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आतंकियों की पनाहगाह रहा है बिजनौर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sun, 09 Jul 2017 12:26 AM IST
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कल्हेड़ी में आतंकी गतिविधियों के आरोपी कदीर का घर।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में बिजनौर पहले से ही आतंकियों का गढ़ रहा है। बिजनौर के मोहल्ला जाटान में विस्फोट के बाद आतंकियों के यहां पनाह लेने की कलई खुली थी। वर्ष 2013 में मध्य प्रदेश की खंडवा जेल से फरार आतंकियों ने बिजनौर के मोहल्ला जाटान व भाटान के मकानों में शरण ली थी।
12 सितंबर 2014 को मोहल्ला जाटान में लीलो देवी के मकान में बम बनाते हुए विस्फोट होने से उनके आतंकी होने का खुलासा हुआ था। पुलिस को आतंकियों के कमरे से सिलेंडर बम, बम बनाने का सामान, पिस्टल, लैपटॉप व आसपास के जिलों में रोडवेज से सफर करने के टिकट आदि बरामद किए थे। आतंकी महबूब इस विस्फोट में घायल हुआ था। आतंकी मददगारों की वजह से आसानी से बिजनौर से निकल गए थे।
इसके बाद देशभर की सुरक्षा एजेंसियों ने इन फरार छह आतंकियों को ढूंढ़ने की कोशिश की, लेकिन उनका पता नहीं चला। बाद में तेलंगाना व मध्य प्रदेश में मुठभेड़ के दौरान ये आतंकी ढेर कर दिए गए थे। जांच के बाद पुलिस ने मोहल्ला भाटान निवासी रईस, उसके पुत्र अब्दुल्ला, गांव उमरी की हुस्ना, उसके भाई झालू के फुरकान को आतंकियों की मदद के आरोप में पकड़ा था। इससे पहले वर्ष 2001 में भी जिले की पुलिस ने नजीबाबाद रोड पर मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया था। दो पुलिसकर्मी भी इस मुठभेड़ में शहीद हुए थे।
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नहटौर के नाजिम ने मुंबई में बनाया था आतंकी गुट
नहटौर के नाजिम ने मुंबई में रहकर अपना आतंकी गुट बना लिया था। कई युवाओं को उसने साथ जोड़ लिया था। पुलिस ने नाजिम को दबोचकर उसके साथियों को भी पकड़ा था।नाजिम मुंबई में काम करने के नाम पर गया था। वहां वह आईएस से जुड़ गया था। सऊदी अरब में उसके ट्रेनिंग लेने की बात भी सामने आई थी। नाजिम के साथ बढ़ापुर की मोती मस्जिद का इमाम मुफ्ती फैजान भी जुड़ा था। फैजान ने मदरसों में पढ़ने वाले कई युवाओं को बरगलाकर साथ जोड़ लिया था। एटीएस ने फैजान समेत पांच लोगों को दबोचा था। बाद में किसी घटना में संलिप्त न पाए जाने पर चार युवकों को भविष्य में ऐसी हरकत न करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया था। फैजान, नाजिम व उसके दो अन्य साथी अप्रैल माह में दबोच लिए गए थे। नाजिम ने साथियों के साथ पंजाब में बैठकर आतंकी वारदात अंजाम देने की योजना बनाई थी। इसके लिए नाजिम का गैंग धन जुटाने में लगा था।
मुस्तफा का दत्तक पुत्र है सलीम
दाऊद इब्राहिम गैंग से जुड़ा सलीम कुत्ता नजीबाबाद क्षेत्र के कल्हेड़ी निवासी मुस्तफा का दत्तक पुत्र है। मुस्तफा की शादी मुंबई के एक इलाके से हुई थी। गांव वालों के मुताबिक सलीम अपनी मां के साथ गांव आया था। कल्हेड़ी में भी सलीम खूब रहा। वह मुंबई भी आता-जाता था। मुंबई में रहने के दौरान ही उसके तार दाऊद इब्राहिम गैंग से जुड़ गए। इसके बाद सलीम नजीबाबाद के लोगों को भी अपने साथ गैंग से जोड़ता गया। कल्हेड़ी में कदीर ने आलीशान कोठी बनाई थी। इसकी कोठी को देखकर हर कोई हैरत में पड़ गया।
दो पाकिस्तानी जिले से लापता
