैंग का लीडर बन गया। इसके बाद मुनीर ने हथियार उठा लिया। सबसे पहले मुनीर ने अलीगढ़ के सिविल लाइन क्षेत्र में सहाब की गोली मारकर हत्या की।
इसके बाद 2015 में आलमगीर समेत दो की हत्या कर वह चर्चाओं में आ गया। मुनीर का निशाना भी काफी अचूक है। मुनीर ने कई दोस्तों को अपने गैंग में शामिल कर लिया। मुनीर के संरक्षण में उसके दोस्त भी आपराधिक वारदातों को अंजाम देने लगे। बिजनौर जिले की पुलिस को धामपुर में दिसंबर 2015 में पीएनबी के कैश वैन से 91 लाख रुपये की लूट में शामिल होने के कारण मुनीर की बेसब्री से तलाश थी। पुलिस की नाकामी के कारण उसने फिर एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद को अपना निशाना बनाने के लिए साजिश रच डाली। दो अप्रैल की रात स्योहारा में अपनी भांजी के शादी समारोह में शरीक होने के बाद कार से परिवार के साथ सहसपुर लौटते समय एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद पर मुनीर ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी।
तंजील की मौके पर ही मौत हो गई। कार सवार उनकी पत्नी फरजाना को चार गोलियां लगी। फरजाना ने 11 दिन बाद जिंदगी और मौत से संघर्ष के बाद बुधवार की सुबह दिल्ली एम्स में अंतिम सांसें ली। अब पुलिस, एटीएस और एसटीएफ के साथ ही एनआईए को मुनीर की तलाश में कई प्रदेशों में दिन रात खाक छाननी पड़ रही है। इसके बावजूद मुनीर पुलिस गिरफ्त में कब आएगा इसका किसी को पता नहीं।
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एटीएस पहले तंजील अहमद हत्याकांड के पीछे किसी टेरेरिस्ट लिंक की संभावना पर छानबीन कर रही थी। पर जब यह सामने आया कि हत्या निजी रंजिश और संपत्ति विवाद की वजह से हुई तब से एटीएस ने अपनी यह पड़ताल बंद कर दी। पर अब एक बार फिर एटीएस ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया और यूपी के नेपाल सीमा से सटे ऐसे जिलों में सक्रियता बढ़ाई हैे, जहां स्लीपिंग सेल मौजूद होने की जांच एजेंसी के पास सूचना है।
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एटीएस के सूत्रों का कहना है कि पहले भी विभिन्न आतंकी संगठनों ने स्थानीय स्तर के युवकों व अपराधियों को अपने मकसद से जोड़ने की कोशिश की है। बाद में इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) से जुड़े सिमी के सदस्यों ने यह काम जारी रखा है। अपने मंसूबों को हासिल करने के लिए न सिर्फ अपराध किए बल्कि ऐसे नवयुवकों को भी जोड़ा है। एटीएस के अधिकारियों का कहना है कि हालांकि, अभी तक मुनीर के किसी आतंकी संगठन से जुड़ा होने की कोई पुख्ता सूचना नहीं है, पर उनकी जांच जारी है। औपचारिक तौर पर आला अफसर भी यह कह रहे हैं कि एटीएस मुनीर को तलाश करने की सभी कोशिशों में जुटी है। साथ ही उसके संपर्कों पर नजर रखी जा रही है। आईएनए अधिकारी तंजील अहमद की हत्या के मामले में गवाही देने वालों को जान का खतरा है। गवाही देने के साथ ही मुकदमा दर्ज कराने वाले तंजील के भाई रागिब पर भी खतरा बताया जा रहा है। गवाही देने वालों में मुनीर का रिश्तेदार बाबी और नजदीकी इमामुल हक शामिल हैं। इन दोनों ने कलमबंद बयान में मुनीर पर हत्यारा होने का अंदेशा जताया है। जबकि रागिब ने तंजील की हत्या की एफआईआर दर्ज कराते हुए मुनीर व अन्य को नामजद किया है। एक उच्च पुलिस अधिकारी ने माना कि मुनीर इतना शातिर है कि वह कुछ भी कर सकता है। जिला स्तर पर इन सभी की सुरक्षा के समुचित प्रबंध करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
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आजम के कोर्ट में बयान
