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खेती के लिए पंजीकृत ट्रैक्टरों से किया जा रहा कॉमर्शियल कार्य
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बिजनौर। जिले में खेती के लिए पंजीकृत ट्रैक्टरों से ही कॉमर्शियल कार्य किया जा रहा है। पूरे जनपद की चीनी मिलों में गन्ना क्रय केंद्रों से गन्ना ढोने में बड़े-बड़े ट्राले लगे हैं। इससे खेती-किसानी के नाम पर कारोबार किया जा रहा है, तो वहीं सरकार को भी राजस्व का चूना लग रहा है। कई बार ये ओवरलोड ट्राले दुर्घटनाओं का भी सबब बन जाते हैं।
सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय (एआरटीओ) में दो प्रकार के वाहनों का पंजीकरण किया जाता है। निजी उपयोग के लिए और व्यवसायिक प्रयोग के लिए। खेती के लिए ट्रैक्टरों का भी पंजीकरण होता है। लेकिन जनपद में कुछ लोग खेती के लिए पंजीकृत कराए ट्रैक्टरों से व्यवसायिक कार्य ले रहे हैं। ऐसे लोग सरकार को लाखों रुपये की राजस्व हानि पहुंचा रहे हैं। जिले भर में गन्ना क्रय केंद्रों से चीनी मिलों तक ये ट्रैक्टर ट्राले ट्रकों से भी अधिक गन्ना लादकर लाते हैं। ऐसे में चालक को दोनों साइड और पीछे का बिल्कुल भी नहीं दिखता। केवल सामने का ही दिखता है। ऐसे में दुर्घटनाएं होने का खतरा बना रहता है। इन सबका पता होने के बाद भी पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते।
नाम न छापने की शर्त पर ऐसे ही कुछ ट्रैक्टर चालकों ने बताया कि जगह-जगह पैसा बंधा है, इसलिए वे बेरोकटोक आराम से निकल जाते हैं। आरआई सुरेंद्र कुमार सिंह के अनुसार किसी भी कॉमर्शियल वाहन की अधिकतम लंबाई साढ़े छह मीटर से साढ़े 18 मीटर और चौड़ाई 2.60 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कॉमर्शियल ट्राले पर टैक्स 500 रुपये और प्रति टन 525 रुपये के हिसाब से ऑनलाइन फीस जमा होती है। खेती के लिए कोई शुल्क या टैक्स देय नहीं है।
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एआरटीओ प्रशासन प्रणव झा ने बताया कि सभी आरोप निराधार हैं। किसी भी वाहन चालक को नियम विरुद्ध वाहनों का संचालन नहीं करने दिया जाएगा। जो वाहन जिस मद के लिए पंजीकृत है, उसका उसी के अनुरूप संचालन करना होगा। ऐसा न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जनपद में लगभग 116 कॉमर्शियल टैक्टर, 98 ट्राले और खेती के लिए 34 हजार 664 ट्रैक्टर स्वामियों ने पंजीकरण करा रखा है, जबकि 1200 ट्राली पंजीकृत हैं।
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सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय (एआरटीओ) में दो प्रकार के वाहनों का पंजीकरण किया जाता है। निजी उपयोग के लिए और व्यवसायिक प्रयोग के लिए। खेती के लिए ट्रैक्टरों का भी पंजीकरण होता है। लेकिन जनपद में कुछ लोग खेती के लिए पंजीकृत कराए ट्रैक्टरों से व्यवसायिक कार्य ले रहे हैं। ऐसे लोग सरकार को लाखों रुपये की राजस्व हानि पहुंचा रहे हैं। जिले भर में गन्ना क्रय केंद्रों से चीनी मिलों तक ये ट्रैक्टर ट्राले ट्रकों से भी अधिक गन्ना लादकर लाते हैं। ऐसे में चालक को दोनों साइड और पीछे का बिल्कुल भी नहीं दिखता। केवल सामने का ही दिखता है। ऐसे में दुर्घटनाएं होने का खतरा बना रहता है। इन सबका पता होने के बाद भी पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते।
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नाम न छापने की शर्त पर ऐसे ही कुछ ट्रैक्टर चालकों ने बताया कि जगह-जगह पैसा बंधा है, इसलिए वे बेरोकटोक आराम से निकल जाते हैं। आरआई सुरेंद्र कुमार सिंह के अनुसार किसी भी कॉमर्शियल वाहन की अधिकतम लंबाई साढ़े छह मीटर से साढ़े 18 मीटर और चौड़ाई 2.60 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कॉमर्शियल ट्राले पर टैक्स 500 रुपये और प्रति टन 525 रुपये के हिसाब से ऑनलाइन फीस जमा होती है। खेती के लिए कोई शुल्क या टैक्स देय नहीं है।
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एआरटीओ प्रशासन प्रणव झा ने बताया कि सभी आरोप निराधार हैं। किसी भी वाहन चालक को नियम विरुद्ध वाहनों का संचालन नहीं करने दिया जाएगा। जो वाहन जिस मद के लिए पंजीकृत है, उसका उसी के अनुरूप संचालन करना होगा। ऐसा न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जनपद में लगभग 116 कॉमर्शियल टैक्टर, 98 ट्राले और खेती के लिए 34 हजार 664 ट्रैक्टर स्वामियों ने पंजीकरण करा रखा है, जबकि 1200 ट्राली पंजीकृत हैं।