पाकिस्तान से वीजा लेकर आए दो लोग जिले में लापता हैं। खुफिया एजेंसियों की तमाम कोशिशों के बाद भी इन दोनों का कुछ पता नहीं चला। 1965 में लाहौर से अफजाल अहमद व 1981 में मोहम्मद नूरनवी पाकिस्तान से घूमने के लिए वीजा पर भारत आए थे। ये दोनों बिजनौर भी आए। बिजनौर से दोनों बिना किसी को सूचना दिए गायब हो गए। दोनों कहां गए, कुछ पता नहीं चला। दोनों की खूब तलाश की गई, लेकिन वे नहीं मिले।
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12 सितंबर 2014 को मोहल्ला जाटान में लीलो देवी के मकान में बम बनाते हुए विस्फोट होने से उनके आतंकी होने का खुलासा हुआ था। पुलिस को आतंकियों के कमरे से सिलेंडर बम, बम बनाने का सामान, पिस्टल, लैपटॉप व आसपास के जिलों में रोडवेज से सफर करने के टिकट आदि बरामद किए थे। आतंकी महबूब इस विस्फोट में घायल हुआ था। आतंकी मददगारों की वजह से आसानी से बिजनौर से निकल गए थे।
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इसके बाद देशभर की सुरक्षा एजेंसियों ने इन फरार छह आतंकियों को ढूंढ़ने की कोशिश की, लेकिन उनका पता नहीं चला। बाद में तेलंगाना व मध्य प्रदेश में मुठभेड़ के दौरान ये आतंकी ढेर कर दिए गए थे। जांच के बाद पुलिस ने मोहल्ला भाटान निवासी रईस, उसके पुत्र अब्दुल्ला, गांव उमरी की हुस्ना, उसके भाई झालू के फुरकान को आतंकियों की मदद के आरोप में पकड़ा था। इससे पहले वर्ष 2001 में भी जिले की पुलिस ने नजीबाबाद रोड पर मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया था। दो पुलिसकर्मी भी इस मुठभेड़ में शहीद हुए थे।
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नहटौर के नाजिम ने मुंबई में बनाया था आतंकी गुट
नहटौर के नाजिम ने मुंबई में रहकर अपना आतंकी गुट बना लिया था। कई युवाओं को उसने साथ जोड़ लिया था। पुलिस ने नाजिम को दबोचकर उसके साथियों को भी पकड़ा था।नाजिम मुंबई में काम करने के नाम पर गया था। वहां वह आईएस से जुड़ गया था। सऊदी अरब में उसके ट्रेनिंग लेने की बात भी सामने आई थी। नाजिम के साथ बढ़ापुर की मोती मस्जिद का इमाम मुफ्ती फैजान भी जुड़ा था। फैजान ने मदरसों में पढ़ने वाले कई युवाओं को बरगलाकर साथ जोड़ लिया था। एटीएस ने फैजान समेत पांच लोगों को दबोचा था। बाद में किसी घटना में संलिप्त न पाए जाने पर चार युवकों को भविष्य में ऐसी हरकत न करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया था। फैजान, नाजिम व उसके दो अन्य साथी अप्रैल माह में दबोच लिए गए थे। नाजिम ने साथियों के साथ पंजाब में बैठकर आतंकी वारदात अंजाम देने की योजना बनाई थी। इसके लिए नाजिम का गैंग धन जुटाने में लगा था।
मुस्तफा का दत्तक पुत्र है सलीम
दाऊद इब्राहिम गैंग से जुड़ा सलीम कुत्ता नजीबाबाद क्षेत्र के कल्हेड़ी निवासी मुस्तफा का दत्तक पुत्र है। मुस्तफा की शादी मुंबई के एक इलाके से हुई थी। गांव वालों के मुताबिक सलीम अपनी मां के साथ गांव आया था। कल्हेड़ी में भी सलीम खूब रहा। वह मुंबई भी आता-जाता था। मुंबई में रहने के दौरान ही उसके तार दाऊद इब्राहिम गैंग से जुड़ गए। इसके बाद सलीम नजीबाबाद के लोगों को भी अपने साथ गैंग से जोड़ता गया। कल्हेड़ी में कदीर ने आलीशान कोठी बनाई थी। इसकी कोठी को देखकर हर कोई हैरत में पड़ गया।
दो पाकिस्तानी जिले से लापता
पाकिस्तान से वीजा लेकर आए दो लोग जिले में लापता हैं। खुफिया एजेंसियों की तमाम कोशिशों के बाद भी इन दोनों का कुछ पता नहीं चला। 1965 में लाहौर से अफजाल अहमद व 1981 में मोहम्मद नूरनवी पाकिस्तान से घूमने के लिए वीजा पर भारत आए थे। ये दोनों बिजनौर भी आए। बिजनौर से दोनों बिना किसी को सूचना दिए गायब हो गए। दोनों कहां गए, कुछ पता नहीं चला। दोनों की खूब तलाश की गई, लेकिन वे नहीं मिले।