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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Absolve the accused in dowry harassment

दहेज उत्पीड़न में आरोपी दोषमुक्त

Thu, 12 Jan 2017 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 12 Jan 2017 12:04 AM IST
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बिजनौर में एडीजे नसीम अहमद ने दहेज उत्पीड़न के आरोपी को निचली अदालत से मिली दो साल की सजा को निरस्त कर दिया है। निचली अदालत ने पति के परिजनों को बरी कर दिया था। इस मामले में महिला के आरोपी पति ब्रह्म सिंह को दो साल की सजा सुनाई थी।
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थाना मंडावर के गांव तिमरपुर निवासी ब्रह्मा सिंह का विवाह 19 फरवरी 2006 को बिजनौर के रविदास नगर निवासी महावीर सिंह की पुत्री सुनीता के साथ हुआ था। महिला सुनीता ने अपने पति ब्रह्म सिंह, ससुर दिलेराम, सास दुलारी, देवर मोहित व नंद उर्मिला के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की रिपोर्ट कोर्ट के आदेश पर दर्ज कराई थी। इसमें महिला सुनीता ने कहा था कि उसका पति व ससुराल वाले कम दहेज लाने की वजह से उसे प्रताड़ित करते थे। 
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50 हजार रुपये नगद, फ्रिज, वाशिंग मशीन व गैस सिलेंडर की मांग करते थे। 11 फरवरी 2007 को उसके पति व ससुरालवालों ने उससे मारपीट की। सूचना पर उसके पिता उसे लिवाकर ले गए। अगले दिन 12 फरवरी को उसका पति व परिजन उसके पिता के घर आए  और दहेज की मांग करते हुए   उसके साथ मारपीट की। पुलिस ने इस मामले में आरोप सही नहीं  पाए जाने पर फाइनल रिपोर्ट अदालत को प्रेषित की थी। सुनीता के प्रोटेस्ट पीटिशन दाखिल करने  पर इस मामले की सुनवाई कोर्ट  में हुई थी। 
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अपर सिविल जज जूनियर डिविजन कोर्ट नंबर (चार) ने महिला के ससुर दिलेराम, सास दुलारी देवी, नंद उर्मिला को आरोप सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया था। अदालत ने आरोपी ब्रह्म सिंह   को दहेज उत्पीड़न में दोषी पाते हुए दो वर्ष का कारावास व दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ ब्रह्म सिंह ने अपील दाखिल की थी। इस मामले की सुनवाई एडीजे नसीम अहमद की अदालत में हुई।  एडीजे द्वारा दिए गए अपने निर्णय में कहा गया कि किसी को अनुमान, अटकलों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। निचली अदालत ने साक्ष्य मूल्यांकन उचित प्रकार से नहीं किया है। निचली अदालत का निर्णय विधि सम्मत  नहीं है। इसलिए ब्रह्म सिंह को दोषमुक्त किया जाता है।
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