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घरों में शौचालय बनवाने में जुटे दावेदार
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घरों में शौचालय बनवाने में जुटे दावेदार
बिजनौर। त्रि स्तरीय पंचायत चुनावों के दावेदारों ने प्रधान पदों का आरक्षण घोषित होते ही दावेदारों ने चुनावी तैयारियों में तेजी ला दी है। दावेदार अपने घरों में शौचालय बनवा रहे हैं। साथ ही उन्होंने राजकीय बकायेदारी अदा करने के लिए अभिलेख खंगालने शुरू कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्वच्छ भारत मिशन की नई शुरुआत है।
जिले में जिला पंचायत सदस्य तथा हर ब्लॉक की पंचायतों में आरक्षित होने वाले प्रधान पद की संख्या स्पष्ट हो गई है। बिहार राज्य के पंचायत चुनाव में वही दावेदार होगा जिसके घर में पक्का शौचालय होगा, प्रत्याशी सहकारी समितियों समेत किसी राजकीय देय का बकाएदार न हो। जिले के उम्मीदवारों को आशंका है कि उत्तर प्रदेश में भी इस तरह का निर्देश जारी न हो जाए। इसी के चलते उन्होंने अपने घरों में टूटे फ़ूटे शौचालय को पक्का कराना शुरू कर दिया है। कुछ दावेदार तो घर व घेर दोनों जगह शौचालय बनवा रहे हैं, ताकि कोई अड़चन न आए। शौचालय बनवाने वालों में प्रधान पद के दावेदार अधिक हैं। शासन ने निर्देश दिए हैं कि दावेदारों को प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए सहकारी समितियों व अन्य विभागों का बकाया जमा करना होगा। समितियों से मिल रही जानकारी के अनुसार दावेदार अपने बकाया की जानकारी लेने आ रहे हैं। जिले की समितियों में हजारों बकाएदार हैं। तहसीलदार सदर प्रीति सिंह के अनुसार बैंक बकाएदारों की सूची मांगी जा रही है। आयोग के निर्देश हैं कि जिस निवर्तमान प्रधान ने चुनाव खर्च का विवरण जमा नहीं किया है वह चुनाव नहीं लड़ सकेगा। दोबारा चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में लगे प्रधान जिला निर्वाचन कार्यालय में आकर जानकारी ले रहे हैं। प्रभारी सुनील कुमार ने बताया कि प्रधान चुनाव की 75 हजार रुपये, ग्राम पंचायत सदस्य की दस हजार रुपये, क्षेत्र पंचायत सदस्य की 75 हजार रुपये तथा जिला पंचायत सदस्य की एक लाख पचास हजार रुपये खर्च सीमा है।
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बिजनौर। त्रि स्तरीय पंचायत चुनावों के दावेदारों ने प्रधान पदों का आरक्षण घोषित होते ही दावेदारों ने चुनावी तैयारियों में तेजी ला दी है। दावेदार अपने घरों में शौचालय बनवा रहे हैं। साथ ही उन्होंने राजकीय बकायेदारी अदा करने के लिए अभिलेख खंगालने शुरू कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्वच्छ भारत मिशन की नई शुरुआत है।
जिले में जिला पंचायत सदस्य तथा हर ब्लॉक की पंचायतों में आरक्षित होने वाले प्रधान पद की संख्या स्पष्ट हो गई है। बिहार राज्य के पंचायत चुनाव में वही दावेदार होगा जिसके घर में पक्का शौचालय होगा, प्रत्याशी सहकारी समितियों समेत किसी राजकीय देय का बकाएदार न हो। जिले के उम्मीदवारों को आशंका है कि उत्तर प्रदेश में भी इस तरह का निर्देश जारी न हो जाए। इसी के चलते उन्होंने अपने घरों में टूटे फ़ूटे शौचालय को पक्का कराना शुरू कर दिया है। कुछ दावेदार तो घर व घेर दोनों जगह शौचालय बनवा रहे हैं, ताकि कोई अड़चन न आए। शौचालय बनवाने वालों में प्रधान पद के दावेदार अधिक हैं। शासन ने निर्देश दिए हैं कि दावेदारों को प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए सहकारी समितियों व अन्य विभागों का बकाया जमा करना होगा। समितियों से मिल रही जानकारी के अनुसार दावेदार अपने बकाया की जानकारी लेने आ रहे हैं। जिले की समितियों में हजारों बकाएदार हैं। तहसीलदार सदर प्रीति सिंह के अनुसार बैंक बकाएदारों की सूची मांगी जा रही है। आयोग के निर्देश हैं कि जिस निवर्तमान प्रधान ने चुनाव खर्च का विवरण जमा नहीं किया है वह चुनाव नहीं लड़ सकेगा। दोबारा चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में लगे प्रधान जिला निर्वाचन कार्यालय में आकर जानकारी ले रहे हैं। प्रभारी सुनील कुमार ने बताया कि प्रधान चुनाव की 75 हजार रुपये, ग्राम पंचायत सदस्य की दस हजार रुपये, क्षेत्र पंचायत सदस्य की 75 हजार रुपये तथा जिला पंचायत सदस्य की एक लाख पचास हजार रुपये खर्च सीमा है।
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