{"_id":"59c2be2c4f1c1b29688b59b2","slug":"171505934892-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो साल पहले इकलौते बेटे की कैंसर ने छीन ली थी जिंदगी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
दो साल पहले इकलौते बेटे की कैंसर ने छीन ली थी जिंदगी
Updated Thu, 21 Sep 2017 12:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर। बांकपुर के राशन डीलर सुरेश कुमार का दो साल पहले ही परिवार उजड़ गया था। कैंसर से उनके 18 साल के इकलौते बेटे की मौत हो गई थी। तब से वे अपनी दो बेटियों को ही बेटा मानकर चल रहे थे। गंगा बैराज पर चाचा के साथ छोटी बेटी ने पिता और मां के शव को मुखाग्नि दी तो सबकी आंखें भर आईं।
कोतवाली देहात थाने के गांव बांकपुर निवासी राशन डीलर सुरेश कुमार बेटी की ननद नहटौर निवासी दीक्षा अंबाला पंजाब में एक कोचिंग सेंटर में टीचर थी। दीक्षा की भतीजी आन्या का शुक्रवार को पहला जन्मदिन है। दीक्षा जन्मदिन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रही थी। उसे दो दिन पहले घर आकर जन्मदिन की तैयारी करनी थी। दीक्षा ट्रेन से सुबह करीब पांच बजे मुजफ्फरनगर उतरी। वहां से दीक्षा को लेने के लिए सुरेश अपनी पत्नी रूकमेश के साथ कार से गए थे। उन्हें क्या मालूम था कि मुजफ्फरनगर से वह घर वापस नहीं लौट पाएंगे। रास्ते में ही उन्हें मौत झपट लेगी। देवल से पहले ट्रक व कार की भिड़ंत में सुरेश कुमार, उनकी पत्नी रूकमेश व दीक्षा की मौत हो गई। तीनों की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। सुरेश कुमार वरिष्ठ अधिवक्ता व रालोद नेता प्रवीण देशवाल के बहनोई थे। प्रवीण देशवाल के मुताबिक दो साल पहले सुरेश कुमार के इकलौते पुत्र समीर की कैंसर के चलते मौत हो गई थी। उनकी बड़ी बेटी छवि चौधरी नहटौर के पीएनबी बैंक में असिस्टेंट मैनेजर है। छोटी बेटी छाया चौधरी दिल्ली में एक कंपनी चला रही है। समीर की मौत के बाद बेटी छवि व छाया को ही सुरेश अपना बेटा मानते थे। गंगा बैराज पर पिता सुरेश व मां रूकमेश के शव को चाचा भूपेश के साथ छोटी छाया ने जब मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें भर आईं।
विज्ञापन
कोतवाली देहात थाने के गांव बांकपुर निवासी राशन डीलर सुरेश कुमार बेटी की ननद नहटौर निवासी दीक्षा अंबाला पंजाब में एक कोचिंग सेंटर में टीचर थी। दीक्षा की भतीजी आन्या का शुक्रवार को पहला जन्मदिन है। दीक्षा जन्मदिन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रही थी। उसे दो दिन पहले घर आकर जन्मदिन की तैयारी करनी थी। दीक्षा ट्रेन से सुबह करीब पांच बजे मुजफ्फरनगर उतरी। वहां से दीक्षा को लेने के लिए सुरेश अपनी पत्नी रूकमेश के साथ कार से गए थे। उन्हें क्या मालूम था कि मुजफ्फरनगर से वह घर वापस नहीं लौट पाएंगे। रास्ते में ही उन्हें मौत झपट लेगी। देवल से पहले ट्रक व कार की भिड़ंत में सुरेश कुमार, उनकी पत्नी रूकमेश व दीक्षा की मौत हो गई। तीनों की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। सुरेश कुमार वरिष्ठ अधिवक्ता व रालोद नेता प्रवीण देशवाल के बहनोई थे। प्रवीण देशवाल के मुताबिक दो साल पहले सुरेश कुमार के इकलौते पुत्र समीर की कैंसर के चलते मौत हो गई थी। उनकी बड़ी बेटी छवि चौधरी नहटौर के पीएनबी बैंक में असिस्टेंट मैनेजर है। छोटी बेटी छाया चौधरी दिल्ली में एक कंपनी चला रही है। समीर की मौत के बाद बेटी छवि व छाया को ही सुरेश अपना बेटा मानते थे। गंगा बैराज पर पिता सुरेश व मां रूकमेश के शव को चाचा भूपेश के साथ छोटी छाया ने जब मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें भर आईं।
विज्ञापन