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दूसरों के मेडिकल प्रमाण पत्रों से आयुष्मान योजना का लाभ लेने के मामले ने तूल पकड़ा, नोडल अधिकारी ने की चैकिंग
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स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी जांच करने पहुंचे अस्पताल
धामपुर। चिकित्सक डा. लोकेंद्र सिंह के मेडिकल प्रमाणपत्र चोरी कर नगर के एक डाक्टर की ओर से आयुष्मान भारत योजना का लाभ उठाने के लिए अपने आवेदन के साथ संलग्न करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शनिवार को इस मामले की जांच करने को स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डा. एसके निगम ने संबंधित अस्पताल में पहुंच कर जांच की। जांच के दौरान आरोपी डॉक्टर के अस्पताल में न मिलने पर अस्पताल के मैनेजर को तलब किया गया। नोडल अधिकारी ने असंतोष जताया और 18 मार्च को हर हाल में नोटिस के जवाब के साथ पेश करने के निर्देश दिए।
हाईवे 74 पर शिशु मंदिर के निकट डा. लोकेंद्र सिंह का सरल अस्पताल के नाम से हास्पिटल संचालित है। केंद्र सरकार की ओर से जब गरीबों और मध्यम परिवार के बीमार लोगों को पांच लाख तक का उपचार कराने को आयुष्मान योजना को चालू किया तो नगर के अन्य डाक्टरों के साथ सरल अस्पताल के एमडी चिकित्सक डा. लोकेंद्र सिंह ने भी आवेदन किया, लेकिन कई माह बीतने के बाद उनके अस्पताल का नाम योजना के पैनल में शामिल नहीं हुआ। पता लगा कि उनके मेडिकल प्रमाणपत्र अन्य डाक्टर के आवेदन में संलग्न है। उन्होंने इस मामले को इंडियन मेडिकल ऐसोसिएशन के सामने रखा और उनके साथ धोखाधड़ी करने वालों पर कार्रवाई की मांग की। इस मामले में अभी तक तहरीर नहीं दी गई है।
इस मामले में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डा. एसके निगम ने टीम के साथ आरोपी डॉक्टर के अस्पताल जाकर चेकिंग की। अस्पताल में आरोपी डाक्टर न मिलने के कारण नोडल अधिकारी ने अस्पताल के मैनेजर को तलब किया। नोडल अधिकारी ने अस्पताल मैनेजर से प्रेक्टिस करने वाले चिकित्सकों का ज्वाइनिंग लेटर और त्यागपत्र दिए जाने वाले लैटर को शपथपत्रों के साथ उपलब्ध कराने, योजना के तहत अब तक कितने मरीजों का उपचार किए जाने और कितने का पेमेंट मिलने का डिटेल , योजना की पंजीकरण फाइल मांगी, पर वह इनमें से कुछ भी पेश नहीं कर सकी। इस पर निगम ने सीएमओ शरद कुमार त्यागी की ओर से 15 मार्च को भेजे गए नोटिस के उत्तर के साथ हर हाल में 18 मार्च को पेश करने के निर्देश दिए। चेताया कि यदि जांच में गड़बड़ी सिद्ध हुआ तो विभाग की ओर से दोषियों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट कायम कराकर कार्रवाई कराई जाएगी। टीम डा. लोकेंद्र सिंह के न मिलने पर वापस हो गई। नोडल अधिकारी ने प्रैक्टिस पैनल में शामिल दर्शाए गए डाक्टरों से भी 18 मार्च को शपथपत्र के साथ स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद डा. निगम ने नगर के कई अस्पतालों की भी चेकिंग की।
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पेमेंट पर लगाई रोक
अस्पताल का मैनेजर ने बताया कि योजना के तहत अब तक एक मरीज का उपचार हुआ है। जिसके पेमेंट मिलने न मिलने के बारे में वह नहीं अवगत करा सकते। बताया कि डाक्टर साहब बाहर हैं, जब वह आएंगे, तभी उनकी मांग के अनुरूप प्रमाण पत्रों को उपलब्ध करा सकेंगे। उन्होंने लगे आरोपों को गलत बताया है। नोडल अधिकारी ने मौके से फोन कर सीएमओ से पेमेंट पर रोक लगाने की सिफारिश की। कहा कि जब तक जांच पूरी तरह से न हो जाए, तब पेमेंट नहीं होना चाहिए।
