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धोखाधड़ी में फंसे प्रबंधक
ब्यूरो / अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sun, 20 Dec 2015 12:07 AM IST
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नहटौर। एक पशुपालक ने फर्जी कागज तैयार करके धोखाधड़ी से ऋण वसूली करने का आरोप लगाते हुए पूर्व बैंक प्रबंधक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्जकर मामले की जांच शुरू कर दी हैं। बैंक प्रबंधक इस समय रायवाला हरिद्वार में तैनात है।
गांव गिलाड़ा निवासी महावीर सिंह ने कोतवाली में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि 2007 में उसके भाई राजवीर सिंह ने पीएनबी की शाखा नहटौर से पशुपालन योजना के तहत दो भैंसों का ऋण लिया था। वह किश्त जमा करता रहा। एक वर्ष बाद अचानक उसके भाई की मृत्यु हो गई।
2009 में बीमारी के कारण दोनों पशु भी मर गए। पोस्टमार्टम के बाद सभी कागजी कार्रवाई पूर्ण हो गई। उस समय बैंक में तैनात प्रबंधक ने इंश्योरेंश कंपनी से ऋण वसूलने की प्रक्रिया करके उनका खाता बंद कर दिया। उसके बाद उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई।
कुछ माह पूर्व बैंक में तैनात प्रबंधक संजीव कुमार ने उनसे पांच हजार रुपये की मांग की। रुपये नहीं देने पर फर्जी कागज तैयार करके नोटिस भेजकर उससे और उसकी मां से ऋण वसूलने का दबाव बनाने लगा। आरोप है कि चार माह पूर्व बैंक आने पर प्रबंधक ने उसे बंधक बना लिया।
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उससे 55 हजार रुपये की नकदी लेकर 46 हजार रुपये की रसीद दे दी। शिकायत करने पर जेल भिजवाने की धमकी दी। वह किसी तरह घर पहुंचा और कोतवाली पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस के सुनवाई न करने पर उसने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने कोतवाली प्रभारी को इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच के आदेश दिए।
कोतवाली प्रभारी संतोष यादव ने बताया कि इस मामले में बैंक प्रबंधक संजीव कुमार के खिलाफ धारा 420, 468, 471, 384 में रिपोर्ट दर्ज की गई है। बैंक प्रबंधक का स्थानांतरण हो चुका है। वह इस समय हरिद्वार रायवाला शाखा में तैनात है। मामले की जांच की जा रही है।
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पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्जकर मामले की जांच शुरू कर दी हैं। बैंक प्रबंधक इस समय रायवाला हरिद्वार में तैनात है।
गांव गिलाड़ा निवासी महावीर सिंह ने कोतवाली में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि 2007 में उसके भाई राजवीर सिंह ने पीएनबी की शाखा नहटौर से पशुपालन योजना के तहत दो भैंसों का ऋण लिया था। वह किश्त जमा करता रहा। एक वर्ष बाद अचानक उसके भाई की मृत्यु हो गई।
2009 में बीमारी के कारण दोनों पशु भी मर गए। पोस्टमार्टम के बाद सभी कागजी कार्रवाई पूर्ण हो गई। उस समय बैंक में तैनात प्रबंधक ने इंश्योरेंश कंपनी से ऋण वसूलने की प्रक्रिया करके उनका खाता बंद कर दिया। उसके बाद उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई।
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कुछ माह पूर्व बैंक में तैनात प्रबंधक संजीव कुमार ने उनसे पांच हजार रुपये की मांग की। रुपये नहीं देने पर फर्जी कागज तैयार करके नोटिस भेजकर उससे और उसकी मां से ऋण वसूलने का दबाव बनाने लगा। आरोप है कि चार माह पूर्व बैंक आने पर प्रबंधक ने उसे बंधक बना लिया।
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उससे 55 हजार रुपये की नकदी लेकर 46 हजार रुपये की रसीद दे दी। शिकायत करने पर जेल भिजवाने की धमकी दी। वह किसी तरह घर पहुंचा और कोतवाली पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस के सुनवाई न करने पर उसने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने कोतवाली प्रभारी को इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर जांच के आदेश दिए।
कोतवाली प्रभारी संतोष यादव ने बताया कि इस मामले में बैंक प्रबंधक संजीव कुमार के खिलाफ धारा 420, 468, 471, 384 में रिपोर्ट दर्ज की गई है। बैंक प्रबंधक का स्थानांतरण हो चुका है। वह इस समय हरिद्वार रायवाला शाखा में तैनात है। मामले की जांच की जा रही है।