बिजनौर में एनआईए अफसर तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना के मर्डर में पुलिस ने मुनीर के एक और दोस्त आजम को सरकारी गवाह बना लिया है। पुलिस ने बृहस्पतिवार को आजम के भी सीजेएम कोर्ट में 164 के तहत बयान दर्ज कराए। इससे पूर्व. दो सरकारी गवाहों के पुलिस पहले ही कोर्ट में बयान दर्ज करा चुकी है। पुलिस तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना के मर्डर केस को मजबूत करने में जुटी है। पुलिस तंजील मर्डर के सरकारी गवाहों के कोर्ट में बयान दर्ज करा रही है, ताकि बाद में ये गवाह अपनी गवाही से मुकर न जाए। पुलिस ने दो दिन पहले कसबा झालू निवासी मुनीर के फुफेरे भाई बॉबी उर्फ फजल व सहसपुर निवासी इनामुलहक को सरकारी गवाह बनाते हुए उनके कोर्ट में 164 के बयान दर्ज कराए थे। इन दोनों के सामने मुनीर व रैय्यान ने तंजील अहमद का मर्डर करने की बात कबूली थी। बृहस्पतिवार को पुलिस ने सहसपुर निवासी मुनीर के एक और दोस्त आजम के भी सीजेएम कोर्ट में 164 के बयान दर्ज कराए।
रैगिंग से टूटे मुनीर ने उठाए हथियार
िजनौर। अलीगढ़ के एक कॉलेज में पढ़ाई के दौरान सीनियर छात्रों के रैगिंग से तंग आकर शर्मीले स्वभाव का मुनीर अपने हाथों में हथियार उठाने को मजबूर हो गया। उसने रैंगिग करने वाले एक-एक छात्रों से अपने अपमान का बदला लिया। यही से उसने जरायम की दुनिया में दस्तक दी। एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना के मर्डर में अब पुलिस महकमे को मुनीर की तलाश है। इनामी मुनीर की तलाश में कई प्रदेशों की पुलिस खाक छान रही है। हालांकि पुलिस महकमे को कामयाबी नहीं मिली है।
सहसपुर से इंटर की पढ़ाई के बाद मुनीर अलीगढ़ के एक कॉलेज में दाखिला लिया। पढ़ाई के दौरान सीनियर छात्रों ने उसकी रैगिंग लेनी शुरू कर दी। सीनियर छात्रों के प्रताड़ना से तंग आकर मुनीर ने जरायम की दुनिया में कदम रखने को ठान ली। रैगिंग करने वालों से बदला लेने के लिए अलीगढ़ के कुछ अपराधी प्रवृत्ति के युवकों से दोस्ती की। मुनीर ने रैगिंग करने वाले एक-एक छात्र से अपने अपमान का बदला लिया। मुनीर छात्रों के एक गैंग का लीडर बन गया। इसके बाद मुनीर ने हथियार उठा लिया। सबसे पहले मुनीर ने अलीगढ़ के सिविल लाइन क्षेत्र में सहाब की गोली मारकर हत्या की।
इसके बाद 2015 में आलमगीर समेत दो की हत्या कर वह चर्चाओं में आ गया। मुनीर का निशाना भी काफी अचूक है। मुनीर ने कई दोस्तों को अपने गैंग में शामिल कर लिया। मुनीर के संरक्षण में उसके दोस्त भी आपराधिक वारदातों को अंजाम देने लगे। बिजनौर जिले की पुलिस को धामपुर में दिसंबर 2015 में पीएनबी के कैश वैन से 91 लाख रुपये की लूट में शामिल होने के कारण मुनीर की बेसब्री से तलाश थी। पुलिस की नाकामी के कारण उसने फिर एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद को अपना निशाना बनाने के लिए साजिश रच डाली। दो अप्रैल की रात स्योहारा में अपनी भांजी के शादी समारोह में शरीक होने के बाद कार से परिवार के साथ सहसपुर लौटते समय एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद पर मुनीर ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी।
तंजील की मौके पर ही मौत हो गई। कार सवार उनकी पत्नी फरजाना को चार गोलियां लगी। फरजाना ने 11 दिन बाद जिंदगी और मौत से संघर्ष के बाद बुधवार की सुबह दिल्ली एम्स में अंतिम सांसें ली। अब पुलिस, एटीएस और एसटीएफ के साथ ही एनआईए को मुनीर की तलाश में कई प्रदेशों में दिन रात खाक छाननी पड़ रही है। इसके बावजूद मुनीर पुलिस गिरफ्त में कब आएगा इसका किसी को पता नहीं।