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धामपुर। चिकित्सक डा. लोकेंद्र सिंह के मेडिकल प्रमाणपत्र चोरी कर नगर के एक डाक्टर की ओर से आयुष्मान भारत योजना का लाभ उठाने के लिए अपने आवेदन के साथ संलग्न करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शनिवार को इस मामले की जांच करने को स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डा. एसके निगम ने संबंधित अस्पताल में पहुंच कर जांच की। जांच के दौरान आरोपी डॉक्टर के अस्पताल में न मिलने पर अस्पताल के मैनेजर को तलब किया गया। नोडल अधिकारी ने असंतोष जताया और 18 मार्च को हर हाल में नोटिस के जवाब के साथ पेश करने के निर्देश दिए।
हाईवे 74 पर शिशु मंदिर के निकट डा. लोकेंद्र सिंह का सरल अस्पताल के नाम से हास्पिटल संचालित है। केंद्र सरकार की ओर से जब गरीबों और मध्यम परिवार के बीमार लोगों को पांच लाख तक का उपचार कराने को आयुष्मान योजना को चालू किया तो नगर के अन्य डाक्टरों के साथ सरल अस्पताल के एमडी चिकित्सक डा. लोकेंद्र सिंह ने भी आवेदन किया, लेकिन कई माह बीतने के बाद उनके अस्पताल का नाम योजना के पैनल में शामिल नहीं हुआ। पता लगा कि उनके मेडिकल प्रमाणपत्र अन्य डाक्टर के आवेदन में संलग्न है। उन्होंने इस मामले को इंडियन मेडिकल ऐसोसिएशन के सामने रखा और उनके साथ धोखाधड़ी करने वालों पर कार्रवाई की मांग की। इस मामले में अभी तक तहरीर नहीं दी गई है।
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इस मामले में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डा. एसके निगम ने टीम के साथ आरोपी डॉक्टर के अस्पताल जाकर चेकिंग की। अस्पताल में आरोपी डाक्टर न मिलने के कारण नोडल अधिकारी ने अस्पताल के मैनेजर को तलब किया। नोडल अधिकारी ने अस्पताल मैनेजर से प्रेक्टिस करने वाले चिकित्सकों का ज्वाइनिंग लेटर और त्यागपत्र दिए जाने वाले लैटर को शपथपत्रों के साथ उपलब्ध कराने, योजना के तहत अब तक कितने मरीजों का उपचार किए जाने और कितने का पेमेंट मिलने का डिटेल , योजना की पंजीकरण फाइल मांगी, पर वह इनमें से कुछ भी पेश नहीं कर सकी। इस पर निगम ने सीएमओ शरद कुमार त्यागी की ओर से 15 मार्च को भेजे गए नोटिस के उत्तर के साथ हर हाल में 18 मार्च को पेश करने के निर्देश दिए। चेताया कि यदि जांच में गड़बड़ी सिद्ध हुआ तो विभाग की ओर से दोषियों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट कायम कराकर कार्रवाई कराई जाएगी। टीम डा. लोकेंद्र सिंह के न मिलने पर वापस हो गई। नोडल अधिकारी ने प्रैक्टिस पैनल में शामिल दर्शाए गए डाक्टरों से भी 18 मार्च को शपथपत्र के साथ स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद डा. निगम ने नगर के कई अस्पतालों की भी चेकिंग की।
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पेमेंट पर लगाई रोक
अस्पताल का मैनेजर ने बताया कि योजना के तहत अब तक एक मरीज का उपचार हुआ है। जिसके पेमेंट मिलने न मिलने के बारे में वह नहीं अवगत करा सकते। बताया कि डाक्टर साहब बाहर हैं, जब वह आएंगे, तभी उनकी मांग के अनुरूप प्रमाण पत्रों को उपलब्ध करा सकेंगे। उन्होंने लगे आरोपों को गलत बताया है। नोडल अधिकारी ने मौके से फोन कर सीएमओ से पेमेंट पर रोक लगाने की सिफारिश की। कहा कि जब तक जांच पूरी तरह से न हो जाए, तब पेमेंट नहीं होना चाहिए।